Vande Mataram Row: ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से देश की जनता और इसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर आत्मा से माफी मांगने को कहा है। वहीं, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज और बीजेपी नेता सुमित्रो चटर्जी ने भी कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगने की अपील की है।
अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
“Sonia ji, the people are watching. This insult to Vande Mataram is something they will never forgive. If there is even a shred of shame left among Congress leaders, they should apologise to the immortal soul of Rishi Bankim Chandra Chattopadhyay.”
— Union Home Minister Shri… pic.twitter.com/1kC4pa4C8Z
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 16, 2026 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 16 अगस्त को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम’ को भुलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक गीत को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका वह हकदार है।
शाह ने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के 80 साल बाद इस बार लाल किले की प्राचीर से और देशभर में ध्वजारोहण के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को विशेष महत्व दिया गया।
उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस अमर रचना के शब्दों को बोलते हुए स्वतंत्रता सेनानियों ने फांसी के फंदे को चूमा, गोलियां और लाठियां खाईं तथा वर्षों तक जेल में यातनाएं सहीं।
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के कारण ‘वंदे मातरम’ को भुला दिया। उन्होंने कहा कि गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे फिर से राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने का काम किया है।
सोनिया गांधी पर क्या आरोप लगा?
Sumitro Chatterjee, BJP MLA, Naihati, and direct descendant of Bankim Chandra Chattopadhyay, has written to Sonia Gandhi expressing anguish over the Vande Mataram recitation at Congress HQ row. He has demanded an unconditional apology from her to the citizens of India,… pic.twitter.com/Ei3d6OGAKy
— ANI (@ANI) August 16, 2026 अमित शाह ने कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा।
शाह के मुताबिक, कांग्रेस मुख्यालय में जब ‘वंदे मातरम’ का गायन चल रहा था, तब सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से कथित तौर पर इसे रोकने के लिए कहा। शाह ने कहा कि यह घटना टीवी पर देश के लोगों ने देखी।
उन्होंने कहा कि जिस समय बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को लंबे समय बाद फिर से सम्मान मिल रहा था, उस समय कथित तौर पर उसे रोकने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
शाह ने कांग्रेस से देश की जनता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का गायन अधूरा छोड़ने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
बंकिम चंद्र के वंशज ने भी मांगी माफी
इस विवाद में अब बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी भी सामने आए हैं। उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कथित घटना पर बिना शर्त माफी मांगने की अपील की है।
चटर्जी ने कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, उस समय कांग्रेस मुख्यालय में हुई कथित घटना बेहद दुखद है। उनके मुताबिक, यह स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ी संवेदनशील विरासत के प्रति असम्मान को दर्शाती है।
उन्होंने खुद को एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का वंशज बताते हुए इस घटना पर दुख और आक्रोश जताया।
चटर्जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल एक रचना नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की सामूहिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा जुड़ा है ‘वंदे मातरम’
‘वंदे मातरम’ का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में इसके ऐतिहासिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे प्रस्तुत किया था।
इसके बाद स्वतंत्रता आंदोलन के अलग-अलग चरणों में भी इस गीत का इस्तेमाल राष्ट्रवादी भावना जगाने के लिए किया गया। 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा इसके गायन का भी उल्लेख मिलता है।
चटर्जी ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रवादी आंदोलनों के बीच ‘वंदे मातरम’ एक प्रेरणादायक मंत्र की तरह मौजूद रहा। इसी वजह से इसके सम्मान को स्वतंत्रता संग्राम की विरासत के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।
कांग्रेस पर जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुकने का आरोप
सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में कांग्रेस ने मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के बाद ‘वंदे मातरम’ के इस्तेमाल को लेकर समझौता किया था।
उन्होंने दावा किया कि उसी वर्ष गीत के कुछ हिस्सों को लेकर बदलाव किया गया और अब मौजूदा विवाद में भी कांग्रेस की कथित असहजता उसी इतिहास की याद दिलाती है।
हालांकि, इस तरह के ऐतिहासिक और राजनीतिक दावों को लेकर अलग-अलग पक्षों की व्याख्या रही है। इसलिए मौजूदा विवाद को समझते समय राजनीतिक आरोपों और ऐतिहासिक तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
क्या है पूरा ‘वंदे मातरम’ विवाद?
विवाद की शुरुआत 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के एक वीडियो से हुई। बीजेपी का दावा है कि कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का गायन चल रहा था और इसी दौरान सोनिया गांधी तथा मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत हुई।
बीजेपी नेताओं ने वीडियो के आधार पर आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने गीत को रोकने का संकेत दिया। इसी दावे को लेकर अमित शाह और अन्य बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। कांग्रेस के मुताबिक, वीडियो में सोनिया गांधी खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था को लेकर बात कर रही थीं।
इस तरह फिलहाल विवाद का एक बड़ा हिस्सा वीडियो की राजनीतिक व्याख्या और दोनों दलों के दावों के बीच फंसा हुआ है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर कानून में क्या बदलाव हुआ?
इस विवाद के बीच ‘वंदे मातरम’ के संवैधानिक और कानूनी दर्जे को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले महीने संसद में पारित एक विधेयक में राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय बनाने का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में राष्ट्रगीत के सम्मान और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
इतिहास और राजनीति के बीच बढ़ा विवाद
‘वंदे मातरम’ विवाद अब केवल एक कार्यक्रम में हुए कथित घटनाक्रम तक सीमित नहीं रहा है। बीजेपी इसे राष्ट्रवादी विरासत और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बता रही है।
अमित शाह के हमले और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी की माफी की मांग के बाद यह विवाद और गहरा गया है। अब सबकी नजर कांग्रेस की ओर से इस मामले में आगे आने वाली प्रतिक्रिया पर है।


