भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला लगातार छठे कारोबारी सत्र भी जारी रहा। गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल देखने को मिला। बाजार में चौतरफा खरीदारी के बीच BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पहली बार ₹500 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। अमेरिकी मिड टर्म चुनाव के नतीजों से ग्लोबल बाजारों में बने सकारात्मक माहौल, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने घरेलू शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
गुरुवार की तेजी के साथ निवेशकों की संपत्ति में एक ही कारोबारी दिन में करीब ₹7.7 लाख करोड़ का इजाफा हुआ। इससे बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच उत्साह बढ़ गया है। लगातार छह सत्रों से जारी तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को मजबूत बढ़त दिलाई है। हालांकि, बाजार के मौजूदा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल भी है कि क्या आने वाले दिनों में तेजी का यह सिलसिला जारी रहेगा या बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
HighLights
- BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप पहली बार ₹500 लाख करोड़ के पार पहुंचा।
- गुरुवार को सेंसेक्स 1,561 अंक चढ़कर 78,862 के स्तर पर बंद हुआ।
- निफ्टी में 457 अंकों की तेजी दर्ज की गई और यह 24,419 पर पहुंच गया।
- एक दिन में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹7.7 लाख करोड़ का इजाफा हुआ।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और FII की खरीदारी से बाजार को मिला सपोर्ट।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का कारोबारी सत्र ऐतिहासिक साबित हुआ। लगातार छठे दिन तेजी के साथ कारोबार करते हुए घरेलू बाजार ने नया रिकॉर्ड बना दिया। BSE में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पहली बार ₹500 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह बढ़कर ₹501.14 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
इससे पिछले कारोबारी सत्र में BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹493.44 लाख करोड़ था। इस तरह एक ही दिन में बाजार पूंजीकरण में लगभग ₹7.7 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को जबरदस्त फायदा हुआ और भारतीय शेयर बाजार ने अपनी मजबूती का नया उदाहरण पेश किया।
लगातार छठे कारोबारी सत्र में Sensex और Nifty की तेजी
गुरुवार को शेयर बाजार में शुरुआत से ही सकारात्मक माहौल देखने को मिला। कारोबार के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में खरीदारी का जोर रहा। इसका असर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया।
BSE का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,561 अंकों की शानदार बढ़त के साथ 78,862 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 457 अंक चढ़कर 24,419 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों सूचकांकों में लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई।
पिछले छह कारोबारी सत्रों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सेंसेक्स में कुल 5,754 अंकों की बढ़त दर्ज की गई है। इसी अवधि में निफ्टी भी करीब 1,881 अंक मजबूत हुआ है। लगातार हो रही खरीदारी से बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों के लिए भी लगातार छह सत्रों की तेजी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के सकारात्मक संकेत मौजूद हैं। वैश्विक बाजारों में सुधार के साथ विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को अतिरिक्त मजबूती दी है।
अमेरिकी मिड टर्म चुनाव के नतीजों से ग्लोबल बाजार में उत्साह
भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे अमेरिकी मिड टर्म चुनाव के नतीजों से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल को भी एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वहां होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम का असर वैश्विक निवेशकों की रणनीति पर पड़ता है।
अमेरिकी मिड टर्म चुनाव के नतीजों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। इससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ और शेयर बाजारों में खरीदारी को समर्थन मिला।
जब वैश्विक बाजारों में निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है, तो उभरते बाजारों में भी विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है। भारत जैसे बड़े उभरते बाजार को इसका फायदा मिलता है। यही वजह है कि अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार में भी दिखाई दिया।
हालांकि, अमेरिकी चुनाव के नतीजे बाजार की तेजी का अकेला कारण नहीं हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेश और घरेलू शेयरों में खरीदारी जैसे दूसरे कारकों ने भी इस तेजी को मजबूत बनाया।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय बाजार को राहत
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा महत्वपूर्ण रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात बिल, व्यापार घाटे और महंगाई पर पड़ सकता है।
इसके उलट जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इससे कंपनियों की लागत कम हो सकती है और महंगाई के दबाव को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
तेल की कीमतों में नरमी से खासतौर पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एविएशन, पेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद रहती है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
गुरुवार को बाजार में तेजी के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को भी एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया। इससे निवेशकों को भारतीय अर्थव्यवस्था के बाहरी जोखिमों को लेकर कुछ राहत मिली।
FII की खरीदारी से बाजार को मिला मजबूत सपोर्ट
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों के शेयरों में खरीदारी करते हैं, तो बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिल सकती है।
हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार के सकारात्मक रुख को समर्थन दिया है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार और भारतीय बाजार के प्रति बेहतर निवेश धारणा के कारण विदेशी पूंजी का प्रवाह बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी का असर केवल सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बैंकिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं और अन्य प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों पर भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि, FII की खरीदारी का रुख लगातार एक जैसा नहीं रहता। वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और अमेरिकी बाजारों के प्रदर्शन के आधार पर विदेशी निवेशक अपनी रणनीति में बदलाव करते रहते हैं।
₹500 लाख करोड़ का मार्केट कैप क्या बताता है?
BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण ₹500 लाख करोड़ के पार पहुंचना भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मार्केट कैप का मतलब किसी कंपनी के शेयरों की मौजूदा कीमत और उसके कुल बकाया शेयरों की संख्या के गुणनफल से होता है। सभी लिस्टेड कंपनियों के बाजार पूंजीकरण को जोड़ने पर कुल बाजार पूंजीकरण मिलता है।
इस आंकड़े में बढ़ोतरी का मतलब है कि शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के कुल मूल्यांकन में इजाफा हुआ है। जब प्रमुख कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ती हैं, तो उनके मार्केट कैप में भी बढ़ोतरी होती है। इसका सीधा असर BSE के कुल बाजार पूंजीकरण पर पड़ता है।
गुरुवार को BSE का कुल मार्केट कैप ₹501.14 लाख करोड़ पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि मौजूदा तेजी में बाजार की बड़ी कंपनियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
हालांकि, मार्केट कैप में बढ़ोतरी को निवेशकों के खाते में जमा वास्तविक नकदी के बराबर नहीं समझना चाहिए। यह बाजार में शेयरों की मौजूदा कीमतों के आधार पर निकाला गया मूल्यांकन है।
क्या आगे भी जारी रहेगी शेयर बाजार में तेजी?
लगातार छह कारोबारी सत्रों की तेजी और बाजार पूंजीकरण के ₹500 लाख करोड़ के पार पहुंचने के बाद निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर रहेगी। बाजार की आगे की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी।
अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो घरेलू बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
दूसरी ओर, लगातार तेजी के बाद कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए केवल रिकॉर्ड तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला लेना सही रणनीति नहीं होगी।
निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही निवेश से जुड़े फैसले लें।
कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को ₹500 लाख करोड़ के मार्केट कैप का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर एक नया मुकाम हासिल किया है। अमेरिकी मिड टर्म चुनाव के बाद सकारात्मक वैश्विक माहौल, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार की तेजी को मजबूती दी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या बाजार आने वाले दिनों में इस तेजी को बरकरार रख पाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है, इसे निवेश की सलाह न समझें। NewsJagran निवेश की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श लें।


