UPI Transaction MDR: यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी सूत्रों ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि यूपीआई पर MDR लागू करने का फैसला किसी विदेशी दबाव में लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय में ज्यादा टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
नई MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है। इसके तहत 2,000 रुपये तक के कुछ यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन को शुल्क से मुक्त रखा गया है, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार MDR लागू होगा।
UPI पर MDR को लेकर क्या है सरकार का कहना?
Govt Sources: MDR is not under any pressure. GST on UPI is a false rumour. It will be set off in Input tax credit. If there will be any issue then that will be looked into by the GST Council. We don't see much increase in cash transactions due to MDR. We are confident that there… pic.twitter.com/Axji6D9mTB
— ANI (@ANI) September 17, 2026 सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यूपीआई पर MDR लागू करने का फैसला किसी बाहरी दबाव का नतीजा नहीं है। सरकार का कहना है कि यूपीआई नेटवर्क के लगातार विस्तार के साथ डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना भी जरूरी है।
सरकार ने विदेशी दबाव से जुड़े दावों के संदर्भ में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट में विदेशी कंपनियों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड को यूपीआई नेटवर्क पर समान अवसर देने की मांग की गई थी। हालांकि, भारत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
सरकारी पक्ष के मुताबिक, RuPay डेबिट कार्ड को MDR से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सरकार का तर्क है कि इससे घरेलू भुगतान नेटवर्क को विदेशी कंपनियों द्वारा जारी कार्ड की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है।
MDR पर GST को लेकर भी सरकार ने दी सफाई
UPI MDR के साथ GST को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि MDR के ऊपर कोई अलग से नया GST नहीं लगाया गया है।
हालांकि, जहां MDR पर GST लागू होगा, वहां संबंधित कारोबारी को उस GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने की सुविधा मिलेगी। कारोबारी इस क्रेडिट का इस्तेमाल अपनी GST देनदारी को समायोजित करने में कर सकते हैं।
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि MDR पर GST से सरकार को कोई बड़ा अतिरिक्त शुद्ध टैक्स राजस्व हासिल होगा। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट के कारण सरकार को MDR पर नेट टैक्स रेवेन्यू मिलने की उम्मीद नहीं है।
अगर इस व्यवस्था को लेकर आगे कोई नई चिंता या व्यावहारिक समस्या सामने आती है, तो उस पर GST Council विचार कर सकती है।
6.5 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट UPI नेटवर्क से जुड़े
सरकार ने UPI MDR व्यवस्था को समझाने के लिए डिजिटल पेमेंट नेटवर्क के तेजी से हुए विस्तार का भी उल्लेख किया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, शुरुआती दौर में यूपीआई पर लेनदेन की संख्या काफी कम थी, लेकिन अब यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। देश में 6.5 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट यूपीआई नेटवर्क से जुड़े हैं।
वहीं, यूपीआई के जरिए होने वाले सालाना लेनदेन की संख्या अब 24,000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। यूपीआई की पहुंच भारत के अलावा कई दूसरे देशों तक भी हो चुकी है और यह सेवा अब 11 देशों में उपलब्ध है।
इस बढ़ते नेटवर्क के साथ पेमेंट सिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स, मर्चेंट्स और अन्य संस्थाओं के लिए लागत और राजस्व का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है।
2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर क्या होगा?
सरकार की ओर से जारी व्यवस्था के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन को शुल्क से मुक्त रखा गया है।
यह प्रावधान Payment and Settlement Systems (PSS) Act में संशोधन के बाद 14 सितंबर की सरकारी अधिसूचना के जरिए सामने आया है।
हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट लेनदेन के लिए National Payments Corporation of India (NPCI) की ओर से अलग-अलग कैटेगरी के आधार पर टियर-बेस्ड MDR स्ट्रक्चर लागू किया गया है।
यहां यह समझना जरूरी है कि हर UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा। Peer-to-Peer यानी P2P ट्रांजैक्शन को MDR के दायरे से बाहर रखा गया है। MDR मुख्य रूप से निर्धारित मर्चेंट कैटेगरी और ट्रांजैक्शन के प्रकार पर निर्भर करेगा।
MDR कितना हो सकता है?
नई व्यवस्था में अलग-अलग मर्चेंट कैटेगरी के लिए अलग MDR निर्धारित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ कैटेगरी में यह शुल्क करीब 5 रुपये के फ्लैट चार्ज से शुरू हो सकता है, जबकि कुछ विशेष वर्टिकल में यह करीब 0.4 फीसदी तक हो सकता है।
इसका मतलब यह है कि MDR की वास्तविक लागत ट्रांजैक्शन की रकम के साथ-साथ उस मर्चेंट कैटेगरी और भुगतान के प्रकार पर भी निर्भर करेगी।
शेयर बाजार के लेनदेन पर 0.02% MDR
सरकार ने शेयर बाजार से जुड़े डिजिटल लेनदेन के लिए लागू MDR को लेकर भी जानकारी दी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस सेगमेंट में 0.02 फीसदी MDR निर्धारित किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह दर तय करने से पहले SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श किया गया था। पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ भी इस व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई।
इसलिए शेयर बाजार से जुड़े डिजिटल भुगतान के लिए लागू MDR को भी सामान्य UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन से अलग व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।
UPI MDR का आम यूजर पर क्या असर होगा?
MDR मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम के बीच लागू होने वाला शुल्क है। इसलिए इसका सीधा असर हर व्यक्ति के सामान्य P2P UPI भुगतान पर नहीं पड़ेगा।
2,000 रुपये तक के निर्धारित UPI मर्चेंट लेनदेन को शुल्क से मुक्त रखने का प्रावधान भी किया गया है। वहीं, 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा।
सरकार की ओर से GST को लेकर भी यह स्पष्ट किया गया है कि MDR पर लागू GST के लिए पात्र कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सरकार का फोकस डिजिटल पेमेंट सिस्टम को टिकाऊ बनाने पर
सरकार का कहना है कि यूपीआई का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ा है, उसके साथ डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखना जरूरी है। इसी संदर्भ में MDR व्यवस्था लाई जा रही है।
वहीं, सरकार ने विदेशी दबाव से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि भारत ने विदेशी क्रेडिट कार्ड कंपनियों को UPI नेटवर्क पर समान अवसर देने की मांग को स्वीकार नहीं किया। सरकार ने RuPay डेबिट कार्ड को MDR से बाहर रखने को भी अपनी नीति के समर्थन में महत्वपूर्ण बिंदु बताया है।
नई MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव को मर्चेंट, पेमेंट एग्रीगेटर और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के स्तर पर देखा जा सकेगा।
Source: सरकारी सूत्रों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित।
डिस्क्लेमर: UPI MDR और GST से जुड़े नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं। किसी भुगतान या कारोबारी निर्णय से पहले संबंधित सरकारी अधिसूचना और NPCI के आधिकारिक नियमों की जांच करें।


