मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच UAE ने पाकिस्तान से 2 अरब डॉलर का कर्ज तुरंत वापस मांगा। जानिए पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा स्थिति और आगामी आर्थिक चुनौतियां।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध की पृष्ठभूमि में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान से अपना कर्ज तुरंत वापस मांग लिया है। इस कर्ज की कुल राशि लगभग 2 अरब डॉलर है, जिसे पाकिस्तान ने अपने भुगतान संतुलन (Balance of Payment) को सहारा देने के लिए लिया था।
यूएई ने क्यों मांगा कर्ज की वसूली?
यूएई ने पाकिस्तान को जो कर्ज दिया था, उस पर करीब 6 प्रतिशत ब्याज लगता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की युद्ध जैसी हालिया घटनाओं ने खाड़ी देशों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। सऊदी अरब और UAE जैसे तेल और गैस सप्लायर देशों की सप्लाई रुक गई है और ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों को अंजाम दे रहा है।
इन परिस्थितियों में UAE ने पाकिस्तान से कहा कि उसका कर्ज तुरंत लौटाया जाए। पाकिस्तान ने UAE की मांग स्वीकार करते हुए इस महीने के अंत तक 2 अरब डॉलर की राशि चुकाने का निर्णय लिया है।
कर्ज की पृष्ठभूमि
- यह कर्ज पाकिस्तान के भुगतान संतुलन को सहारा देने के लिए दिया गया था।
- पैसा स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) में सुरक्षित रखा गया था।
- पहले UAE हर साल इस जमा राशि को रोलओवर करता था, लेकिन दिसंबर 2025 में इसे केवल एक-दो महीने के लिए बढ़ाया गया।
- वर्तमान में पाकिस्तान इस राशि पर करीब 6% ब्याज चुका रहा था।
पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा स्थिति
पाकिस्तान के पास फिलहाल 21 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे UAE का कर्ज चुकाना संभव है।
हालांकि, चालू वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान को लगभग 12 अरब डॉलर के बाहरी जमा (External Financing) की जरूरत थी:
- सऊदी अरब: 5 अरब डॉलर
- चीन: 4 अरब डॉलर
- UAE: 3 अरब डॉलर
भले ही पाकिस्तान फिलहाल UAE का कर्ज चुका सकता है, लेकिन आने वाले महीनों में उसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद की फिर से आवश्यकता पड़ सकती है।
निष्कर्ष
मध्य-पूर्व में युद्ध और आर्थिक तनाव के बीच UAE का पाकिस्तान से कर्ज की मांग करना संकेत देता है कि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में तेज़ी से बदलाव हो सकते हैं। पाकिस्तान के लिए यह एक चुनौती है कि वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिरता को संतुलित बनाए रखे।
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