TCS AI Strategy: टाटा ग्रुप की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी हजारों खास इंजीनियरों की टीम तैयार कर रही है, जो सीधे ग्राहकों के साथ काम करके AI सॉल्यूशन लागू करेंगे। TCS इसके साथ ही AI, डेटा सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में अधिग्रहण के अवसर भी तलाश रही है।
देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने AI सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़ा प्लान बनाया है। कंपनी करीब 5,900 से 8,900 फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) की एक खास टीम तैयार करने की योजना पर काम कर रही है।
यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब दुनियाभर में AI को लेकर प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है और OpenAI, Microsoft और Anthropic जैसी कंपनियां भी AI एप्लीकेशन को कारोबार तक पहुंचाने के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम बना रही हैं।
TCS बनाएगी फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स की बड़ी टीम
TCS के CEO K. Krithivasan ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि कंपनी अपने कुल कर्मचारियों में से करीब 1% से 1.5% कर्मचारियों को फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियरों के रूप में तैयार करना चाहती है।
TCS में वर्तमान में करीब 6 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में कंपनी की योजना के अनुसार हजारों इंजीनियरों को AI आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इन इंजीनियरों की भूमिका पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपर्स से अलग होगी। वे सिर्फ ऑफिस में बैठकर कोडिंग नहीं करेंगे, बल्कि सीधे ग्राहकों के साथ मिलकर उनकी कारोबारी जरूरतों के हिसाब से AI समाधान तैयार करेंगे।
क्या होते हैं फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDE)?
फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर ऐसे तकनीकी विशेषज्ञ होते हैं, जो किसी कंपनी के ग्राहक के साथ मिलकर काम करते हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ सॉफ्टवेयर बनाना नहीं, बल्कि ग्राहक की समस्या को समझकर उसके लिए सही तकनीकी समाधान तैयार करना होता है।
उदाहरण के तौर पर अगर कोई बैंक अपने कस्टमर सर्विस सिस्टम में AI चैटबॉट या ऑटोमेशन लागू करना चाहता है, तो TCS के FDE इंजीनियर:
- बैंक के मौजूदा सॉफ्टवेयर सिस्टम को समझेंगे।
- डेटा और बिजनेस प्रोसेस का विश्लेषण करेंगे।
- AI मॉडल को कंपनी की जरूरत के अनुसार तैयार करेंगे।
- नई तकनीक को पुराने सिस्टम के साथ जोड़ेंगे।
यानी ये इंजीनियर AI को सिर्फ एक तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि बिजनेस समाधान के रूप में लागू करेंगे।
OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों को चुनौती देने की तैयारी
AI इंडस्ट्री में अब सिर्फ बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) बनाना ही महत्वपूर्ण नहीं रह गया है। कंपनियां चाहती हैं कि AI को उनके रोजमर्रा के कारोबार में तेजी से लागू किया जाए।
यही वजह है कि AI कंपनियां फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स की मांग बढ़ा रही हैं। ये विशेषज्ञ ग्राहकों को AI अपनाने में मदद करते हैं।
TCS का मानना है कि उसके पास एक बड़ा फायदा है क्योंकि कंपनी पिछले कई दशकों से दुनियाभर की कंपनियों के आईटी सिस्टम संभाल रही है।
कंपनी के पास बैंकिंग, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में गहरा अनुभव है। TCS अब इसी अनुभव को AI सर्विसेज के साथ जोड़ना चाहती है।
AI और साइबर सिक्योरिटी कंपनियों को खरीदने की तैयारी
AI सर्विसेज को मजबूत करने के लिए TCS सिर्फ अपनी आंतरिक क्षमताओं पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी AI, डेटा सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कंपनियों में निवेश और अधिग्रहण के विकल्प तलाश रही है।
TCS के CFO Samir Seksaria के अनुसार, कंपनी ऐसे कारोबारों की तलाश कर रही है, जो उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकें।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी क्षमता बढ़ाना आईटी कंपनियों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
क्या AI से IT आउटसोर्सिंग मॉडल को खतरा है?
AI के आने के बाद कई निवेशकों को चिंता है कि ऑटोमेशन के कारण आईटी कंपनियों को मिलने वाले प्रोजेक्ट कम हो सकते हैं।
हालांकि, TCS के CEO का मानना है कि AI से आईटी सर्विस कंपनियों की भूमिका खत्म नहीं होगी, बल्कि बदल जाएगी।
उनके अनुसार, कंपनियों को AI लागू करने के लिए ऐसे साझेदारों की जरूरत होगी, जो उनके पुराने सिस्टम, डेटा और बिजनेस प्रोसेस को अच्छी तरह समझते हों।
TCS की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह वर्षों से बड़े कॉरपोरेट ग्राहकों के साथ काम कर रही है।
TCS के AI कारोबार की ग्रोथ में आई धीमी रफ्तार
हालांकि, AI क्षेत्र में कंपनी की योजनाएं बड़ी हैं, लेकिन हाल की तिमाही में AI कारोबार की ग्रोथ थोड़ी धीमी रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में TCS के AI कारोबार से होने वाली सालाना आय की वृद्धि करीब 13% रही, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 28% था।
कंपनी के CEO ने कहा कि लंबी अवधि में वह AI कारोबार में करीब 25% तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ की उम्मीद करते हैं। हालांकि, यह वृद्धि हर तिमाही में समान नहीं रह सकती।
AI और टैलेंट डेवलपमेंट पर ₹8,500 करोड़ का निवेश
TCS हर साल करीब 1 अरब डॉलर यानी लगभग ₹8,500 करोड़ टैलेंट डेवलपमेंट और AI क्षमताओं को बढ़ाने पर खर्च करती है।
इस निवेश में शामिल हैं:
- कर्मचारियों को AI की ट्रेनिंग देना।
- नई AI स्किल्स विकसित करना।
- विशेषज्ञ इंजीनियरों की भर्ती करना।
- नई तकनीकों पर रिसर्च करना।
कंपनी का लक्ष्य है कि उसके कर्मचारी तेजी से बदलती AI टेक्नोलॉजी के लिए तैयार रहें।
TCS की AI रणनीति का भारत की IT इंडस्ट्री पर असर
TCS का यह कदम भारतीय आईटी सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की आईटी कंपनियां लंबे समय से आउटसोर्सिंग मॉडल पर आधारित रही हैं, लेकिन AI के दौर में कंपनियों को हाई-वैल्यू टेक्नोलॉजी सर्विसेज की ओर बढ़ना होगा।
अगर TCS अपनी AI रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो इससे भारतीय आईटी कंपनियों को वैश्विक AI मार्केट में मजबूत स्थिति बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों से मुकाबला आसान नहीं होगा, क्योंकि वे AI मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों स्तरों पर भारी निवेश कर रही हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी भी व्यक्ति को शेयर खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देता है।


