BSE Share Price: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के शेयरों में बुधवार, 2 सितंबर को तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में शेयर मजबूत होकर 3,252 रुपये के स्तर तक पहुंचा, लेकिन इसके बाद बिकवाली बढ़ गई। दोपहर करीब 12 बजे BSE का शेयर लगभग 3 फीसदी गिरकर 3,144.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन के ऊपरी स्तर से स्टॉक में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
शेयर में यह कमजोरी BSE मैनेजमेंट की उस टिप्पणी के बाद देखने को मिली, जिसमें Closing Auction Session (CAS) की वजह से कुछ प्रमुख ट्रेडिंग सेगमेंट में पार्टिसिपेशन घटने की बात कही गई। इसके अलावा NSE के संभावित लिस्टिंग और उसके बाद BSE के प्लेटफॉर्म पर NSE के शेयरों की ट्रेडिंग की संभावना ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है।
CAS की वजह से घटा HFT और रिटेल ट्रेडर्स का पार्टिसिपेशन
BSE मैनेजमेंट ने जी बिजनेस से बातचीत में बताया कि Closing Auction Session यानी CAS की वजह से हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स (HFT), प्रॉपरायटरी अकाउंट्स और रिटेल ट्रेडर्स की भागीदारी में कमी आई है।
मैनेजमेंट के मुताबिक CAS लागू होने के बाद इन सेगमेंट में पार्टिसिपेशन दोबारा बढ़ना जरूरी है। बाजार में इस टिप्पणी को लेकर चिंता इसलिए बढ़ी क्योंकि ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट पार्टिसिपेशन किसी भी स्टॉक एक्सचेंज के कारोबार और कमाई के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
क्या है Closing Auction Session?
Closing Auction Session (CAS) शेयर बाजार के कारोबार के अंत में होने वाला एक छोटा ऑक्शन प्रोसेस है। इसका उद्देश्य किसी शेयर का अधिक उचित और पारदर्शी क्लोजिंग प्राइस तय करना है।
इस प्रक्रिया में खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स को एक निश्चित अवधि के दौरान मैच किया जाता है और इसके आधार पर शेयर का क्लोजिंग प्राइस तय होता है।
BSE में CAS की शुरुआत 3 अगस्त 2026 से हुई थी। दुनिया के कई प्रमुख एशियाई बाजारों में भी क्लोजिंग ऑक्शन की व्यवस्था लागू है। इनमें चीन, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे बाजार शामिल हैं।
CAS से पहले कैसे तय होता था शेयर का क्लोजिंग प्राइस?
CAS लागू होने से पहले शेयरों का क्लोजिंग प्राइस कारोबार के आखिरी 30 मिनट के दौरान लगातार होने वाली ट्रेडिंग के आधार पर तय किया जाता था। इस दौरान हुए ट्रेड्स के औसत मूल्य को क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
रेगुलेटर्स की ओर से CAS व्यवस्था को दुनिया के प्रमुख बाजारों में इस्तेमाल होने वाली प्रणाली को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।
हालांकि, CAS शुरू होने के बाद बाजार में आखिरी चरण के कारोबार के दौरान वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव को लेकर चर्चा बढ़ी है।
CAS में डेली कैश मार्केट टर्नओवर का कितना हिस्सा?
BSE के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, डेली कैश मार्केट टर्नओवर में CAS ट्रेड्स की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम रही है।
इसका मतलब यह है कि CAS विंडो में कुल कारोबार का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा ही होता है। साथ ही इस अवधि में लिक्विडिटी भी कम रही है और मुख्य रूप से संस्थागत भागीदारी देखने को मिली है।
कम पार्टिसिपेशन का सीधा मतलब यह है कि इस अवधि में खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स का आकार अपेक्षाकृत छोटा रहता है।
NSE की संभावित लिस्टिंग से भी BSE को चुनौती
BSE के शेयरों में दबाव की एक दूसरी वजह NSE के शेयरों की संभावित लिस्टिंग भी मानी जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक NSE के शेयरों के BSE पर लिस्ट होने के बाद उन्हें BSE के प्लेटफॉर्म पर ‘Permitted to Trade’ कैटेगरी के तहत ट्रेडिंग की अनुमति मिल सकती है।
अगर ऐसा होता है तो BSE को NSE के शेयरों से मिलने वाला ट्रेडिंग कारोबार भी महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही NSE की मजबूत बाजार स्थिति को देखते हुए निवेशकों के बीच प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
FY27 की कमाई पर 1-2% तक असर का अनुमान
PL Capital की एक रिपोर्ट के मुताबिक, NSE से जुड़े इस संभावित बदलाव का असर FY27 में BSE की कमाई पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर कैश मार्केट में BSE की हिस्सेदारी आगे नहीं बढ़ती है, तो NSE से जुड़े बदलावों के कारण BSE की FY27 earnings पर करीब 1-2 फीसदी का असर पड़ सकता है।
यह अनुमान मौजूदा बाजार हिस्सेदारी और संभावित ट्रेडिंग गतिविधियों को ध्यान में रखकर किया गया है।
ब्रोकरेज फर्मों ने भी घटाया आउटलुक
BSE के शेयर पर कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने भी अपना आउटलुक कम किया है। Nuvama और Jefferies की ओर से BSE को लेकर सतर्क रुख सामने आया है।
वहीं PL Capital ने BSE के शेयर का 12 महीने का टारगेट प्राइस 4,850 रुपये से घटाकर 4,025 रुपये कर दिया है। हालांकि, ब्रोकरेज ने शेयर पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है।
इसका मतलब है कि ब्रोकरेज को लंबी अवधि में स्टॉक में संभावनाएं नजर आ रही हैं, लेकिन निकट अवधि में कमाई, वॉल्यूम और प्रतिस्पर्धा से जुड़े जोखिमों को लेकर सावधानी बरती जा रही है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
BSE के शेयर में आगे की चाल के लिए निवेशकों को कुछ प्रमुख संकेतकों पर नजर रखनी होगी। इनमें कैश मार्केट में BSE की हिस्सेदारी, ट्रेडिंग वॉल्यूम, CAS के बाद पार्टिसिपेशन, NSE की संभावित लिस्टिंग और एक्सचेंज की कमाई प्रमुख हैं।
CAS के कारण अगर HFT, प्रॉपरायटरी और रिटेल ट्रेडर्स की भागीदारी लंबे समय तक कमजोर रहती है, तो इसका असर ट्रेडिंग वॉल्यूम और एक्सचेंज की आय पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर BSE अपनी बाजार हिस्सेदारी और ट्रेडिंग वॉल्यूम में लगातार सुधार करता है, तो मौजूदा दबाव कम हो सकता है।
निष्कर्ष
BSE के शेयरों में 2 सितंबर की गिरावट के पीछे सिर्फ बाजार की कमजोरी नहीं, बल्कि एक्सचेंज के कारोबार से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संकेत भी हैं। CAS के बाद पार्टिसिपेशन में कमी और NSE के संभावित लिस्टिंग से जुड़े घटनाक्रम ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
हालांकि, BSE की Buy रेटिंग बरकरार है और लंबी अवधि में एक्सचेंज की बढ़ती बाजार हिस्सेदारी इसकी कमाई के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। इसलिए निवेशकों के लिए आगे BSE के वॉल्यूम, मार्केट शेयर और CAS के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े अहम रहेंगे।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट्स और बाजार से जुड़ी जानकारी पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


