Success Story: कभी आर्थिक तंगी के कारण टूटे-फूटे जूतों की मरम्मत कर परिवार का सहारा बनने वाले रमेश कुमार दुआ ने अपने भाई मुकुंद लाल दुआ के साथ मिलकर भारतीय फुटवियर उद्योग की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक रिलैक्सो (Relaxo) खड़ी कर दी। आज कंपनी का मार्केट कैप करीब 9,828 करोड़ रुपये है और इसके ब्रांड देश के करोड़ों लोगों की पहली पसंद हैं।
संघर्ष से शुरू हुई सफलता की कहानी

रमेश कुमार दुआ और उनके बड़े भाई मुकुंद लाल दुआ का परिवार मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला था, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के चलते वे दिल्ली आ गए। परिवार का कारोबार भारी कर्ज में डूबा हुआ था और हालात इतने खराब थे कि रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था।
रमेश कुमार दुआ का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों ने उन्हें महज 17 वर्ष की उम्र में कारोबार संभालने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने पढ़ाई जारी रखते हुए दिन का एक हिस्सा पढ़ाई और दूसरा हिस्सा कारोबार को देना शुरू किया।
उस दौर में हालात इतने कठिन थे कि रमेश कुमार दुआ खुद टूटे हुए जूतों के सोल की मरम्मत कर कुछ रुपये कमाते थे।
घाटे का कारोबार बंद कर लिया बड़ा फैसला

साल 1974 में रमेश कुमार दुआ और मुकुंद लाल दुआ ने घाटे में चल रहे साइकिल पार्ट्स के कारोबार को बंद करने का साहसिक निर्णय लिया। इसके बाद रमेश कुमार दुआ रबर तकनीक सीखने के लिए लंदन गए।
उन्होंने The Plastics and Rubber Institute से प्रशिक्षण लिया और समझा कि चमड़े की तुलना में रबर से अधिक टिकाऊ, मजबूत और किफायती फुटवियर तैयार किए जा सकते हैं। भारत लौटने के बाद उन्होंने विशेषज्ञों की मदद से उत्पादन तकनीक में बड़े बदलाव किए, जिससे कंपनी की गुणवत्ता और बिक्री दोनों में तेजी से सुधार हुआ।
हवाई चप्पल से मिली बड़ी पहचान
रिलैक्सो की शुरुआत बेहद साधारण हवाई चप्पलों से हुई थी। बेहतर गुणवत्ता और आम लोगों की पहुंच में कीमत होने के कारण यह ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हो गया।
साल 1976 में सीमित पूंजी से शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे देश के सबसे बड़े फुटवियर ब्रांड्स में शामिल हो गया। समय के साथ कंपनी ने कई लोकप्रिय सब-ब्रांड लॉन्च किए, जिनमें—
- Sparks (स्पोर्ट्स शूज)
- Bahamas
- Flite
- Schoolmate
जैसे नाम शामिल हैं। इन ब्रांड्स ने अलग-अलग ग्राहक वर्गों में मजबूत पहचान बनाई।
महामारी में भी नहीं रुकी बिक्री

कोरोना महामारी के दौरान जब अधिकांश कंपनियां कारोबार में गिरावट से जूझ रही थीं, तब भी रिलैक्सो की मांग बनी रही। वर्ष 2020 में कंपनी ने 17.92 करोड़ से अधिक जोड़ी चप्पलों की बिक्री की, जो उसकी मजबूत ब्रांड वैल्यू और व्यापक ग्राहक आधार का प्रमाण है।
शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद बढ़ी रफ्तार
रिलैक्सो वर्ष 1995 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध (Listed) हुई। इसके बाद कंपनी ने देशभर में कई आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किए और उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार किया।
आज रिलैक्सो भारत की अग्रणी फुटवियर कंपनियों में गिनी जाती है और इसका मार्केट कैप लगभग 9,828.10 करोड़ रुपये है।
आज हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक

कभी टूटे हुए जूते सिलकर परिवार की मदद करने वाले रमेश कुमार दुआ आज करीब 11,540 करोड़ रुपये की अनुमानित व्यक्तिगत नेटवर्थ के मालिक हैं। उनकी कहानी इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि मजबूत नींव भी बन सकती हैं।
सफलता से मिलने वाली सीख
रमेश कुमार दुआ और मुकुंद लाल दुआ की यात्रा बताती है कि सही समय पर लिया गया साहसिक फैसला, नई तकनीक अपनाने की सोच और लगातार मेहनत किसी छोटे कारोबार को भी हजारों करोड़ रुपये के बिजनेस में बदल सकती है। संघर्ष से शुरू हुआ यह सफर आज भारतीय उद्यमिता की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में गिना जाता है।


