घर में पौधे लगाने का शौक बना कमाई का जरिया, 1,750 वर्ग फुट में लगाए 360 पौधे; अब स्टेम कटिंग बेचकर भी हो रही अच्छी आमदनी
रिटायरमेंट के बाद जिंदगी को नए तरीके से शुरू करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। कई लोग इस दौर में आराम करना पसंद करते हैं, तो कुछ अपने पुराने शौक को नई दिशा देते हैं। केरल की रेमाबाई एस की कहानी इसी दूसरी श्रेणी में आती है। 30 साल से ज्यादा समय तक जूलॉजी पढ़ाने के बाद रिटायर हुईं रेमाबाई ने खाली समय में पौधे लगाने शुरू किए। यही शौक धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की खेती में बदला और बाद में उनके लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गया।
आज वह सीमित जगह में खेती करने के साथ ड्रैगन फ्रूट की स्टेम कटिंग भी बेचती हैं। अलग-अलग स्रोतों से उनकी कुल मासिक कमाई करीब ₹4 लाख तक पहुंचने की बात सामने आई है।
मां के निधन और रिटायरमेंट के बाद महसूस हुआ अकेलापन
रेमाबाई एस ने 31 मई 2022 को 30 साल से अधिक समय तक जूलॉजी पढ़ाने के बाद नौकरी से रिटायरमेंट लिया। उनके पति रिटायर्ड सीनियर बैंक मैनेजर हैं और उस समय एक इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े हुए थे। उनका बेटा और बहू दोनों डॉक्टर हैं और दिल्ली में रहते थे।
इसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया। नौकरी से रिटायरमेंट और मां की मौत के बाद उन्हें घर में पहले की तुलना में ज्यादा अकेलापन महसूस होने लगा। इसी खालीपन को दूर करने के लिए उन्होंने घर के आसपास पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का फैसला किया।
शुरुआत में यह सिर्फ एक शौक था, लेकिन आगे चलकर यही शौक एक सफल कृषि व्यवसाय में बदल गया।
52 विदेशी फलों की जानकारी जुटाई, फिर ड्रैगन फ्रूट चुना
रेमाबाई ने खेती को केवल शौक तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग जर्नल पढ़े, इंटरनेट पर जानकारी जुटाई और कई फार्म का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने करीब 52 विदेशी फलों के बारे में अध्ययन किया।
काफी रिसर्च के बाद उन्होंने Malaysian King Red Dragon Fruit किस्म को चुना। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित जगह में ज्यादा पौधे उगाने की थी। इसके लिए उन्होंने हाई-डेंसिटी फार्मिंग का तरीका अपनाया।
इस मॉडल की मदद से कम जगह में अधिक पौधे लगाए जा सकते थे और उपलब्ध स्थान का बेहतर इस्तेमाल संभव हुआ।
1,750 वर्ग फुट में लगाए 360 पौधे
रेमाबाई ने अपने घर के लगभग 1,750 वर्ग फुट हिस्से में ड्रैगन फ्रूट के 360 पौधे लगाए। पौधों को सहारा देने के लिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए 90 कंक्रीट पोल लगाए। प्रत्येक पोल पर चार पौधों को बढ़ने के लिए सहारा दिया गया।
उन्होंने खेती की लागत को नियंत्रित रखने के लिए GI पाइप और पुराने टायरों जैसी चीजों का भी इस्तेमाल किया। शुरुआत में एक पौधे की स्टेम उन्हें लगभग ₹100 में मिली थी।
मेहनत का परिणाम भी ज्यादा देर में नहीं आया। लगभग छह महीने में पौधों पर फूल आने लगे और मार्च 2023 से उन्हें ड्रैगन फ्रूट की पहली फसल मिलने लगी।
₹50 हजार से शुरू हुई कमाई, फिर पहुंची ₹1.5 लाख महीना
पहले चरण में 360 पौधों से रेमाबाई को हर महीने ₹50 हजार से अधिक की आमदनी होने लगी। जैसे-जैसे पौधे विकसित हुए और उत्पादन बढ़ा, उनकी मासिक कमाई करीब ₹1.5 लाख तक पहुंच गई।
उत्पादन के सबसे अच्छे दौर में उनके फार्म से हर महीने लगभग 750 किलो ड्रैगन फ्रूट निकलने लगा। फल की बिक्री करीब ₹175 प्रति किलो की दर से होती थी।
उनके बिजनेस मॉडल की एक खास बात यह थी कि उन्हें फल बेचने के लिए हर बार बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। थोक खरीदार और ऑर्गेनिक स्टोर उनके घर से ही ड्रैगन फ्रूट खरीदकर ले जाते थे।
जमीन बढ़ाए बिना छत पर शुरू किया दूसरा प्रयोग
जब खेती से कमाई बढ़ने लगी तो रेमाबाई के सामने अगला सवाल था कि उत्पादन को और कैसे बढ़ाया जाए। नई जमीन खरीदना उनके लिए जरूरी नहीं था। उन्होंने घर की छत का इस्तेमाल करने का फैसला किया।
हालांकि, छत पर बड़ी मात्रा में मिट्टी ले जाना उन्हें व्यावहारिक नहीं लगा। इसलिए उन्होंने सोइल-लेस या कम मिट्टी वाली खेती के विकल्प पर प्रयोग शुरू किया।
उन्होंने सामान्य मिट्टी और घर पर तैयार कंपोस्ट में पौधों की ग्रोथ की तुलना की। प्रयोग में कंपोस्ट वाले पौधों की वृद्धि बेहतर नजर आई। इसके बाद उन्होंने छत पर इसी मॉडल को अपनाना शुरू कर दिया।
50 बैरल में लगाए 100 नए पौधे
रेमाबाई ने छत पर करीब 50 बैरल रखे। इनमें कंपोस्ट और गोबर की खाद का मिश्रण इस्तेमाल किया गया। प्रत्येक बैरल में दो ड्रैगन फ्रूट पौधे लगाए गए।
इस तरह केवल छत की मदद से उन्होंने 100 अतिरिक्त पौधे तैयार कर लिए। करीब पांच महीने में इन पौधों पर फल आने लगे और अक्टूबर 2023 तक छत से भी उत्पादन शुरू हो गया।
एक पौधे पर एक समय में करीब 10 से 20 फल तक दिखाई देने लगे। इस प्रयोग ने यह दिखाया कि खेती के लिए हमेशा बड़े खेत की जरूरत नहीं होती, अगर उपलब्ध जगह का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए।
घर के कचरे से बनाती हैं कंपोस्ट
रेमाबाई के खेती मॉडल की एक और खासियत है कि वह जैविक कचरे को बेकार नहीं जाने देतीं। घर और बगीचे से निकलने वाले कई तरह के जैविक अवशेषों को वह खाद बनाने में इस्तेमाल करती हैं।
किचन वेस्ट, पत्तियां, कटहल के अवशेष, प्याज और सब्जियों से निकलने वाले कचरे से वह कंपोस्ट तैयार करती हैं। इसके लिए उनके पास तीन कंपोस्टिंग यूनिट हैं।
इसके अलावा वह 15 से ज्यादा तरह के लिक्विड प्रिपरेशन भी तैयार करती हैं। मछली के कचरे से फिश अमीनो एसिड बनाने का काम भी वह करती हैं। उनके मुताबिक, अब तक 5,000 लीटर से अधिक ऐसी तैयारी तैयार की जा चुकी है।
इससे खेती में बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है और घर से निकलने वाले जैविक कचरे का भी उपयोग हो जाता है।
करीब 10 महीने तक मिलता है ड्रैगन फ्रूट
रेमाबाई के मुताबिक, उनके खेती मॉडल से ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन सामान्य मुख्य सीजन की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक जारी रहता है।
जहां आमतौर पर ड्रैगन फ्रूट की मुख्य फसल करीब पांच से छह महीने तक रहती है, वहीं उनके फार्म में लगभग 10 महीने तक फल मिलने की बात कही गई है। हालांकि, जनवरी और फरवरी में उत्पादन में मुख्य अंतराल रहता है।
उनके बगीचे में महीने में करीब तीन बार फसल होती है और हर बार लगभग 250 किलो फल प्राप्त होता है।
अब पौधों की स्टेम कटिंग भी बेचती हैं
रेमाबाई के ड्रैगन फ्रूट फार्म के बढ़ने के साथ उनकी स्टेम कटिंग की मांग भी बढ़ती गई। उन्होंने इसे भी कमाई के एक अलग स्रोत में बदल दिया।
वह एक स्टेम कटिंग करीब ₹70 में बेचती हैं। बताया जाता है कि भारत के अलावा मालदीव और श्रीलंका में भी उनके 2,500 से ज्यादा ग्राहक हैं।
बड़े ऑर्डर को वह कुरियर के माध्यम से भेजती हैं। उनकी बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन तेलंगाना के लिए 5,500 स्टेम कटिंग का ऑर्डर भी भेजा गया।
ग्राहकों को सिर्फ पौधा नहीं, खेती का तरीका भी बताती हैं
रेमाबाई का काम केवल कटिंग बेचने तक सीमित नहीं है। वह अपने ग्राहकों को पौधे लगाने, उन्हें सहारा देने और देखभाल करने से जुड़ी जानकारी भी देती हैं।
वह आगे पौधों की ग्रोथ के बारे में भी जानकारी लेती रहती हैं। उनके अनुसार, अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर स्टेम से करीब छह महीने में फल आना शुरू हो सकता है।
इस तरह उनका मॉडल केवल पौधों की बिक्री पर आधारित नहीं है, बल्कि वह ग्राहकों को ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने में भी मदद करती हैं।
शौक से शुरू हुआ सफर बना आत्मनिर्भरता की मिसाल
रेमाबाई एस की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बिजनेस शुरू करने के लिए न तो बड़ी जमीन खरीदी और न ही शुरुआत में कोई बड़ा सेटअप तैयार किया। उन्होंने अपने घर और उपलब्ध जगह से शुरुआत की।
पहले पौधों को शौक के तौर पर लगाया, फिर विदेशी फलों पर रिसर्च की। ड्रैगन फ्रूट का चुनाव करने के बाद हाई-डेंसिटी फार्मिंग का प्रयोग किया और बाद में छत पर बैरल के जरिए उत्पादन बढ़ाया।
खेती से फल की बिक्री के अलावा स्टेम कटिंग की मांग को भी उन्होंने कमाई के नए जरिये में बदल दिया।
आज ड्रैगन फ्रूट की बिक्री, छत पर उत्पादन और स्टेम कटिंग जैसे अलग-अलग स्रोतों से उनकी कुल मासिक कमाई करीब ₹4 लाख बताई जाती है।
रेमाबाई की यह कहानी बताती है कि रिटायरमेंट किसी कामकाजी जीवन का अंत नहीं, बल्कि नए काम की शुरुआत भी हो सकता है। अगर रुचि, रिसर्च और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल किया जाए तो घर का छोटा-सा बगीचा भी आगे चलकर कमाई का जरिया बन सकता है।


