भारतीय शेयर बाजार में 2 अप्रैल 2026 को भारी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही बाजार करीब 2% तक टूट गया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
Sensex और Nifty में बड़ी गिरावट
शुरुआती ट्रेडिंग में प्रमुख इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई:
- BSE Sensex: 1,433.72 अंक गिरकर 71,700.60 पर
- NSE Nifty 50: 445.70 अंक गिरकर 22,233.70 पर
यह गिरावट करीब 2% के आसपास रही, जो हाल के दिनों में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह
बाजार में गिरावट के पीछे मुख्य कारण है वैश्विक तनाव।
- Donald Trump ने ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी
- इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया
- वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी
इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तनाव के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है:
- Brent Crude Oil: करीब 5% उछलकर $105 प्रति बैरल के आसपास
तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे आयातक देशों पर दबाव बढ़ता है, जिससे बाजार में गिरावट आती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
बाजार पर एक और बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आया:
- FIIs ने ₹8,331 करोड़ के शेयर बेचे
- DIIs ने ₹7,171 करोड़ की खरीदारी की
इसके बावजूद बाजार में कमजोरी बनी रही।
रुपये पर भी दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार:
- बढ़ती तेल कीमतें
- व्यापार घाटा बढ़ने का डर
- विदेशी निवेश की निकासी
इन सभी कारणों से रुपये पर दबाव बना हुआ है।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट
सिर्फ भारत ही नहीं, एशिया के अन्य बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली:
- जापान का Nikkei 225: -2.24%
- दक्षिण कोरिया का Kospi: -4.31%
- हांगकांग का Hang Seng: -1.04%
- चीन का SSE Composite: -0.53%
यह दर्शाता है कि गिरावट ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है।
कल बाजार में आई थी तेजी
गौरतलब है कि 1 अप्रैल 2026 को बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी:
- Sensex: +1,186 अंक
- Nifty: +348 अंक
लेकिन आज का गिरावट भरा रुख निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
- बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है
- शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है
- लॉन्ग टर्म निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं
निष्कर्ष
2 अप्रैल 2026 को शेयर बाजार में आई 2% की गिरावट ने साफ कर दिया है कि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार को सीधे प्रभावित करती हैं।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।
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