नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने चुटीले अंदाज और शब्दों के खेल को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह बनी उनके बेटे ईशान थरूर की एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिस पर शशि थरूर ने ऐसा जवाब दिया कि वह देखते ही देखते वायरल हो गया। इस बातचीत ने सिर्फ “Boomer” शब्द को लेकर बहस नहीं छेड़ी, बल्कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल, पीढ़ियों के अंतर और डिजिटल आदतों पर भी नई चर्चा शुरू कर दी।
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की वकालत की। इसी मुद्दे पर ईशान थरूर ने अपनी राय रखते हुए एक पोस्ट किया, जिस पर उनके पिता शशि थरूर ने मजेदार लेकिन विचारोत्तेजक अंदाज में प्रतिक्रिया दी।
ईशान थरूर की पोस्ट से शुरू हुई चर्चा
ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने श्रीधर वेम्बू की उस राय का समर्थन किया जिसमें भारत में भी कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी।
हालांकि, ईशान ने अपनी बात को हल्के-फुल्के अंदाज में आगे बढ़ाते हुए लिखा कि इससे पहले भारत में व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वाले “Boomers” पर रोक लगाने की जरूरत है। उनका यह व्यंग्यात्मक बयान तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।
शशि थरूर ने बेटे को दिया मजेदार जवाब
ईशान की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने अपने खास अंदाज में लिखा कि भारत की सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियां पश्चिमी देशों से काफी अलग हैं। इसलिए यहां लगभग हर पीढ़ी को किसी न किसी रूप में “बेबी बूमर” कहा जा सकता है।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में बेटे को समझाते हुए कहा कि अगर भारत के संदर्भ में देखा जाए तो उसकी पीढ़ी भी इस श्रेणी से पूरी तरह अलग नहीं मानी जा सकती। थरूर के इस जवाब को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया और कई लोगों ने उनके हास्यबोध की सराहना की।
आखिर क्या होता है ‘Boomer’?
“Boomer” शब्द वास्तव में “Baby Boomer” का संक्षिप्त रूप है। इसका इस्तेमाल आम तौर पर उन लोगों के लिए किया जाता है जिनका जन्म 1946 से 1964 के बीच, यानी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अवधि में हुआ था। उस समय कई देशों में जन्म दर तेजी से बढ़ी थी, इसलिए उस पीढ़ी को “बेबी बूमर्स” कहा गया।
हालांकि, भारत में इस शब्द का इस्तेमाल अक्सर अलग संदर्भ में होता है। सोशल मीडिया पर “Boomer” कहकर ऐसे लोगों को संबोधित किया जाता है जिन्हें पारंपरिक सोच वाला, नई तकनीक से कम जुड़ा हुआ या बिना मांगे सलाह देने वाला माना जाता है। कई बार यह शब्द मजाकिया अंदाज में भी इस्तेमाल किया जाता है।
श्रीधर वेम्बू ने क्यों उठाई बच्चों पर सोशल मीडिया रोक की मांग?
Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने फ्रांस में पारित एक नए कानून का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को भी छोटे बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उनका मानना है कि कम उम्र के बच्चों को मोबाइल स्क्रीन के बजाय किताबों, खेलकूद और वास्तविक जीवन के अनुभवों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में अत्यधिक समय बिताने से बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर असर पड़ सकता है।
फ्रांस ने लागू किया नया कानून
इस सप्ताह फ्रांस की संसद के दोनों सदनों ने एक महत्वपूर्ण कानून को मंजूरी दी, जिसके बाद फ्रांस 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया।
नए कानून के तहत:
- 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा।
- स्कूल परिसर में छात्रों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर भी रोक लगाई जाएगी।
- उद्देश्य बच्चों को डिजिटल लत से बचाना और उन्हें वास्तविक जीवन की गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित करना है।
भारत में भी उठी बहस
श्रीधर वेम्बू के बयान और फ्रांस के फैसले के बाद भारत में भी सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना उनके मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिए फायदेमंद हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को लोगों की निजी पसंद और डिजिटल स्वतंत्रता में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनका तर्क है कि प्रतिबंध लगाने के बजाय अभिभावकों की निगरानी, डिजिटल शिक्षा और जिम्मेदार उपयोग पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।
डिजिटल युग में संतुलन की जरूरत
शशि थरूर और उनके बेटे के बीच हुई यह हल्की-फुल्की बातचीत केवल एक मजाक तक सीमित नहीं रही। इसने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग, पीढ़ियों के नजरिए और डिजिटल संस्कृति जैसे अहम मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। फ्रांस के फैसले और भारत में चल रही चर्चाओं के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के दौर में बच्चों के लिए सही डिजिटल संतुलन कैसे बनाया जाए।


