नई दिल्ली: लोन की पूरी रकम चुकाने के बाद भी अगर बैंक किसी ग्राहक के खाते को डिफॉल्ट के तौर पर रिपोर्ट कर दे, तो इसका सीधा असर उसके क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है। ऐसा ही एक मामला केरल के कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सामने आया, जिसमें HDFC Bank को ग्राहक की गलत क्रेडिट जानकारी सुधारने के साथ कुल ₹60,000 का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
आयोग ने बैंक को मानसिक परेशानी और ग्राहक को हुई कठिनाइयों के लिए ₹50,000 मुआवजा तथा मुकदमे के खर्च के तौर पर ₹10,000 देने का निर्देश दिया। साथ ही बैंक को क्रेडिट रिकॉर्ड में हुई गलती सुधारकर इसकी जानकारी TransUnion CIBIL को देने का भी आदेश दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता ने टू-व्हीलर खरीदने के लिए तत्कालीन सेंट्यूरियन बैंक से लोन लिया था। बाद में सेंट्यूरियन बैंक का विलय HDFC बैंक में हो गया। लोन की किस्तों के भुगतान के लिए ग्राहक ने बैंक को ₹1,725 की 19 पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे।
शिकायत के मुताबिक, बैंक की कस्टडी में रहते हुए इनमें से दो चेक खो गए। इसके बाद बैंक के निर्देश पर ग्राहक ने उन दोनों किस्तों का भुगतान नकद कर दिया। इस तरह लोन की सभी देनदारियां पूरी हो गईं और 11 नवंबर 2009 को लोन अकाउंट बंद कर दिया गया।
लेकिन इसके बावजूद बाद में बैंक की ओर से उक्त लोन अकाउंट को डिफॉल्ट के रूप में रिपोर्ट कर दिया गया। इसका असर ग्राहक के क्रेडिट रिकॉर्ड और CIBIL स्कोर पर पड़ा।
2023 में सामने आई बैंक की गलती
ग्राहक को इस गड़बड़ी की जानकारी अक्टूबर 2023 में तब मिली, जब उसने कारोबार के लिए पंजाब एंड सिंध बैंक से लोन लेने के लिए आवेदन किया। खराब क्रेडिट रिकॉर्ड के कारण उसके लोन आवेदन पर प्रतिकूल असर पड़ा।
ग्राहक ने इसके बाद उपभोक्ता आयोग का रुख किया और बैंक की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाया।
आयोग ने बैंक को माना जिम्मेदार
कोल्लम जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि HDFC बैंक यह स्पष्ट करने में विफल रहा कि 11 नवंबर 2009 को बंद किए जा चुके लोन अकाउंट को बाद में डिफॉल्ट के रूप में क्यों रिपोर्ट किया गया।
आयोग ने बैंक के इस आचरण को गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी माना। ग्राहक द्वारा लोन की देनदारी पूरी किए जाने के बावजूद गलत क्रेडिट जानकारी रिपोर्ट किए जाने से उसे वित्तीय कठिनाइयों और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
CIBIL को आयोग ने नहीं माना दोषी
इस मामले में TransUnion CIBIL को स्वतंत्र रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। आयोग ने माना कि CIBIL मुख्य रूप से अपने सदस्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त क्रेडिट जानकारी को संकलित करता है।
आयोग के अनुसार, संबंधित रिपोर्टिंग संस्था से सही और प्रमाणित जानकारी प्राप्त हुए बिना CIBIL के पास किसी रिकॉर्ड को अपनी ओर से बदलने या हटाने का अधिकार नहीं होता। इसलिए गलत जानकारी की मूल जिम्मेदारी बैंक की रिपोर्टिंग पर आती है।
30 दिन के अंदर रिकॉर्ड सुधारने का आदेश
आयोग ने HDFC बैंक को निर्देश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता के गलत क्रेडिट रिकॉर्ड को दुरुस्त करे और संशोधित जानकारी CIBIL को उपलब्ध कराए।
इसके बाद CIBIL को भी बैंक से सही जानकारी मिलने के 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता के क्रेडिट रिकॉर्ड को अपडेट करना होगा।
इसका मतलब है कि ग्राहक को सिर्फ मुआवजा ही नहीं मिलेगा, बल्कि उसके गलत तरीके से प्रभावित किए गए क्रेडिट रिकॉर्ड को भी ठीक करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
HDFC बैंक को कितना भुगतान करना होगा?
उपभोक्ता आयोग के आदेश के अनुसार बैंक को:
- ₹50,000 — मानसिक परेशानी और हुई कठिनाइयों के लिए मुआवजा
- ₹10,000 — मुकदमे के खर्च के लिए
- कुल ₹60,000 — ग्राहक को भुगतान करना होगा
इसके अलावा, यदि निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो बकाया रकम पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी लागू होगा। यह ब्याज डिफॉल्ट की तारीख से भुगतान किए जाने तक जारी रहने का आदेश दिया गया है।
ग्राहकों के लिए क्या है सबक?
यह मामला दिखाता है कि लोन चुकाने के बाद भी ग्राहक को अपने क्रेडिट रिकॉर्ड की जांच करते रहना चाहिए। अगर किसी बंद लोन को गलती से डिफॉल्ट या बकाया के तौर पर रिपोर्ट किया गया है, तो इसका असर भविष्य में नए लोन या क्रेडिट सुविधा के आवेदन पर पड़ सकता है।
इसलिए लोन बंद होने के बाद बैंक से क्लोजर से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना और समय-समय पर क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करना उपयोगी है। अगर रिपोर्ट में गलत जानकारी दिखाई देती है, तो ग्राहक को पहले संबंधित बैंक के सामने शिकायत दर्ज करानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर संबंधित उपभोक्ता या नियामकीय शिकायत व्यवस्था का सहारा लिया जा सकता है।


