नई दिल्ली: अगर कोई बैंक आपकी अनुमति के बिना आपके बैंक खाते की निजी जानकारी किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा करता है, तो यह बैंकिंग गोपनीयता (Banking Confidentiality) के नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया, जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक ग्राहक का बैंक स्टेटमेंट उसकी सहमति के बिना उसकी पूर्व कंपनी को उपलब्ध करा दिया। इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी मानते हुए 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
क्या है पूरा मामला?
मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी का है। शिकायतकर्ता पंकज कुमार शुक्ला पहले गोविंद शुगर मिल में कार्यरत थे। उनका सीतापुर जिले की एसबीआई हरगांव शाखा में एक व्यक्तिगत बचत खाता (Savings Account) था।
शिकायत के अनुसार, पंकज शुक्ला और गोविंद शुगर मिल के बीच श्रम विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में लंबित था। इसी दौरान कंपनी ने कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया, जिसमें शुक्ला के व्यक्तिगत बैंक खाते का स्टेटमेंट संलग्न था।
शुक्ला का आरोप था कि उन्होंने कभी भी बैंक को अपने निजी खाते की जानकारी किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा करने की अनुमति नहीं दी। उनका कहना था कि बैंक की इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
बैंक स्टेटमेंट में गलत एंट्री का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि उनके बैंक स्टेटमेंट में कुछ गलत एंट्रियां थीं। बाद में एसबीआई ने 29 अप्रैल 2022 को जारी एक पत्र में इन त्रुटियों को स्वीकार करते हुए सुधार किया।
जब शुक्ला ने बैंक से यह पूछा कि उनकी सहमति के बिना उनका बैंक स्टेटमेंट कंपनी को क्यों दिया गया, तो हरगांव शाखा की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में उपभोक्ता आयोग के निर्देश पर 21 जुलाई 2022 को एसबीआई की लखीमपुर खीरी मुख्य शाखा ने स्वीकार किया कि गोविंद शुगर मिल के अनुरोध पर संबंधित बैंक स्टेटमेंट साझा किया गया था।
कोर्ट में SBI ने क्या दलील दी?
एसबीआई ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता कंपनी के पूर्व कर्मचारी थे और गोविंद शुगर मिल का वेतन खाता (Salary Account) भी एसबीआई में ही संचालित होता था।
बैंक के अनुसार, कंपनी ने 9 नवंबर 2021 को कर्मचारियों के वेतन रिकॉर्ड के मिलान के लिए बैंक स्टेटमेंट मांगा था, इसलिए जानकारी साझा करना उचित था। बैंक ने यह भी कहा कि इस मामले में गोविंद शुगर मिल को भी पक्षकार बनाया जाना चाहिए था क्योंकि दोनों के बीच विवाद पहले से हाईकोर्ट में लंबित है।
उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?
जिला उपभोक्ता आयोग ने एसबीआई की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि शिकायतकर्ता का हरगांव शाखा वाला खाता पूरी तरह से व्यक्तिगत बचत खाता था और उसका कंपनी के वेतन खाते या नियोक्ता से कोई संबंध नहीं था।
आयोग ने कहा कि बैंकिंग नियमों के तहत किसी भी ग्राहक की निजी वित्तीय जानकारी उसकी स्पष्ट सहमति के बिना किसी तीसरे पक्ष को देना गोपनीयता का उल्लंघन है। इसलिए एसबीआई की हरगांव और लखीमपुर खीरी मुख्य शाखा दोनों को सेवा में कमी का दोषी माना गया।
बैंक को देना होगा मुआवजा और ब्याज
उपभोक्ता आयोग ने एसबीआई की दोनों शाखाओं को संयुक्त रूप से आदेश दिया कि वे शिकायतकर्ता को:
- 20,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में दें।
- इस राशि पर 26 जुलाई 2022 (शिकायत दर्ज होने की तारीख) से भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज भी अदा करें।
- इसके अलावा 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अलग से भुगतान करें।
इस तरह बैंक पर कुल 25,000 रुपये का आर्थिक दायित्व तय किया गया है, जबकि मुआवजे की राशि पर ब्याज भी देना होगा।
ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला बैंकिंग गोपनीयता और ग्राहकों की निजता के अधिकार को मजबूत करता है। आयोग ने साफ संदेश दिया है कि किसी भी बैंक को ग्राहक की अनुमति के बिना उसके व्यक्तिगत बैंक खाते की जानकारी किसी कंपनी, संस्था या अन्य व्यक्ति के साथ साझा करने का अधिकार नहीं है। यदि ऐसा होता है तो ग्राहक उपभोक्ता आयोग या अन्य सक्षम प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कर न्याय प्राप्त कर सकता है।


