नई दिल्ली: भारत के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात फिलहाल और सस्ता होता दिखाई दे रहा है। इसकी बड़ी वजह रूस से भारत आने वाले तेल टैंकरों के किराए में आई उल्लेखनीय गिरावट है। जुलाई में पश्चिमी रूसी बंदरगाहों से भारत तक कच्चा तेल लाने की परिवहन लागत जून के मुकाबले काफी कम हो गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव आने वाले समय में इस राहत को खत्म कर सकता है।
जुलाई में घटा टैंकरों का किराया
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, गर्मियों के मौसम में शिपिंग गतिविधियों की सुस्ती और बाजार में जहाजों की उपलब्धता बढ़ने के कारण रूस से भारत आने वाले तेल टैंकरों का किराया कम हुआ है। इससे रूसी तेल निर्यातकों के साथ-साथ भारतीय रिफाइनरियों को भी राहत मिली है।
बाल्टिक पोर्ट (प्रिमॉर्स्क) से भारत
- लगभग 1 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले Aframax टैंकर का किराया जून में 10-11 मिलियन डॉलर था।
- जुलाई में यह घटकर 7-8 मिलियन डॉलर रह गया है।
ब्लैक सी पोर्ट (नोवोरोसिस्क) से भारत
- करीब 1.40 लाख टन क्षमता वाले Suezmax टैंकर का किराया जून के 15 मिलियन डॉलर से घटकर 10 मिलियन डॉलर पर आ गया है।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
टैंकर किराया कम होने से रूस से कच्चे तेल की कुल लैंडिंग कॉस्ट घटती है। इसका सीधा फायदा भारतीय रिफाइनरियों को मिलता है, जिससे वे कम लागत पर कच्चा तेल खरीद सकती हैं। यदि वैश्विक बाजार में अन्य परिस्थितियां सामान्य रहती हैं, तो इससे ईंधन की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
रूसी निर्यातकों को भी मिली राहत
एशियाई बाजार में कमजोर मांग और अन्य तेल उत्पादक देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण हाल के महीनों में रूस को अपने यूराल्स (Urals) कच्चे तेल पर अधिक छूट देनी पड़ रही थी। इससे निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया था। अब परिवहन लागत कम होने से उनकी लागत में कमी आई है और उन्हें कुछ राहत मिली है।
आखिर क्यों सस्ता हुआ समुद्री परिवहन?
विशेषज्ञों के मुताबिक टैंकर किराए में गिरावट की प्रमुख वजहें हैं:
- गर्मियों में शिपिंग मांग का अपेक्षाकृत कमजोर होना।
- बाजार में तेल टैंकरों की उपलब्धता बढ़ना।
- वर्ष की शुरुआत की तुलना में फ्रेट मार्केट का सामान्य होना।
इन कारणों से माल ढुलाई की लागत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना नई चिंता
दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है।
यदि इस मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो वैश्विक स्तर पर शिपिंग लागत और तेल की कीमतों में फिर से तेज बढ़ोतरी हो सकती है। इससे भारत सहित कई आयातक देशों की लागत बढ़ने का जोखिम रहेगा।
आगे क्या रह सकती है स्थिति?
व्यापारियों का मानना है कि फिलहाल रूस का तेल निर्यात रिकॉर्ड स्तर के करीब बना हुआ है, जिससे टैंकरों की मांग मजबूत बनी हुई है। यदि होर्मुज में तनाव और बढ़ता है या समुद्री परिवहन प्रभावित होता है, तो मौजूदा राहत अस्थायी साबित हो सकती है और आने वाले महीनों में टैंकर किराया दोबारा बढ़ सकता है।


