भारत में बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी के बीच अब ब्याज दरों को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है। विदेशी बैंकिंग और वित्तीय संस्था Standard Chartered ने अनुमान जताया है कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी Reserve Bank of India अगले महीने होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो करोड़ों लोगों के होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन महंगे हो सकते हैं।
भारत में लंबे समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों ने अब RBI के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की महंगी होती कीमतें और डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता रुपया केंद्रीय बैंक पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
आखिर Repo Rate क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI देश के बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है। इसका असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचता है।
इस समय रेपो रेट लगभग 5.25 फीसदी के आसपास है।
अगर RBI इसमें बढ़ोतरी करता है तो: फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की EMI बढ़ सकती है, नए लोन महंगे हो सकते हैं, बिजनेस लोन की लागत बढ़ेगी, ऑटो और पर्सनल लोन पर असर पड़ सकता है हालांकि जिन लोगों ने फिक्स्ड ब्याज दर पर लोन लिया है, उनकी EMI पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने क्यों जताई दर बढ़ने की आशंका?
Standard Chartered के अर्थशास्त्रियों अनुभूति सहाय और सौरव आनंद ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में महंगाई का खतरा दोबारा बढ़ सकता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
तेल महंगा होने से: पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है, खाद्य वस्तुएं महंगी होती हैं, उद्योगों की लागत बढ़ती है, महंगाई ऊपर जाती है यानी RBI के सामने महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती फिर से खड़ी हो रही है।
रुपये की कमजोरी भी बढ़ा रही चिंता
भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार चला गया था और इसने ऐतिहासिक निचला स्तर भी छुआ। कमजोर रुपया भारत के लिए बड़ी समस्या इसलिए बन जाता है क्योंकि इससे आयात महंगा हो जाता है।
भारत तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कई जरूरी सामान विदेशों से खरीदता है। जब रुपया कमजोर होता है तो इन सभी चीजों का आयात खर्च बढ़ जाता है। इसका असर आखिरकार आम जनता की जेब पर पड़ता है।
यही कारण है कि RBI रुपये को स्थिर रखने के लिए बाजार में डॉलर बेचकर दखल दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी बैंकों के जरिए केंद्रीय बैंक ने डॉलर की भारी बिक्री कर रुपये को संभालने की कोशिश की।
RBI क्यों बढ़ा सकता है ब्याज दर?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार RBI के सामने इस समय तीन बड़ी चुनौतियां हैं:
1. महंगाई का खतरा
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ सकती है।
2. कमजोर रुपया
अगर रुपया लगातार टूटता है तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं।
3. वैश्विक ब्याज दरें
अमेरिका और एशिया के कई देशों में बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरें बढ़ रही हैं। अगर भारत दरें नहीं बढ़ाता तो विदेशी पूंजी बाहर जा सकती है।
इसी वजह से RBI जून की MPC बैठक में सख्त रुख अपना सकता है।
125 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकती हैं दरें?
मार्केट संकेत भी यही दिखा रहे हैं कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप्स के अनुसार अगले 12 महीनों में लगभग 125 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
अगर ऐसा होता है तो: होम लोन EMI काफी बढ़ सकती है, रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव आ सकता है, ऑटो सेक्टर की मांग कमजोर पड़ सकती है, छोटे कारोबारियों की फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है.
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
अगर रेपो रेट बढ़ता है तो सबसे पहले असर मध्यम वर्ग पर दिखेगा। खासकर उन लोगों पर जिन्होंने: होम लोन लिया है, बिजनेस लोन लिया है, कार लोन लिया है, क्रेडिट आधारित खर्च बढ़ाया है.
मान लीजिए किसी व्यक्ति का 30 लाख रुपये का फ्लोटिंग रेट होम लोन है। अगर ब्याज दर में 0.50% की बढ़ोतरी होती है तो EMI में हर महीने हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ आ सकता है।
दूसरी तरफ बैंक FD पर ब्याज थोड़ा बढ़ा सकते हैं, जिससे बचत करने वालों को कुछ फायदा हो सकता है।
5 जून की बैठक पर टिकी बाजार की नजर
अब बाजार की नजर 3 से 5 जून के बीच होने वाली MPC बैठक पर टिकी है। RBI गवर्नर और मौद्रिक नीति समिति की टिप्पणी से यह साफ होगा कि केंद्रीय बैंक महंगाई और रुपये की कमजोरी को लेकर कितना चिंतित है।
अगर RBI सख्त संकेत देता है तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। खासकर बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयर दबाव में आ सकते हैं।
क्या RBI सच में Repo Rate बढ़ाएगा?
फिलहाल यह सिर्फ अनुमान है और अंतिम फैसला RBI की MPC बैठक में ही होगा। लेकिन जिस तरह: कच्चा तेल महंगा हो रहा है, रुपया दबाव में है, वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं, और विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ रही है, उसे देखते हुए बाजार अब ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना को गंभीरता से लेने लगा है।
अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं तो RBI महंगाई और रुपये को संभालने के लिए Repo Rate बढ़ाने का रास्ता चुन सकता है।
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