Reliance Power Share: अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 45% अधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है। मजबूत तिमाही नतीजों के बाद शुक्रवार को शेयर में करीब 3% की तेजी देखने को मिली। हालांकि कंपनी अब भी कर्ज, दिवाला प्रक्रिया और विभिन्न एजेंसियों की जांच जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
Highlights
- Q1 FY27 में शुद्ध लाभ 45% बढ़कर ₹64.71 करोड़ (₹6,471 लाख) रहा।
- तिमाही आय बढ़कर ₹2,103.75 करोड़ (₹2,10,375 लाख) पहुंची।
- नतीजों के बाद शेयर में करीब 3% की तेजी, इंट्राडे हाई ₹25.30।
- जून 2025 के करीब ₹70 के स्तर से शेयर अब भी लगभग 64% नीचे।
- कंपनी पर कर्ज, दिवाला प्रक्रिया और ED-CBI-SEBI जांच का दबाव जारी।
Reliance Power Share में अचानक क्यों आई तेजी?
नई दिल्ली। अनिल अंबानी समूह की कंपनी Reliance Power के शेयरों में शुक्रवार को लंबे समय बाद अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वित्त वर्ष 2026-27 (Q1 FY27) के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 3% तक उछलकर ₹25.30 के स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि यह तेजी उस बड़ी गिरावट के मुकाबले अभी भी काफी छोटी है, क्योंकि जून 2025 में यह शेयर करीब ₹70 के आसपास कारोबार कर रहा था। उस स्तर से अब तक इसमें लगभग 64% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
Q1 FY27 में 45% बढ़ा शुद्ध मुनाफा
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही में रिलायंस पावर का समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) बढ़कर ₹6,471 लाख (₹64.71 करोड़) हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ ₹4,468 लाख (₹44.68 करोड़) था।
इस तरह कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 45% बढ़ा है, जिसने बाजार को सकारात्मक संकेत दिया।
आय में भी दर्ज हुई बढ़ोतरी
कंपनी की कुल आय में भी सुधार देखने को मिला।
- Q1 FY27 कुल आय: ₹2,10,375 लाख (₹2,103.75 करोड़)
- Q1 FY26 कुल आय: ₹2,02,531 लाख (₹2,025.31 करोड़)
यानी कंपनी ने केवल मुनाफे में ही नहीं बल्कि अपने कारोबार से होने वाली आय में भी वृद्धि दर्ज की है। यही वजह रही कि नतीजों के बाद शेयर में खरीदारी बढ़ी।
फिर भी निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं
मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद रिलायंस पावर के सामने कई बड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
कंपनी की सहायक इकाई सामलकोट पावर लिमिटेड (SMPL) के खिलाफ एक कर्जदाता ने लगभग ₹1,841.96 करोड़ (₹1,84,196 लाख) की मांग को लेकर कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने की याचिका दायर की है।
इसके अलावा कंपनी प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की जांच के दायरे में भी है। इन मामलों का असर भविष्य में कंपनी के प्रदर्शन और निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।
कर्ज घटाने पर कंपनी का फोकस
रिलायंस पावर प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वह कर्ज कम करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है। इसमें जरूरत पड़ने पर कुछ परिसंपत्तियों (Assets) की बिक्री भी शामिल हो सकती है। यदि कंपनी सफलतापूर्वक अपना कर्ज कम करती है तो इससे आने वाले समय में उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
तिमाही नतीजों ने यह जरूर दिखाया है कि कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में सुधार आया है। लेकिन केवल अच्छे नतीजे ही निवेश का आधार नहीं हो सकते। कंपनी पर कर्ज, कानूनी मामलों और नियामकीय जांच का दबाव अभी भी बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को भविष्य के तिमाही नतीजों, कर्ज घटाने की रणनीति और नियामकीय घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


