Railway Compensation Claim: भारतीय रेलवे में सफर के दौरान टिकट को लेकर हुई एक बड़ी गलती का खामियाजा एक महिला यात्री को भुगतना पड़ा। कंफर्म टिकट होने के बावजूद उसे आधी रात ट्रेन से उतार दिया गया। इतना ही नहीं, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने महिला को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला भी दर्ज कर दिया। मामला दर्ज होने के बाद महिला की नौकरी तक चली गई। आखिरकार उसने केरल राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां रेलवे की गलती सामने आने के बाद महिला के पक्ष में फैसला सुनाया गया।
रेलवे को देना होगा ₹2 लाख का मुआवजा
केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे को पीड़ित महिला को ₹2 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
आयोग ने रेलवे को मुआवजे की राशि छह सप्ताह के भीतर चुकाने का निर्देश दिया है। अगर तय समयसीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो रेलवे को 8 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के त्रिशूर जिले के एरुमापेट्टी की रहने वाली के. जयस्मिता ने 30 जुलाई 2023 को ट्रेन नंबर 16348 मंगलुरु सेंट्रल-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल एक्सप्रेस में सफर किया था।
महिला ने वडक्कनचेरी से तिरुवनंतपुरम तक यात्रा के लिए रेलवे की रिजर्वेशन विंडो से टिकट बुक कराया था। उन्हें S4 कोच में सीट नंबर 41 पर कंफर्म बर्थ मिली थी।
रात करीब 9 बजे ट्रेन स्टेशन पर पहुंची। महिला ट्रेन में सवार होकर अपनी निर्धारित सीट पर पहुंचीं, लेकिन वहां पहले से कोई दूसरा यात्री बैठा था। जब उन्होंने इस बारे में टीटीई से शिकायत की और अपनी सीट दिलाने के लिए कहा, तो उन्हें बताया गया कि सीट पर बैठा यात्री ही सही यात्री है।
टीटीई ने दावा किया कि महिला का टिकट ऑनलाइन कैंसिल हो चुका है।
महिला ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने टिकट रेलवे रिजर्वेशन काउंटर से बनवाया था और उन्होंने टिकट कैंसिल नहीं कराया। ऐसे में टिकट ऑनलाइन कैंसिल कैसे हो सकता है, यह उनकी समझ से बाहर था।
दो घंटे तक चली बहस, फिर आधी रात को ट्रेन से उतारा
महिला और टीटीई के बीच टिकट को लेकर करीब दो घंटे तक बहस होती रही। इसी दौरान टीटीई ने महिला से कहा कि अगर वह दूसरी सीट चाहती हैं तो उन्हें ₹500 का जुर्माना भरना होगा।
महिला के पास उस समय ₹500 नहीं थे। इसके बाद रात करीब 11 बजे उन्हें अलुवा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया गया।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। रेलवे कर्मचारियों ने महिला को RPF के हवाले कर दिया। RPF ने उन्हें गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। हालांकि बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।
रेलवे की जांच में सामने आई बड़ी गलती
घटना के बाद रेलवे के DRM स्तर पर मामले की जांच कराई गई। जांच में पता चला कि महिला के टिकट से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके ही टिकट कैंसिल कराया गया था।
दरअसल, टिकट बुक करते समय जिस मोबाइल नंबर को सिस्टम में दर्ज किया गया था, उसी नंबर पर टिकट से संबंधित मैसेज भेजा गया। इसी नंबर के जरिए टिकट कैंसिल कर दिया गया था।
महिला का कहना था कि उन्होंने रिजर्वेशन फॉर्म में अपना सही मोबाइल नंबर दर्ज किया था, लेकिन रिजर्वेशन क्लर्क ने सिस्टम में गलत नंबर फीड कर दिया। इसके चलते किसी दूसरे व्यक्ति के पास टिकट से जुड़ा मैसेज पहुंच गया और टिकट कैंसिल हो गया।
गलत मुकदमे की वजह से चली गई नौकरी
रेलवे की जांच के बाद यह भी सामने आया कि महिला के खिलाफ दर्ज किया गया मामला सही आधार पर नहीं था। इसके बाद रेलवे ने मामले को वापस ले लिया।
लेकिन तब तक महिला को काफी नुकसान हो चुका था। मामला दर्ज होने के बाद उनकी सरकारी विभाग में चल रही कॉन्ट्रैक्ट वाली नौकरी चली गई।
नौकरी जाने और पूरी घटना से परेशान महिला ने न्याय के लिए केरल राज्य मानवाधिकार आयोग का रुख किया।
मानवाधिकार आयोग ने रेलवे को माना जिम्मेदार
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस ने माना कि महिला को वैध टिकट होने के बावजूद रात के समय ट्रेन से उतारना गंभीर मामला है।
आयोग के मुताबिक, किसी महिला यात्री को आधी रात में इस तरह ट्रेन से उतारना रेलवे एक्ट की धारा 137 और 139 के उल्लंघन से जुड़ा है। आयोग ने यह भी माना कि इस घटना से महिला के सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन हुआ।
महिला को ₹2 लाख देने के साथ नौकरी के लिए भी राहत
मानवाधिकार आयोग ने रेलवे को महिला को ₹2 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। रेलवे को छह सप्ताह के भीतर राशि का भुगतान करना होगा। देरी होने पर 8 फीसदी की दर से ब्याज देना पड़ेगा।
इसके अलावा आयोग ने महिला को अपनी पुरानी नौकरी वापस पाने के लिए संबंधित विभाग में आवेदन करने का निर्देश भी दिया है।
आयोग ने माइनॉरिटी वेलफेयर डिपार्टमेंट को महिला के आवेदन पर एक महीने के भीतर फैसला लेने के लिए कहा है।
इस मामले से साफ है कि रेलवे टिकट से जुड़ी एक प्रशासनिक गलती का असर यात्री की जिंदगी पर कितना गंभीर हो सकता है। खासतौर पर अकेले सफर कर रही महिला को रात में ट्रेन से उतारने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले टिकट और पूरे मामले की सही तरीके से जांच करना बेहद जरूरी था।


