बच्चों में मोबाइल, टीवी और टैबलेट की आदत बढ़ना आजकल आम बात है। लेकिन अगर स्क्रीन टाइम जरूरत से ज्यादा हो जाए, तो इसका असर उनकी नींद, पढ़ाई, खेलकूद और रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों को डांटने या मोबाइल छीनने के बजाय प्यार और समझदारी से उनकी स्क्रीन की आदत को कंट्रोल करना ज्यादा असरदार हो सकता है।
आज के डिजिटल दौर में बच्चों के लिए मोबाइल, टीवी और टैबलेट पूरी तरह से दूर रखना आसान नहीं है। पढ़ाई, ऑनलाइन क्लास, मनोरंजन और दोस्तों से जुड़ने के लिए भी स्क्रीन का इस्तेमाल होता है। समस्या तब शुरू होती है, जब बच्चा हर खाली समय में मोबाइल या टीवी मांगने लगे और स्क्रीन के बिना उसे समय बिताना मुश्किल लगे।
ऐसे में माता-पिता को स्क्रीन पूरी तरह बंद कराने के बजाय एक हेल्दी बैलेंस बनाने पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों को स्क्रीन के साथ-साथ आउटडोर गेम, किताबें, क्रिएटिव एक्टिविटी और परिवार के साथ समय बिताने के लिए भी प्रोत्साहित करें। आइए जानते हैं बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के 5 आसान और प्यार भरे तरीके।

1. मोबाइल छीनने के बजाय दूसरे विकल्प दें
बच्चा जब मोबाइल या टैबलेट मांगे, तो सीधे मना करने या डांटने के बजाय उसे कोई दूसरा दिलचस्प विकल्प दें। उदाहरण के लिए उसे ड्रॉइंग, कलरिंग, पजल, कहानी की किताब, बोर्ड गेम या कोई खिलौना दिया जा सकता है।
अगर मौसम और परिस्थितियां अनुकूल हों तो बच्चे को पार्क में खेलने, साइकिल चलाने या आउटडोर गेम खेलने के लिए भी प्रोत्साहित करें। इससे उसका ध्यान धीरे-धीरे स्क्रीन से हटकर दूसरी गतिविधियों की तरफ जा सकता है।
स्क्रीन देखते समय भी बच्चे को बीच-बीच में ब्रेक लेने की आदत डालें। लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने के बजाय थोड़ी देर बाद उठकर चलना-फिरना और आंखों को आराम देना अच्छी आदत हो सकती है।
2. स्क्रीन टाइम का रूटीन बनाएं, सजा नहीं इनाम दें
बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए सबसे पहले एक ऐसा रूटीन बनाएं, जिसे वह आसानी से समझ सके। अचानक मोबाइल पूरी तरह बंद कर देने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करना ज्यादा आसान हो सकता है।
उदाहरण के लिए, बच्चे के लिए यह तय किया जा सकता है कि होमवर्क, खाना और जरूरी काम पूरे करने के बाद ही सीमित समय के लिए स्क्रीन मिलेगी। नियम बनाते समय बच्चे की उम्र और उसकी जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
स्क्रीन टाइम कम करने पर बच्चे को सजा देने के बजाय उसकी अच्छी कोशिश की तारीफ करें। उसे पार्क ले जाना, साथ में पसंदीदा गेम खेलना या कोई दूसरी पसंदीदा एक्टिविटी करना सकारात्मक प्रोत्साहन का तरीका हो सकता है।
छोटे बच्चों के मामले में स्क्रीन की मात्रा और कंटेंट को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। छोटे बच्चों के लिए उम्र के अनुरूप और अच्छी क्वालिटी का कंटेंट चुनना बेहतर है। स्क्रीन टाइम को लेकर एक ही नियम सभी बच्चों पर लागू नहीं होता, इसलिए बच्चे की उम्र, जरूरत और रोज की गतिविधियों के हिसाब से संतुलन बनाएं।
3. ऑफलाइन एक्टिविटी को बनाएं मजेदार
अगर बच्चे के पास स्क्रीन के अलावा करने के लिए कोई दिलचस्प काम नहीं होगा, तो वह बार-बार मोबाइल मांग सकता है। इसलिए उसके दिन में ऐसी ऑफलाइन एक्टिविटी शामिल करें, जिनमें उसे वास्तव में मजा आए।
बच्चे के साथ क्रिकेट, बैडमिंटन, फुटबॉल या कोई दूसरा गेम खेल सकते हैं। छोटे बच्चों के साथ पेंटिंग, ब्लॉक्स, पजल, कहानी पढ़ना या क्राफ्ट जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं।
माता-पिता खुद भी इन गतिविधियों में शामिल हों। जब बच्चा देखेगा कि परिवार के लोग उसके साथ समय बिता रहे हैं, तो उसके लिए मोबाइल से दूर रहना ज्यादा आसान हो सकता है।
इसके अलावा खाने के समय और सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखने का नियम बनाया जा सकता है। इस तरह धीरे-धीरे बच्चे की दिनचर्या में स्क्रीन के अलावा दूसरी गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त जगह बनती जाएगी।
4. घर में बनाएं ‘नो-स्क्रीन जोन’
बच्चों की स्क्रीन की आदत कम करने के लिए घर में कुछ जगहों या समय को नो-स्क्रीन जोन बनाया जा सकता है। जैसे डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय मोबाइल या टीवी न चलाने का नियम रखें।
इसी तरह सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने की कोशिश करें। बच्चे के कमरे में टीवी या मोबाइल रखने के बजाय सोने से पहले कहानी पढ़ना, बातचीत करना या कोई शांत गतिविधि करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि नियम सिर्फ बच्चों के लिए न हों। अगर माता-पिता खुद खाना खाते समय लगातार मोबाइल चलाएंगे, तो बच्चे से अलग व्यवहार की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
5. माता-पिता खुद बनें रोल मॉडल
बच्चे अपने माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि बच्चा मोबाइल कम इस्तेमाल करे, तो सबसे पहले घर के बड़े लोगों को भी अपनी स्क्रीन आदतों पर ध्यान देना चाहिए।
बच्चे के सामने बिना जरूरत लगातार फोन चलाने से बचें। उसके साथ बातचीत करते समय मोबाइल एक तरफ रख दें और उसे पूरा ध्यान दें। इससे बच्चे को यह संदेश मिलता है कि परिवार के साथ समय बिताना भी उतना ही जरूरी है।
जरूरत से ज्यादा स्क्रीन इस्तेमाल करने से बच्चे की नींद, शारीरिक गतिविधि और रोजमर्रा की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। अगर बच्चा स्क्रीन के कारण लगातार चिड़चिड़ा रहने लगे, परिवार या दोस्तों से बातचीत कम करने लगे या दूसरी गतिविधियों में उसकी रुचि घटने लगे, तो माता-पिता को उसकी स्क्रीन आदत पर ध्यान देना चाहिए।
डांटने से नहीं, समझाने से बदलें आदत
बच्चे से मोबाइल छीन लेना या हर बार उसे डांटना लंबे समय के लिए सबसे अच्छा समाधान नहीं होता। स्क्रीन टाइम कम करने की प्रक्रिया में धैर्य रखना जरूरी है। बच्चे को समझाएं कि मोबाइल और टीवी पूरी तरह खराब नहीं हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सही समय और सही तरीके से करना जरूरी है।
माता-पिता अगर शुरुआत से ही घर में एक संतुलित रूटीन बनाएं, स्क्रीन के लिए स्पष्ट नियम तय करें और खुद भी उन नियमों का पालन करें, तो बच्चे के लिए डिजिटल आदतों को बेहतर बनाना आसान हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। बच्चों के स्क्रीन टाइम की जरूरत उनकी उम्र, विकास और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है। किसी विशेष समस्या की स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।


