नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि RAC (Reservation Against Cancellation) टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों (GM) को कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया है कि एसी कोच में यात्रा करने वाले प्रत्येक RAC यात्री को अलग-अलग और पूरी बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाए। बोर्ड ने कहा है कि बार-बार निर्देश जारी होने के बावजूद कई ट्रेनों में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे यात्रियों की शिकायतें बढ़ रही हैं और रेलवे की छवि भी प्रभावित हो रही है।
रेलवे बोर्ड ने क्यों लिखी सख्त चिट्ठी?
रेलवे बोर्ड ने 4 अगस्त को सभी जोनल रेलवे के जीएम को भेजे पत्र में कहा कि कई ट्रेनों में अभी भी एक ही साइड लोअर बर्थ पर यात्रा कर रहे दो RAC यात्रियों को सिर्फ एक बेडरोल किट दी जा रही है। यह रेलवे के तय नियमों का उल्लंघन है।
बोर्ड ने निर्देश दिया है कि सभी जोनल रेलवे इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी RAC यात्री को बेडरोल के मामले में दूसरे दर्जे का व्यवहार न झेलना पड़े।
2009 से लागू है यह नियम
रेलवे बोर्ड ने 23 सितंबर 2009 को जारी अपने सर्कुलर में साफ कहा था कि RAC टिकटधारकों को साझा नहीं बल्कि अलग-अलग बेडरोल किट दी जाएगी।
एक मानक बेडरोल किट में शामिल होते हैं:
- एक कंबल
- एक तकिया
- तकिये का कवर
- दो साफ चादरें
- एक हैंड टॉवेल
यानी यदि एक साइड लोअर बर्थ पर दो RAC यात्री यात्रा कर रहे हैं तो दोनों को पूरी बेडरोल किट अलग-अलग मिलनी चाहिए।
कई बार जारी हो चुके हैं निर्देश
रेलवे बोर्ड ने अपने ताजा पत्र में यह भी याद दिलाया कि यह पहला निर्देश नहीं है। इससे पहले भी इस विषय पर कई बार जोनल रेलवे को पत्र भेजे जा चुके हैं।
इन तारीखों पर भी निर्देश जारी हुए थे:
- 16 नवंबर 2016
- 12 दिसंबर 2017
- 18 दिसंबर 2023
इसके बावजूद कई ट्रेनों में पुराने तरीके से सिर्फ एक बेडरोल उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिकायतों से रेलवे की छवि हो रही खराब
रेलवे बोर्ड के अनुसार, नियमों का पालन नहीं होने से यात्रियों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। कई यात्री सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं, जिससे रेलवे की छवि प्रभावित होती है।
कुछ मामलों में यात्री उपभोक्ता आयोग (Consumer Forum) तक भी पहुंच जाते हैं। इसी वजह से बोर्ड ने इस बार सभी जोनल रेलवे को सख्त लहजे में निर्देश जारी किए हैं कि इस तरह की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
RAC क्या होता है?
RAC (Reservation Against Cancellation) भारतीय रेलवे की ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत वेटिंग लिस्ट वाले अधिक यात्रियों को यात्रा का अवसर दिया जाता है।
इस व्यवस्था में:
- एक साइड लोअर बर्थ पर दो यात्रियों को RAC सीट आवंटित की जाती है।
- दोनों यात्रियों को बैठने की सीट सुनिश्चित होती है।
- यदि यात्रा शुरू होने से पहले या यात्रा के दौरान कोई कन्फर्म बर्थ खाली होती है, तो RAC यात्री को पूरी बर्थ आवंटित कर दी जाती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक यात्रियों को कन्फर्म यात्रा का मौका देना है।
यात्रियों को क्या करना चाहिए?
यदि एसी कोच में यात्रा के दौरान RAC टिकट होने पर आपको अलग बेडरोल नहीं दिया जाता है, तो आप:
- ट्रेन के कोच अटेंडेंट से तुरंत शिकायत करें।
- टीटीई (TTE) को इसकी जानकारी दें।
- जरूरत पड़ने पर रेलवे हेल्पलाइन 139 या RailMadad के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि RAC यात्री भी अन्य आरक्षित यात्रियों की तरह समान सुविधाओं के हकदार हैं और उन्हें पूर्ण बेडरोल किट उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है।


