प्री-डायबिटीज को समय रहते कंट्रोल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस स्थिति में ब्लड शुगर सामान्य से अधिक लेकिन डायबिटीज की सीमा से कम रहता है। लाइफस्टाइल में बदलाव, नियमित फिजिकल एक्टिविटी और संतुलित खानपान आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञ आमतौर पर हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मॉडरेट इंटेंसिटी वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखने की सलाह देते हैं।
आज की व्यस्त लाइफस्टाइल में लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि कम होना और खानपान की खराब आदतें मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डाल सकती हैं। इसी वजह से प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है। खास बात यह है कि प्री-डायबिटीज में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में नियमित हेल्थ चेकअप के साथ रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है।
प्री-डायबिटीज का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से डायबिटीज हो जाएगी। समय रहते वजन, खानपान और फिजिकल एक्टिविटी पर काम करके ब्लड शुगर को बेहतर स्तर पर रखने और डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
प्री-डायबिटीज में क्यों जरूरी है फिजिकल एक्टिविटी?
जब शरीर नियमित रूप से एक्टिव रहता है तो मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं। इससे शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बेहतर हो सकती है और ब्लड शुगर को मैनेज करने में मदद मिलती है।
इसके लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति बहुत कठिन या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट करे। तेज चाल से पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी मॉडरेट गतिविधियां भी रोजमर्रा की फिजिकल एक्टिविटी का हिस्सा बन सकती हैं।
हर हफ्ते 150 मिनट एक्सरसाइज का लक्ष्य
प्री-डायबिटीज वाले लोगों के लिए लाइफस्टाइल में नियमित फिजिकल एक्टिविटी शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। आम तौर पर सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मॉडरेट इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज का लक्ष्य रखा जा सकता है।
इसे एक साथ करने के बजाय पूरे सप्ताह में बांटा जा सकता है। उदाहरण के लिए, रोज करीब 30 मिनट तेज चाल से चलना और इसे सप्ताह में पांच दिन करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
हालांकि, एक्सरसाइज की शुरुआत अपनी उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करनी चाहिए। लंबे समय से एक्सरसाइज न करने वाले व्यक्ति अचानक बहुत ज्यादा मेहनत करने के बजाय धीरे-धीरे एक्टिविटी बढ़ा सकते हैं।
रिसर्च में क्या सामने आया?
हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट में प्री-डायबिटीज और फिजिकल एक्टिविटी के संबंध का उल्लेख किया गया है। इसमें ऐसे लोगों के लिए नियमित एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल में बदलाव के महत्व पर जोर दिया गया है।
आपके दिए गए रिसर्च डेटा के अनुसार, कार्डियोवैस्कुलर रिस्क रिडक्शन प्रोग्राम में शामिल 130 प्री-डायबिटिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। कार्यक्रम में इंटरनल मेडिसिन, न्यूट्रिशन, साइकोलॉजी और फिजियोथेरेपी जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों की निगरानी और सलाह शामिल थी।
एक साल के फॉलो-अप में करीब 58 प्रतिशत प्रतिभागियों ने हर सप्ताह 150 मिनट की एक्सरसाइज का लक्ष्य पूरा किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह में कम एक्सरसाइज करने वालों की तुलना में ब्लड शुगर सामान्य स्तर पर लौटने की संभावना अधिक देखी गई।
यहां यह समझना जरूरी है कि यह नतीजा फिजिकल एक्टिविटी और ब्लड शुगर के बीच संबंध को दिखाता है। इसे हर व्यक्ति के लिए डायबिटीज रोकने की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
वजन कम करना भी हो सकता है फायदेमंद
प्री-डायबिटीज में केवल एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। जिन लोगों का वजन अधिक है, उनके लिए शुरुआती वजन का कुछ हिस्सा कम करना मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
कुछ लाइफस्टाइल प्रोग्राम में अधिक वजन वाले लोगों के लिए शुरुआती शरीर के वजन का करीब 7 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि, वजन घटाने का सही लक्ष्य व्यक्ति की उम्र, मौजूदा वजन, स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
खाने में इन बदलावों पर दें ध्यान
फिजिकल एक्टिविटी के साथ डाइट पर ध्यान देना भी जरूरी है। प्री-डायबिटीज में बहुत ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का सेवन कम करना उपयोगी हो सकता है।
डेली डाइट में इन चीजों को प्राथमिकता दी जा सकती है:
- साबुत अनाज और फाइबर वाली चीजें
- दालें और अन्य पौष्टिक प्रोटीन स्रोत
- हरी सब्जियां और अन्य सब्जियां
- संतुलित मात्रा में फल
- कम प्रोसेस्ड और कम मीठे खाद्य पदार्थ
- पर्याप्त पानी
सिर्फ किसी एक खाद्य पदार्थ को डाइट से हटाने के बजाय पूरी डाइट का संतुलन बेहतर करना अधिक महत्वपूर्ण है।
क्या प्री-डायबिटीज में दवा की जरूरत नहीं होती?
प्री-डायबिटीज में लाइफस्टाइल बदलाव बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को दवा की जरूरत नहीं होगी। कुछ लोगों में डॉक्टर उनकी उम्र, वजन, ब्लड शुगर, अन्य स्वास्थ्य जोखिमों और डायबिटीज के खतरे को देखते हुए दवा पर विचार कर सकते हैं।
इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। इसी तरह केवल एक्सरसाइज के भरोसे नियमित ब्लड शुगर जांच और मेडिकल सलाह को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।
रोज की छोटी आदतें बना सकती हैं बड़ा अंतर
प्री-डायबिटीज की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बदलाव को रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाया जाए। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना, रोज पैदल चलना, खानपान में सुधार करना और वजन को स्वस्थ स्तर पर रखने की कोशिश करना फायदेमंद हो सकता है।
हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। इसलिए अगर किसी को पहले से ब्लड शुगर की समस्या है या प्री-डायबिटीज की रिपोर्ट आई है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर अपनी एक्सरसाइज और डाइट प्लान तय करना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष: प्री-डायबिटीज को नजरअंदाज करना सही नहीं है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मॉडरेट फिजिकल एक्टिविटी, संतुलित खानपान और स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश से ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद मिल सकती है और आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह किसी बीमारी के निदान या व्यक्तिगत इलाज का विकल्प नहीं है। ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।
Source: Harvard Health की रिपोर्ट और दिए गए रिसर्च विवरण पर आधारित।


