भारत में पेट्रोल की कीमतें एक बार फिर चर्चा में हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतों में हल्का बदलाव देखने को मिला है। 14 मई 2026 को मुंबई में पेट्रोल की कीमत ₹103.54 प्रति लीटर पर बनी हुई है, जबकि कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी और कुछ में गिरावट दर्ज की गई है।
वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर पड़ता है।
भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के ताजा दाम
| शहर | पेट्रोल कीमत (₹/लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹94.77 | 0.00 |
| कोलकाता | ₹105.45 | +0.04 |
| मुंबई | ₹103.54 | 0.00 |
| चेन्नई | ₹100.80 | -0.04 |
| गुरुग्राम | ₹95.30 | -0.35 |
| नोएडा | ₹94.74 | -0.14 |
| बेंगलुरु | ₹102.96 | +0.04 |
| भुवनेश्वर | ₹100.97 | -0.38 |
| चंडीगढ़ | ₹94.30 | 0.00 |
| हैदराबाद | ₹107.50 | 0.00 |
| जयपुर | ₹105.03 | 0.00 |
| लखनऊ | ₹94.73 | 0.00 |
| पटना | ₹105.54 | +0.31 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹107.38 | +0.05 |
Source: Good Returns
क्यों अलग-अलग हैं पेट्रोल के दाम?
भारत में हर राज्य में पेट्रोल की कीमत अलग होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT) और स्थानीय टैक्स हैं। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जबकि राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट तय करती हैं। इसी कारण दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता दिखाई देता है, जबकि हैदराबाद, पटना और कोलकाता में कीमतें ज्यादा हैं।
इसके अलावा परिवहन लागत, डीलर कमीशन और स्थानीय टैक्स भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों का कितना असर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों से काफी अस्थिर बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अगर यह तनाव लंबा चलता है और ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
रुपये की कमजोरी भी बढ़ाती है बोझ
भारत कच्चे तेल का आयात डॉलर में करता है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो तेल आयात महंगा हो जाता है। हाल के दिनों में रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंचा है, जिससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और वैश्विक तेल बाजार में तनाव जारी रहता है, तो सरकार के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लंबे समय तक स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या आगे बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम?
फिलहाल तेल कंपनियां रोजाना कीमतों की समीक्षा कर रही हैं। हालांकि सरकार महंगाई को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी:
- ब्रेंट क्रूड की दिशा
- पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव
- डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
अगर इन तीनों मोर्चों पर दबाव बढ़ता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
आम लोगों पर क्या असर?
पेट्रोल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने से सब्जियों, फल, FMCG उत्पादों और लॉजिस्टिक्स की कीमतों पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि पेट्रोल की कीमतें महंगाई से सीधे जुड़ी मानी जाती हैं।
सरकार फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन वैश्विक हालात लंबे समय तक खराब रहने पर दबाव बढ़ सकता है।
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