भारत में डीजल की कीमतें 14 मई 2026 को ज्यादातर शहरों में स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन कुछ राज्यों में हल्का बदलाव देखने को मिला है। देश की आर्थिक गतिविधियों, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और महंगाई पर सीधा असर डालने वाले डीजल के दाम फिलहाल वैश्विक तेल बाजार और घरेलू टैक्स स्ट्रक्चर के बीच संतुलन पर टिके हुए हैं।
देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में आज डीजल की कीमत ₹90.03 प्रति लीटर दर्ज की गई है। वहीं दिल्ली में डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर है। दूसरी ओर पटना और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद पिछले एक साल से डीजल की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो आने वाले महीनों में दबाव बढ़ सकता है।
देश के प्रमुख शहरों में डीजल के ताजा दाम
| शहर | डीजल कीमत (₹/लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹87.67 | 0.00 |
| कोलकाता | ₹92.02 | 0.00 |
| मुंबई | ₹90.03 | 0.00 |
| चेन्नई | ₹92.39 | 0.00 |
| गुरुग्राम | ₹87.77 | -0.33 |
| नोएडा | ₹87.81 | -0.17 |
| बेंगलुरु | ₹90.99 | 0.00 |
| भुवनेश्वर | ₹92.55 | -0.37 |
| चंडीगढ़ | ₹82.45 | 0.00 |
| हैदराबाद | ₹95.70 | 0.00 |
| जयपुर | ₹90.49 | 0.00 |
| लखनऊ | ₹87.86 | +0.01 |
| पटना | ₹91.78 | +0.29 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹96.26 | +0.05 |
Source: Good Returns
भारत में डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?
भारत में 15 जून 2017 से डीजल की कीमतों में रोजाना बदलाव की व्यवस्था लागू है। इससे पहले तेल कंपनियां हर 15 दिन में कीमतों की समीक्षा करती थीं। दैनिक मूल्य संशोधन प्रणाली लागू होने के बाद कीमतों में बड़े झटकों की संभावना कम हुई है।
डीजल की कीमत तय करने में कई कारक भूमिका निभाते हैं:
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत
- डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकारों का वैट
- ट्रांसपोर्ट और डीलर लागत
इसी वजह से हर राज्य और शहर में डीजल की कीमत अलग-अलग दिखाई देती है।
क्यों महत्वपूर्ण है डीजल?
भारत की अर्थव्यवस्था में डीजल की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। ट्रक, बस, कृषि मशीनरी, माल परिवहन और इंडस्ट्रियल सेक्टर का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है। इसलिए डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे महंगाई पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है
- खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव आता है
- लॉजिस्टिक्स सेक्टर प्रभावित होता है
- कृषि लागत बढ़ सकती है
यही कारण है कि सरकार डीजल कीमतों को लेकर अपेक्षाकृत अधिक सतर्क रहती है।
कच्चे तेल की कीमतों से कितना दबाव?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड अभी भी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता ने सप्लाई संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की वैश्विक कीमतों में हर उछाल का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। हालांकि फिलहाल सरकारी स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन यदि ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रहता है, रुपया और कमजोर होता है, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो आने वाले समय में डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
रुपया कमजोर होने का असर
भारत तेल आयात के लिए डॉलर में भुगतान करता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो आयात लागत बढ़ जाती है। हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी देखने को मिली है, जिससे तेल कंपनियों का खर्च बढ़ा है।
यदि वैश्विक बाजार में डॉलर मजबूत बना रहता है, तो तेल कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
क्या आगे बढ़ सकते हैं डीजल के दाम?
विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन वैश्विक हालात और तेल बाजार में अस्थिरता जारी रहने पर भविष्य में संशोधन संभव है।
आने वाले हफ्तों में बाजार की नजर इन तीन चीजों पर रहेगी ब्रेंट क्रूड का ट्रेंड, पश्चिम एशिया की स्थिति, रुपये की चाल यदि इन मोर्चों पर दबाव बढ़ता है, तो डीजल की कीमतों में भी तेजी देखी जा सकती है।
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