Petrol Diesel Price Hike: आम आदमी की जेब पर बढ़ रहा दबाव
नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो हफ्तों के भीतर चार बार ईंधन की कीमतें बढ़ चुकी हैं और अब भी राहत के संकेत नहीं दिख रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है जबकि मुंबई में इसकी कीमत 110 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो गई है।
हालांकि हालिया समीक्षा में तेल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और तेल विपणन कंपनियां अभी भी पिछले महीनों में हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं।
पिछले दो हफ्तों में कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल?
हालिया बढ़ोतरी के बाद देश के कई प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.18 | 97.83 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| चेन्नई | 107.85 | 99.66 |
| बेंगलुरु | 110.89 | 98.80 |
| हैदराबाद | 115.69 | 103.82 |
तेल कंपनियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार हाल की बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत में कुल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष तथा अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका सीधा असर ब्रेंट क्रूड और अन्य बेंचमार्क तेल कीमतों पर दिखाई दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। कई मौकों पर कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर भी पहुंच चुकी हैं।
भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट क्यों है सबसे बड़ी चिंता?
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा आती है तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो ब्रेंट क्रूड 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी पहुंच सकता है।
तेल कंपनियों को क्यों हो रहा था नुकसान?
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में कई महीनों तक पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम नहीं बढ़ाए गए थे। इस दौरान इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। 15 मई को हुई कीमत वृद्धि के बाद इस नुकसान का केवल एक चौथाई हिस्सा ही कम हो पाया। इसलिए तेल कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतों को वास्तविक लागत के करीब लाने की कोशिश कर रही हैं।
क्या आगे भी बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
यही वह सवाल है जो इस समय करोड़ों भारतीयों के मन में है। उद्योग सूत्रों के अनुसार फिलहाल किसी बड़े झटके की संभावना नहीं है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो धीरे-धीरे कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल कंपनियां एक बार में बड़ी बढ़ोतरी करने के बजाय छोटे-छोटे चरणों में कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपना सकती हैं ताकि महंगाई पर अचानक दबाव न बढ़े।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से किन चीजों पर पड़ेगा असर?
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। जब डीजल महंगा होता है तो ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ती है। इससे सब्जियों, फलों, दूध, अनाज और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें प्रभावित होती हैं। इसके अलावा कैब और ऑटो किराया बढ़ सकता है। बस और ट्रक ऑपरेटर किराया बढ़ा सकते हैं। ऑनलाइन डिलीवरी महंगी हो सकती है। एयरलाइन टिकटों पर भी दबाव बढ़ सकता है। महंगाई दर में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
सीएनजी उपभोक्ताओं को भी नहीं मिली राहत
पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ सीएनजी उपभोक्ताओं को भी झटका लगा है। दिल्ली और मुंबई में 15 मई को सीएनजी की कीमत 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाई गई थी। इसके बाद एक और चरण में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई। इससे निजी वाहन चालकों और व्यावसायिक परिवहन क्षेत्र की लागत और बढ़ गई है।
आगे क्या देखना होगा?
अगले कुछ सप्ताह ईंधन बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। यदि पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो भारत में कीमतों को स्थिर रखा जा सकता है। लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आम आदमी की जेब पर दबाव और बढ़ सकता है तथा महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।
Also Read:


