नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार कर रहे करोड़ों लोगों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अगले 2 से 3 महीने तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार और तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती पर विचार कर सकती हैं।
HighLights
- 2-3 महीने तक सस्ता रहा कच्चा तेल तो घट सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम।
- हरदीप सिंह पुरी ने कीमतों की समीक्षा के दिए संकेत।
- OMCs को युद्धकाल में ₹74,781 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।
- नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर सस्ता किया।
- फिलहाल रिफाइनरियां पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल की प्रोसेसिंग कर रही हैं।
हालांकि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल कीमतों में कमी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में देश की रिफाइनरियां उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे दो महीने पहले ऊंचे दाम पर खरीदा गया था। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का असर तुरंत खुदरा ईंधन कीमतों पर दिखाई देना संभव नहीं है।
2-3 महीने तक सस्ता रहा कच्चा तेल तो मिल सकती है राहत
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि तेल कंपनियां आमतौर पर दो महीने पहले कच्चे तेल की खरीद करती हैं। ऐसे में आज जो पेट्रोल और डीजल तैयार हो रहा है, वह अप्रैल और मई के दौरान खरीदे गए महंगे क्रूड ऑयल पर आधारित है।
उन्होंने कहा,
“आज हम उसी कच्चे तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे दो महीने पहले खरीदा गया था। अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतों में यह गिरावट अगले 2-3 महीने तक बनी रहती है, तो हम स्थिति की समीक्षा करेंगे। हालांकि अभी यह केवल संभावित स्थिति है।”
इस बयान से यह उम्मीद जरूर बढ़ी है कि यदि वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो आने वाले महीनों में आम लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है।
पश्चिम एशिया संकट में तेल कंपनियों को हुआ भारी नुकसान
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। इसके बावजूद भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में उतनी बढ़ोतरी नहीं की जितनी वैश्विक बाजार में हुई थी।
उन्होंने बताया कि 30 जून तक सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कुल ₹74,781 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि उन्होंने ईंधन को लागत से कम कीमत पर बेचा।
मंत्री के अनुसार सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न डालना था, इसलिए कंपनियों ने नुकसान सहकर भी आपूर्ति जारी रखी।
भारत में सीमित बढ़े ईंधन के दाम
हरदीप पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान कई विकसित देशों में पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई, जबकि भारत के कई पड़ोसी देशों में यह वृद्धि लगभग 35 प्रतिशत रही।
इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उन्होंने कहा कि यह सरकार और तेल कंपनियों की बेहतर योजना तथा आपूर्ति प्रबंधन का परिणाम था।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 28 फरवरी से जून के अंत तक देश के लगभग 1.07 लाख पेट्रोल पंपों पर न तो ईंधन की कमी हुई और न ही किसी पंप को बंद करना पड़ा।
नायरा एनर्जी ने घटाए पेट्रोल और डीजल के दाम
इसी बीच निजी क्षेत्र की ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई से अपने सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की कीमत ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹3 प्रति लीटर कम कर दी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद किसी बड़ी निजी कंपनी की ओर से यह पहली बड़ी कटौती मानी जा रही है।
हालांकि हरदीप पुरी ने स्पष्ट किया कि नायरा एनर्जी पहले कई इलाकों में सरकारी कंपनियों की तुलना में अधिक कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेच रही थी। पश्चिम एशिया संकट के दौरान कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी और अब उसने वही अतिरिक्त बढ़ोतरी वापस ली है।
उन्होंने कहा कि सरकारी तेल कंपनियों ने उस दौरान कीमतें नहीं बढ़ाई थीं।
120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था कच्चा तेल
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। इससे पूरी दुनिया में ईंधन महंगा होने की आशंका बढ़ गई थी।
बाद में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष कम होने तथा युद्धविराम की दिशा में सहमति बनने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में:
- WTI Crude करीब 67 डॉलर प्रति बैरल
- Brent Crude लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
तुरंत क्यों नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम?
कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो जाता है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत क्यों नहीं घटतीं।
इसके पीछे मुख्य कारण तेल कंपनियों की खरीद प्रक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- तेल कंपनियां आमतौर पर 6 से 8 सप्ताह पहले कच्चे तेल की खरीद करती हैं।
- खरीदे गए तेल को भारत तक पहुंचने, रिफाइन करने और वितरण में भी समय लगता है।
- इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर खुदरा ईंधन कीमतों पर कुछ सप्ताह बाद दिखाई देता है।
यही वजह है कि अभी भारत में जो पेट्रोल और डीजल बिक रहा है, वह पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल से तैयार किया गया है।
क्या आने वाले महीनों में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
फिलहाल सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्री के बयान से इतना स्पष्ट है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले 2 से 3 महीने तक कम बनी रहती हैं, तो सरकार और तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं।
ऐसे में अगर ब्रेंट और WTI क्रूड मौजूदा स्तर के आसपास स्थिर रहते हैं, तो आने वाले महीनों में देशभर के उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है.


