Paytm Share Price: UPI पेमेंट को लेकर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नए Merchant Discount Rate (MDR) फ्रेमवर्क के ऐलान के बाद Paytm और One Mobikwik के शेयरों में बुधवार, 16 सितंबर को शुरुआती कारोबार में तेज उछाल देखने को मिला। बाजार की नजर इस बात पर है कि नए MDR सिस्टम से डिजिटल पेमेंट कंपनियों के मर्चेंट कारोबार की कमाई पर कितना असर पड़ता है।
बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे One 97 Communications के शेयर करीब 4.62% बढ़कर ₹1,810 के आसपास कारोबार कर रहे थे। वहीं One Mobikwik Systems के शेयर भी करीब 4.71% चढ़कर ₹210.32 पर पहुंच गए। इस तेजी को NPCI के उस नए फ्रेमवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत कुछ चुनिंदा बड़े UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया जाएगा।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया UPI MDR फ्रेमवर्क
NPCI के नए नियमों के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 0.4% यानी 40 बेसिस पॉइंट MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आम UPI यूजर्स को हर पेमेंट पर चार्ज देना होगा। Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए तय जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर भी MDR नहीं लगेगा। सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन इस बदलाव से अप्रभावित रहेंगे।
कुछ विशेष कैटेगरी के लिए अलग शुल्क व्यवस्था भी रखी गई है। रिपोर्टों के अनुसार रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी कुछ सेवाओं में पात्र ट्रांजैक्शन पर फ्लैट ₹5 MDR का प्रावधान है।
Paytm को कैसे मिल सकता है फायदा?
नए MDR फ्रेमवर्क के बाद Paytm के मर्चेंट कारोबार को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा है कि नया फ्रेमवर्क उन कई मर्चेंट पेमेंट ट्रांजैक्शन से अतिरिक्त रेवेन्यू का अवसर पैदा करता है, जो पहले बिना MDR के प्रोसेस होते थे।
महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR से मिलने वाला पूरा पैसा किसी एक कंपनी के पास नहीं जाएगा। NPCI के नए वितरण ढांचे में पेमेंट इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच MDR रेवेन्यू बांटा जाएगा। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इसमें इश्यूअर बैंक, मर्चेंट एक्वायरर और UPI ऐप्स समेत विभिन्न हिस्सेदार शामिल हैं।
यही वजह है कि Paytm जैसे बड़े मर्चेंट पेमेंट प्लेटफॉर्म के लिए नए MDR सिस्टम को संभावित अतिरिक्त रेवेन्यू स्रोत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्र ट्रांजैक्शन का कितना हिस्सा Paytm के प्लेटफॉर्म से गुजरता है और MDR की रकम वैल्यू चेन में किस तरह वितरित होती है।
JM Financial ने Paytm का टारगेट प्राइस बढ़ाया
ब्रोकरेज फर्म JM Financial ने Paytm पर अपनी Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस को ₹1,950 से बढ़ाकर ₹2,150 कर दिया है।
ब्रोकरेज के मुताबिक 40 बेसिस पॉइंट का MDR उसके पहले के 25 बेसिस पॉइंट के अनुमान से ज्यादा है। हालांकि, अधिक छूट और पात्र ट्रांजैक्शन को ध्यान में रखते हुए उसने अपने eligible GMV अनुमान में बदलाव किया है।
JM Financial के अनुमान के अनुसार नए MDR फ्रेमवर्क से Paytm को FY27 में करीब ₹210 करोड़ और FY28 में करीब ₹470 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू मिल सकता है। इसी अवधि में अतिरिक्त adjusted EBITDA का अनुमान क्रमशः करीब ₹140 करोड़ और ₹440 करोड़ लगाया गया है।
ब्रोकरेज ने यह भी संकेत दिया है कि MDR पूल का अंतिम वितरण ढांचा महत्वपूर्ण रहेगा। NPCI द्वारा वैल्यू चेन में हिस्सेदारी के वितरण को लेकर स्पष्टता इसलिए अहम है क्योंकि इससे Paytm की वास्तविक कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
Citi ने भी UPI MDR को अहम बदलाव बताया
Citi के मुताबिक नया MDR फ्रेमवर्क बड़े मर्चेंट पेमेंट के लिए लंबे समय से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था में बदलाव का संकेत देता है।
Citi के अनुसार ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% तक MDR लागू होगा और ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए अधिकतम शुल्क ₹300 रहेगा। वहीं करीब 96% P2M वॉल्यूम पर कोई MDR प्रभाव नहीं पड़ेगा।
ब्रोकरेज के आकलन के मुताबिक नया ढांचा UPI पेमेंट इकोसिस्टम के विभिन्न हिस्सेदारों के लिए नया रेवेन्यू पूल बना सकता है। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों पर इसका प्रभाव उनके मर्चेंट बेस, ट्रांजैक्शन मिक्स और रेवेन्यू शेयरिंग पर निर्भर करेगा।
JPMorgan ने बताया ट्रांजैक्शन-लिंक्ड रेवेन्यू मॉडल में बदलाव
JPMorgan ने नए MDR फ्रेमवर्क को बैंकों, PSPs और UPI ऐप्स के लिए जीरो-MDR मॉडल से ट्रांजैक्शन-लिंक्ड रेवेन्यू मॉडल की ओर बदलाव के रूप में देखा है।
नए ढांचे के तहत बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा, जबकि छोटे कारोबारियों को निर्धारित सीमा तक राहत दी गई है। इससे पेमेंट इकोसिस्टम में मौजूद कंपनियों के लिए UPI से सीधे जुड़े रेवेन्यू मॉडल का दायरा बढ़ सकता है।
साथ ही, ग्राहकों पर सीधे UPI चार्ज डालने का प्रावधान नहीं है। वित्त मंत्रालय ने भी बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि नए MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए।
Paytm और One Mobikwik के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
Paytm और One Mobikwik दोनों का कारोबार डिजिटल पेमेंट और मर्चेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है। इसलिए UPI के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़े नए रेवेन्यू मॉडल का इन कंपनियों के बिजनेस पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, शेयरों में शुरुआती तेजी को सीधे तौर पर भविष्य की कमाई में निश्चित बढ़ोतरी नहीं माना जा सकता। MDR से वास्तविक वित्तीय लाभ कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिसमें पात्र ट्रांजैक्शन की मात्रा, मर्चेंट कैटेगरी, कंपनी की बाजार हिस्सेदारी और MDR रेवेन्यू का वितरण शामिल है।
सरकार के मुताबिक नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को बनाए रखना है, जबकि छोटे व्यापारियों और आम यूजर्स पर अतिरिक्त शुल्क का असर सीमित रखना है।
Source: Moneycontrol, PIB और अन्य रिपोर्टों पर आधारित।
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