महाराष्ट्र में प्याज किसानों की हालत खराब, लागत निकालना भी हुआ मुश्किल
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल महाराष्ट्र के किसान इन दिनों भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। मंडियों में प्याज के दाम लगातार गिरने के कारण किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। कई क्षेत्रों में किसानों को प्याज के लिए ₹1 प्रति किलो से भी कम कीमत मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ ने केंद्र सरकार से किसानों के लिए ₹10,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
किसान संगठनों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव उत्पादन लागत से भी नीचे पहुंच चुके हैं। बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और परिवहन पर होने वाला खर्च निकालना भी किसानों के लिए मुश्किल हो गया है। लगातार नुकसान के कारण बड़ी संख्या में किसान आर्थिक दबाव में हैं और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
क्या है किसानों की सबसे बड़ी परेशानी?
महाराष्ट्र के नासिक, अहमदनगर, पुणे, सोलापुर और अन्य प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में इस समय बाजार में आपूर्ति अधिक है जबकि मांग अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। इसके कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
किसानों का आरोप है कि जब भी घरेलू बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ने लगती हैं, सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध या शुल्क बढ़ाने जैसे कदम उठाती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है और किसानों को बेहतर दाम नहीं मिल पाते।
किसानों का कहना है कि बार-बार बदलती निर्यात नीतियों के कारण व्यापारियों और निर्यातकों में भी अनिश्चितता बनी रहती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है।
₹10,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ के संस्थापक-अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता की जरूरत है। उन्होंने केंद्र सरकार से ₹10,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग करते हुए कहा कि यह सहायता किसानों को भारी नुकसान से उबारने में मदद कर सकती है।
संघ का कहना है कि यदि सरकार सीधे राहत राशि उपलब्ध कराए तो किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए भी आर्थिक संबल मिलेगा। कई किसान कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं और लगातार नुकसान के कारण उनकी वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है।
NAFED और NCCF की खरीद को लेकर सवाल
हाल ही में सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि NAFED और NCCF जैसी सहकारी संस्थाएं व्यापारियों के बजाय सीधे किसानों से प्याज खरीदेंगी। इस घोषणा को किसानों के लिए राहत के रूप में देखा गया था।
हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में किसानों को राहत देना चाहती है तो खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि घोषणा के बावजूद जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर खरीद शुरू नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी एजेंसियां सीधे किसानों से खरीद बढ़ाती हैं तो बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी स्थिति बन सकती है और किसानों को बेहतर दाम मिलने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली में हुई बैठक पर उठे सवाल
भरत दिघोले ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई बैठक पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस बैठक को किसानों की समस्याओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता में यह राजनीतिक मुद्दों और आगामी चुनावी रणनीति से जुड़ी बैठक थी।
उन्होंने कहा कि यदि किसानों की समस्याएं वास्तव में प्राथमिकता होतीं तो प्याज खरीद और राहत पैकेज जैसे मुद्दों पर तत्काल निर्णय दिखाई देते।
क्यों जरूरी है स्थायी राष्ट्रीय प्याज निर्यात नीति?
प्याज उत्पादक संघ की प्रमुख मांगों में से एक स्थायी राष्ट्रीय प्याज निर्यात नीति भी है। किसानों का कहना है कि हर कुछ महीनों में निर्यात नियम बदलने से बाजार में अस्थिरता पैदा होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया के प्रमुख प्याज उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। ऐसे में निर्यात नीति का बार-बार बदलना किसानों, व्यापारियों और विदेशी खरीदारों सभी के लिए परेशानी का कारण बनता है।
यदि सरकार दीर्घकालिक और स्थिर निर्यात नीति लागू करती है तो किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ भारत की वैश्विक बाजार में विश्वसनीयता भी मजबूत हो सकती है।
राष्ट्रीय प्याज स्थिरीकरण कोष बनाने की मांग
किसान संघ ने एक राष्ट्रीय प्याज स्थिरीकरण कोष (National Onion Stabilization Fund) बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। इस कोष का उद्देश्य बाजार में कीमतें गिरने पर किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना होगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का कोष किसानों को मूल्य संकट से बचाने में प्रभावी साबित हो सकता है। जब बाजार मूल्य उत्पादन लागत से नीचे चला जाए, तब इस कोष से किसानों को प्रत्यक्ष सहायता दी जा सकती है।
प्रसंस्करण उद्योगों से बदल सकती है तस्वीर
प्याज किसानों की एक और महत्वपूर्ण मांग प्रमुख उत्पादक जिलों में प्याज आधारित प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना है। वर्तमान में बड़ी मात्रा में प्याज सीधे बाजार में पहुंचता है, जिससे आपूर्ति बढ़ने पर कीमतें तेजी से गिर जाती हैं। यदि प्रसंस्करण उद्योग विकसित होते हैं तो अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग विभिन्न उत्पादों में किया जा सकता है।
इन उत्पादों में शामिल हैं:
- प्याज पाउडर
- डिहाइड्रेटेड प्याज
- प्याज फ्लेक्स
- प्याज पेस्ट
- रेडी-टू-यूज खाद्य उत्पाद
इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा और फसल खराब होने का जोखिम भी कम होगा।
किसानों को आर्थिक सहायता की भी मांग
संघ का कहना है कि केवल उद्योग स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा। किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को ऐसी इकाइयां स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता, सब्सिडी और सस्ती ऋण सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी।
यदि ग्रामीण स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होती हैं तो इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव हो सकेगी।
क्या सरकार उठाएगी बड़ा कदम?
महाराष्ट्र में प्याज किसानों की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले कई वर्षों में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जब कीमतें बढ़ती हैं तो उपभोक्ता प्रभावित होते हैं और जब कीमतें गिरती हैं तो किसान संकट में आ जाते हैं। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान नहीं होगा। स्थायी निर्यात नीति, मूल्य स्थिरीकरण कोष, सरकारी खरीद व्यवस्था और प्रसंस्करण उद्योगों का विस्तार ही लंबे समय में किसानों को राहत दे सकता है।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार पर है कि वह किसानों की ₹10,000 करोड़ राहत पैकेज की मांग और अन्य प्रस्तावों पर क्या फैसला लेती है।
FAQ
Q1. प्याज किसानों ने कितने राहत पैकेज की मांग की है?
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ ने केंद्र सरकार से ₹10,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
Q2. किसानों को प्याज का कितना भाव मिल रहा है?
कई मंडियों में किसानों को ₹1 प्रति किलो से भी कम कीमत मिलने की शिकायत है।
Q3. किसानों की मुख्य मांग क्या है?
राहत पैकेज, स्थायी प्याज निर्यात नीति, राष्ट्रीय प्याज स्थिरीकरण कोष और प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना।
Q4. NAFED और NCCF की क्या भूमिका है?
सरकार ने इन संस्थाओं द्वारा सीधे किसानों से प्याज खरीदने का आश्वासन दिया है।
Q5. प्रसंस्करण उद्योगों से किसानों को क्या फायदा होगा?
प्याज पाउडर, फ्लेक्स और डिहाइड्रेटेड उत्पादों के जरिए अतिरिक्त बाजार मिलेगा और किसानों की आय बढ़ सकती है।
स्रोत: किसान संगठन के प्रतिनिधियों के बयान, कृषि क्षेत्र से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी, सरकारी खरीद और निर्यात नीति संबंधी उपलब्ध विवरण।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सरकारी नीतियों और बाजार स्थितियों में समय-समय पर बदलाव संभव है।


