नई दिल्ली: भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने ओडिशा के तट से लगे महानदी बेसिन में अपने पहले गहरे समुद्री (Deepwater) खोजी कुएं की ड्रिलिंग शुरू कर दी है। इस अभियान का शुभारंभ केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसे ‘समुद्र मंथन’ मिशन का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में छिपे विशाल तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों की खोज करना है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस अभियान में महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन भंडार मिलता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
Highlights
- ONGC ने महानदी बेसिन में पहला गहरे पानी का खोजी कुआं खोदना शुरू किया।
- केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘समुद्र मंथन’ मिशन का उद्घाटन किया।
- ओडिशा के कोणार्क तट से करीब 23 नॉटिकल मील दूर हो रही है ड्रिलिंग।
- भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों में 5,600 MMTOE से अधिक हाइड्रोकार्बन होने का अनुमान।
- मिशन का उद्देश्य देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
महानदी बेसिन में क्यों खास है यह ड्रिलिंग?
A mission of depth. A future of possibilities.
Under #SamudraManthan, #ONGC’s DeepX initiative marks a bold step towards unlocking India’s vast deep-water energy potential.
Bringing together advanced geoscience, seismic intelligence, reservoir expertise, digital technologies… pic.twitter.com/OPJKWc5Wym
— Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) (@ONGC_) July 21, 2026 ONGC द्वारा शुरू किया गया यह खोजी कुआं MN-DW18-1-H-D ओडिशा के कोणार्क तट से लगभग 23 नॉटिकल मील दूर स्थित है। यह भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज के लिए शुरू किए गए व्यापक कार्यक्रम की पहली बड़ी परियोजना है।
अब तक भारत के अधिकांश तेल और गैस उत्पादन उथले समुद्री क्षेत्रों या जमीन पर स्थित क्षेत्रों से होते रहे हैं। लेकिन गहरे समुद्र में मौजूद संसाधनों का दोहन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होने के कारण सीमित रहा है। ONGC का यह मिशन इसी दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।
‘समुद्र मंथन’ मिशन क्या है?
‘समुद्र मंथन’ मिशन भारत सरकार की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य समुद्र के भीतर मौजूद तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार की खोज करना है।
इस मिशन की अवधारणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रस्तुत की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद ऊर्जा संसाधनों का पूरी क्षमता से उपयोग किया जाना चाहिए ताकि देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
इसके बाद सरकार ने समुद्र में पहले से प्रतिबंधित लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ऊर्जा अन्वेषण के लिए खोल दिया, जिससे नई खोजों का रास्ता साफ हुआ।
भारत के पास कितना बड़ा तेल और गैस भंडार हो सकता है?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय (Offshore) बेसिनों में 3,000 मीटर तक की गहराई पर लगभग 5,600 MMTOE (Million Metric Tonnes of Oil Equivalent) से अधिक हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद होने का अनुमान है।
हाल के वर्षों में कावेरी बेसिन, महानदी बेसिन और अंडमान बेसिन में मिले सकारात्मक संकेतों ने इस संभावना को और मजबूत किया है कि भारत के समुद्री क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तेल और गैस के भंडार मौजूद हो सकते हैं।
यदि इन संसाधनों का सफलतापूर्वक दोहन किया जाता है तो भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा किया जा सकेगा।
DeepX मिशन सेंटर निभाएगा अहम भूमिका
गहरे समुद्री अन्वेषण को गति देने के लिए ONGC ने 5 जनवरी 2026 को मुंबई में DeepX (Deepwater Exploration Mission Centre) की शुरुआत की थी।
यह अत्याधुनिक केंद्र “One Company, One Data” सिद्धांत पर कार्य करता है, जहां भूवैज्ञानिक डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण, आधुनिक तकनीक और वैश्विक विशेषज्ञों के अनुभव को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में खोज अभियानों की सफलता की संभावना बढ़ाना है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सहारा
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ता है।
ऐसे में यदि महानदी बेसिन और अन्य गहरे समुद्री क्षेत्रों में बड़े तेल एवं गैस भंडार की खोज होती है, तो इससे:
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ेगा।
- रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
क्या भारत को मिलेगा तेल का ‘महा-भंडार’?
फिलहाल ONGC ने केवल खोजी ड्रिलिंग शुरू की है और यह कहना जल्दबाजी होगी कि यहां व्यावसायिक स्तर का विशाल तेल भंडार मिलेगा या नहीं। हालांकि शुरुआती भूवैज्ञानिक आंकड़े और वैज्ञानिक अध्ययन इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं।
यदि खोज सफल रहती है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक साबित हो सकती है और देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में नई मजबूती मिल सकती है।
निष्कर्ष
महानदी बेसिन में ONGC द्वारा शुरू की गई गहरे समुद्र की ड्रिलिंग केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ‘समुद्र मंथन’ मिशन, DeepX सेंटर और सरकार की नई नीतियां मिलकर देश को भविष्य में तेल एवं गैस उत्पादन के नए दौर में ले जा सकती हैं। आने वाले वर्षों में इस मिशन के परिणाम भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और आयात निर्भरता को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।


