नई दिल्ली। भारत के ईंधन बाजार में रूस समर्थित नायरा एनर्जी (Nyara Energy) ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। कंपनी ने देशभर में अपने पेट्रोल पंपों की संख्या 7,000 के पार पहुंचा दी है, जिसके साथ वह भारत की सबसे बड़ी निजी ईंधन खुदरा विक्रेता (Private Fuel Retailer) बन गई है। कंपनी के इस विस्तार ने शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी ईंधन की उपलब्धता को मजबूत किया है।
कंपनी के अनुसार, पिछले 18 महीनों में 500 से अधिक नए पेट्रोल पंप शुरू किए गए हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन एक नया ईंधन केंद्र परिचालन में लाया गया। इस तेज विस्तार ने नायरा एनर्जी को निजी क्षेत्र के अन्य प्रतिस्पर्धियों से काफी आगे पहुंचा दिया है।
ग्रामीण भारत पर बढ़ा फोकस
नायरा एनर्जी ने अपने विस्तार की रणनीति में ग्रामीण और आंतरिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। कंपनी के कुल रिटेल आउटलेट्स में लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी ऐसे पेट्रोल पंपों की है, जो गांवों और छोटे कस्बों में स्थित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन नेटवर्क बढ़ने से कृषि, परिवहन और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलती है। इसके अलावा लोगों को ईंधन के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।
जियो-bp कितनी पीछे रह गई?
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटिश ऊर्जा कंपनी bp के संयुक्त उद्यम जियो-bp ने भी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार जियो-bp के देशभर में 2,000 से अधिक मोबिलिटी स्टेशन हैं।
इस तुलना में नायरा एनर्जी का 7,000 से अधिक पेट्रोल पंपों का नेटवर्क काफी बड़ा दिखाई देता है। यही वजह है कि कंपनी अब निजी ईंधन खुदरा बाजार में सबसे बड़ी खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आई है।
जियो-bp अपने ग्राहकों को प्रीमियम ईंधन, EV चार्जिंग, CNG फिलिंग, नाइट्रोजन टायर इंफ्लेशन, डोरस्टेप डीजल डिलीवरी और कैफे जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रदान करती है। वहीं नायरा एनर्जी की रणनीति नेटवर्क विस्तार और व्यापक पहुंच पर अधिक केंद्रित रही है।
भारत की रूस से तेल खरीद में तेजी
नायरा एनर्जी की इस उपलब्धि के बीच भारत और रूस के ऊर्जा संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार जून महीने में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 19 जून के बीच भारत ने औसतन 2.66 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) रूसी कच्चे तेल का आयात किया। यह मई के औसत 1.91 मिलियन BPD की तुलना में काफी अधिक है।
रूस फिलहाल भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी तेल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आगे क्या?
भारत में पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ईंधन रिटेल कंपनियां अपने नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही हैं। नायरा एनर्जी का 7,000 पेट्रोल पंपों का आंकड़ा पार करना इस बात का संकेत है कि निजी क्षेत्र अब सरकारी तेल कंपनियों को भी कड़ी चुनौती देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यदि कंपनी इसी गति से विस्तार जारी रखती है, तो आने वाले वर्षों में उसका नेटवर्क और मजबूत हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अभी भी ईंधन अवसंरचना सीमित है।


