Nominee Update Rules: बैंक अकाउंट, EPF, म्यूचुअल फंड, बीमा या किसी अन्य निवेश में नॉमिनी का नाम दर्ज करना बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन सिर्फ एक बार नॉमिनी का नाम दर्ज कर देना ही काफी नहीं है। समय के साथ परिवार और व्यक्तिगत परिस्थितियां बदलती रहती हैं, इसलिए नॉमिनी की जानकारी को भी अपडेट करते रहना चाहिए।
खासकर शादी, बच्चे के जन्म या गोद लेने, तलाक और नॉमिनी की मृत्यु जैसी परिस्थितियों में पुराने नॉमिनेशन की समीक्षा करना जरूरी हो जाता है। अगर रिकॉर्ड में पुरानी जानकारी बनी रहती है, तो व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार को संबंधित रकम या निवेश का दावा करने में अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
शादी के बाद नॉमिनी जरूर चेक करें
शादी के बाद व्यक्ति की पारिवारिक स्थिति बदल जाती है। ऐसे में बैंक अकाउंट, बीमा पॉलिसी, म्यूचुअल फंड, डिमैट अकाउंट और अन्य निवेशों में दर्ज नॉमिनी की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने नौकरी शुरू करते समय अपने माता-पिता को नॉमिनी बनाया था और शादी के बाद वह अपने जीवनसाथी या परिवार के किसी अन्य सदस्य को नॉमिनी बनाना चाहता है, तो संबंधित संस्थान के रिकॉर्ड में जरूरी बदलाव किया जा सकता है।
EPF में शादी के बाद खास नियम
EPFO के नियमों के मुताबिक, अगर किसी सदस्य ने शादी से पहले नॉमिनेशन किया था, तो शादी के बाद वह नॉमिनेशन अमान्य हो जाता है और सदस्य को नया नॉमिनेशन करना होता है। EPFO की e-Nomination गाइड भी शादी के बाद नया नॉमिनेशन दाखिल करने की बात कहती है।
इसलिए नौकरीपेशा लोगों को शादी के बाद EPF e-Nomination की जानकारी जरूर अपडेट करनी चाहिए। EPFO के अनुसार नया e-Nomination पूरा करने के लिए उसे Aadhaar आधारित e-Sign से सत्यापित करना भी जरूरी है।
तलाक के बाद भी नॉमिनी की समीक्षा जरूरी
तलाक या परिवार की स्थिति में बड़े बदलाव के बाद पुराने नॉमिनी की जानकारी को दोबारा जांचना समझदारी है। अगर पूर्व जीवनसाथी का नाम किसी वित्तीय खाते या निवेश में नॉमिनी के तौर पर दर्ज है, तो व्यक्ति को संबंधित संस्था के नियमों के अनुसार नॉमिनी बदलने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
यह खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके पास एक से ज्यादा बैंक खाते, बीमा पॉलिसियां, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश हैं।
बच्चे के जन्म या गोद लेने के बाद
परिवार में बच्चे के आने के बाद भी नॉमिनेशन की समीक्षा करनी चाहिए। बच्चे के जन्म या गोद लेने के बाद व्यक्ति अपनी वित्तीय योजना के अनुसार बैंक अकाउंट, बीमा, म्यूचुअल फंड और EPF में परिवार की जानकारी अपडेट कर सकता है।
EPFO भी सदस्यों को परिवार में नए बच्चे के जन्म या किसी नामित व्यक्ति की मृत्यु जैसी परिस्थितियों में नॉमिनेशन अपडेट करने की सलाह देता है, ताकि मृत्यु की स्थिति में परिवार को संबंधित लाभ प्राप्त करने में आसानी हो।
अगर नाबालिग बच्चे को EPF में नॉमिनी बनाया जाता है, तो उसके लिए नियमों के अनुसार एक वयस्क अभिभावक की जानकारी भी दर्ज की जा सकती है।
नॉमिनी की मृत्यु होने पर तुरंत करें अपडेट
अगर जिस व्यक्ति को आपने नॉमिनी बनाया था उसकी मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी की जानकारी को जल्द से जल्द अपडेट करना चाहिए। पुराने नॉमिनी के रिकॉर्ड को ऐसे ही छोड़ देने से भविष्य में रकम का दावा करते समय अतिरिक्त दस्तावेज और प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
EPFO की गाइड में भी परिवार में नामित व्यक्ति की मृत्यु होने पर नॉमिनेशन अपडेट करने की सलाह दी गई है।
सिर्फ नॉमिनी अपडेट करना ही काफी नहीं
नॉमिनी की जानकारी के साथ-साथ यह भी देखना चाहिए कि आपके सभी वित्तीय रिकॉर्ड में नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, पता और अन्य जरूरी जानकारी सही है या नहीं।
खासकर अगर आपने नौकरी बदलने, शादी करने या परिवार में बदलाव के बाद अपनी व्यक्तिगत जानकारी बदली है, तो अलग-अलग वित्तीय संस्थानों के रिकॉर्ड की समीक्षा करना उपयोगी रहता है।
नॉमिनी और कानूनी वारिस एक ही चीज नहीं
यह बात भी समझना जरूरी है कि नॉमिनी और कानूनी वारिस की भूमिका हमेशा एक जैसी नहीं होती। नॉमिनी का मुख्य उद्देश्य संबंधित संस्था से रकम या संपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना होता है। अंतिम अधिकारों का निर्धारण संबंधित कानून और उत्तराधिकार के नियमों के आधार पर हो सकता है।
इसलिए बड़ी संपत्ति या कई निवेश होने की स्थिति में केवल नॉमिनी दर्ज कराने के साथ-साथ वसीयत (Will) बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।
कितनी बार नॉमिनी की जानकारी चेक करनी चाहिए?
इसके लिए कोई एक तय अंतराल जरूरी नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि जब भी जीवन में कोई बड़ा पारिवारिक या वित्तीय बदलाव हो, उसी समय नॉमिनी की जानकारी की समीक्षा कर ली जाए।
खास तौर पर इन मौकों पर रिकॉर्ड जरूर चेक करें:
- शादी होने पर
- बच्चे के जन्म या गोद लेने पर
- तलाक होने पर
- नॉमिनी की मृत्यु होने पर
- परिवार की स्थिति में बड़ा बदलाव होने पर
- नया बैंक अकाउंट या निवेश शुरू करने पर
- किसी पुराने निवेश को बंद या ट्रांसफर करने पर
निष्कर्ष
नॉमिनी का नाम दर्ज करना वित्तीय योजना का एक जरूरी हिस्सा है, लेकिन इसे एक बार करके भूल जाना सही नहीं है। समय के साथ परिवार की परिस्थितियां बदलती हैं और उसी के अनुसार नॉमिनी की जानकारी भी अपडेट होनी चाहिए।
खासकर EPF के मामले में शादी के बाद पुराने नॉमिनेशन के अमान्य होने का नियम है, इसलिए नौकरीपेशा लोगों को शादी के बाद नया e-Nomination जरूर करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: नॉमिनी और उत्तराधिकार से जुड़े नियम अलग-अलग वित्तीय उत्पादों और परिस्थितियों में अलग हो सकते हैं। किसी बड़े वित्तीय या कानूनी फैसले से पहले संबंधित संस्था के मौजूदा नियम जरूर जांचें।


