नई दिल्ली: टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने भारत के शिक्षा क्षेत्र को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में मुनाफा कमाने वाले (For-Profit) शिक्षण संस्थानों पर लगी पाबंदियों के कारण शिक्षा क्षेत्र में पर्याप्त निवेश नहीं हो पा रहा है। उनका मानना है कि भारत को विश्वस्तरीय कॉलेज और यूनिवर्सिटी बनाने की जरूरत है, ताकि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका और यूरोप जैसे देशों का रुख न करना पड़े।
बेंगलुरु में आयोजित IIM बैंगलोर के पूर्व छात्रों के सम्मेलन ‘IIMBue’ में बोलते हुए नोएल टाटा ने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ाई के लिए जाते हैं और इस पर देश का भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। यदि भारत में ही विश्वस्तरीय संस्थान विकसित किए जाएं तो यह धन देश के भीतर ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में इस्तेमाल हो सकता है।
शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की जरूरत
नोएल टाटा ने कहा कि वर्तमान नियमों के कारण निजी निवेशक शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि अदालतों की यह व्याख्या कि कोई भी शिक्षण संस्थान मुनाफा नहीं कमा सकता, शिक्षा के विकास में बाधा बन रही है।
उन्होंने कहा,
“हम हर साल बच्चों को अमेरिका और यूरोप भेजने में बहुत ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। अगर भारत में बेहतर संस्थान हों तो छात्रों को विदेश जाने की जरूरत कम होगी।”
उनका मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक रिसर्च सुविधाएं और वैश्विक स्तर की पढ़ाई उपलब्ध कराई जा सकती है।
टाटा ट्रस्ट्स शिक्षा को बनाएगा प्राथमिकता
नोएल टाटा ने बताया कि टाटा ट्रस्ट्स आने वाले वर्षों में शिक्षा को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करेगा। ट्रस्ट जल्द ही IIM बैंगलोर के साथ मिलकर स्कूल ऑफ अंडरग्रेजुएट स्टडीज शुरू करने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स एक बार फिर वैसे ही संस्थान विकसित करना चाहता है, जैसे उसने पहले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के निर्माण में योगदान दिया था।
नोएल टाटा ने कहा,
“मैं नए संस्थान बनाने पर और अधिक निवेश करना चाहता हूं।”
पूरे भारत में 40-50 अस्पताल बनाने की तैयारी
शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र भी टाटा ट्रस्ट्स की प्राथमिकताओं में शामिल है। नोएल टाटा ने बताया कि ट्रस्ट पूरे देश में 40 से 50 जनरल हॉस्पिटल स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण के लिए तीन स्थानों का चयन किया जा चुका है और जल्द ही परियोजना पर काम शुरू होगा।
इन अस्पतालों की खास बातें:
- अस्पताल बिना मुनाफे (Not-for-Profit) के आधार पर संचालित होंगे।
- सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत मरीजों का इलाज किया जाएगा।
- क्रॉस-सब्सिडी मॉडल अपनाया जाएगा।
- करीब 20-30% कमरे कमर्शियल दरों पर उपलब्ध होंगे, जिससे अन्य मरीजों के इलाज पर सब्सिडी दी जा सकेगी।
- सभी मरीजों को समान डॉक्टर, दवाएं, ऑपरेशन थिएटर और चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
- अतिरिक्त शुल्क देने वालों को केवल प्राइवेट कमरे और परिवार के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
परोपकार के प्रभाव को मापने पर भी दिया जोर
नोएल टाटा ने कहा कि परोपकार (Philanthropy) के प्रभाव को मापने के लिए अधिक पारदर्शी और सख्त व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर यह दावा किया जाता है कि किसी परियोजना ने हजारों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं होता कि वास्तव में उनके जीवन में कितना बदलाव आया।
उन्होंने कहा,
“जब हम कहते हैं कि हमने किसी की जिंदगी को छुआ है, तो हमें यह स्पष्ट करना चाहिए कि इसका वास्तविक अर्थ क्या है।”
भारत के लिए क्या है इसका महत्व?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा मिलता है तो भारत में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ सकती है। इससे छात्रों का विदेशों की ओर पलायन कम होगा, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा तथा देश की अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में टाटा ट्रस्ट्स की नई अस्पताल योजना आम लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण और किफायती इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।


