NEET-PG Cut-off Case: नीट पीजी 2025-26 प्रवेश प्रक्रिया और कट-ऑफ में की गई कमी को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा अपडेट दिया है। सरकार ने अदालत को बताया कि डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया का व्यापक आंतरिक ऑडिट करेगी। यह समिति मौजूदा व्यवस्था की कमियों की पहचान कर सुधार के सुझाव देगी और भविष्य के लिए अधिक पारदर्शी एवं मजबूत प्रवेश प्रणाली तैयार करने की दिशा में काम करेगी।
सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने क्या बताया?
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि यह समिति 23 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के तहत गठित की गई है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ कर रही है। अदालत को बताया गया कि समिति को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में लगभग आठ सप्ताह का समय लगेगा।
DGHS प्रमुख करेंगे समिति की अध्यक्षता
उच्चाधिकार समिति की अध्यक्षता DGHS के डायरेक्टर जनरल डी. लवनीश जी. कृष्णा करेंगे। वहीं असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल (मेडिकल एजुकेशन) डॉ. प्रवीण कुमार दास को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
समिति में कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC)
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)
- नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE)
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी
समिति का उद्देश्य क्या होगा?
सरकार के अनुसार समिति केवल मौजूदा विवाद की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया का आंतरिक ऑडिट करेगी।
समिति के प्रमुख कार्य होंगे:
- वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा करना।
- कमियों और खामियों की पहचान करना।
- पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुधारात्मक सुझाव देना।
- भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए स्थायी ऑडिट तंत्र विकसित करना।
- सभी संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करना।
जरूरत पड़ने पर समिति नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) और नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (NCH) के विशेषज्ञों को भी अपने साथ जोड़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
केंद्र सरकार का जवाब दर्ज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समिति को आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे मामले पर विस्तार से विचार किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।
एमिकस क्यूरी को लेकर भी हुई चर्चा
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद और अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने मामले में नए एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का सुझाव दिया।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह पहले से ही इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किए जा चुके हैं।
क्या है पूरा विवाद?
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन तथा डॉक्टर सौरव कुमार, लक्ष्य मित्तल और आकाश सोनी द्वारा दायर की गई है।
याचिका में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी को जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें NEET-PG 2025-26 काउंसलिंग के तीसरे राउंड के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में बड़ी कटौती की गई थी।
कितना बदला गया था NEET-PG कट-ऑफ?
संशोधित नियमों के अनुसार:
- सामान्य वर्ग का कट-ऑफ स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया।
- क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 50वें पर्सेंटाइल से घटाकर 7वें पर्सेंटाइल पर ला दिया गया।
- SC, ST और OBC अभ्यर्थियों के लिए कट-ऑफ स्कोर 235 से घटाकर -40 कर दिया गया।
इसी फैसले को याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में इतनी बड़ी कटौती मनमानी, असंवैधानिक और अनुचित है। उनका आरोप है कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
उनका तर्क है कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम योग्यता मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर DGHS की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर रहेगी। यदि समिति प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाती है, तो भविष्य में NEET-PG काउंसलिंग प्रक्रिया, कट-ऑफ निर्धारण और प्रवेश नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद मामले की आगे विस्तार से सुनवाई की जाएगी।


