NBCC Share Price: सरकारी क्षेत्र की नवरत्न कंपनी एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड सोमवार, 20 जुलाई को निवेशकों के रडार पर रह सकती है। कंपनी ने अपनी 100% स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एचएससीसी (इंडिया) लिमिटेड के एनबीसीसी में विलय (Merger) की योजना को बोर्ड से मंजूरी दे दी है। कंपनी ने 18 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में इस फैसले की पुष्टि की।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस खबर का असर सोमवार को शेयर की चाल पर देखने को मिल सकता है। शुक्रवार, 17 जुलाई को बीएसई पर एनबीसीसी का शेयर 0.10% की मामूली गिरावट के साथ ₹97.25 पर बंद हुआ था।
NBCC में क्यों हो रहा है HSCC का विलय?
एचएससीसी (इंडिया) लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1983 में हुई थी। यह कंपनी देश और विदेश में अस्पतालों के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंसी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है। इसके प्रमुख ग्राहकों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व बैंक (World Bank) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी शामिल हैं।
चूंकि एचएससीसी पूरी तरह से एनबीसीसी की स्वामित्व वाली कंपनी है, इसलिए दोनों कंपनियों के संचालन को अधिक प्रभावी और सरल बनाने के उद्देश्य से इसका विलय किया जा रहा है।
क्या शेयरधारकों को मिलेंगे नए शेयर?
इस विलय से जुड़े सबसे बड़े सवाल का जवाब कंपनी ने साफ कर दिया है।
- एचएससीसी, एनबीसीसी की 100% स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
- इसलिए विलय के बाद एनबीसीसी कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी।
- किसी भी शेयरधारक को कैश भुगतान भी नहीं किया जाएगा।
- यानी मौजूदा एनबीसीसी शेयरधारकों की हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं होगा।
इस तरह यह विलय केवल कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को सरल बनाने के लिए किया जा रहा है, न कि शेयर पूंजी में बदलाव के लिए।
कब से प्रभावी माना जाएगा विलय?
कंपनी के अनुसार, विलय की नियुक्त तिथि (Appointed Date) 1 अप्रैल 2026 तय की गई है।
हालांकि यह प्रक्रिया तभी पूरी मानी जाएगी जब:
- मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) से मंजूरी मिले,
- आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी हों,
- और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास योजना दर्ज हो जाए।
इसके बाद एचएससीसी का अलग कानूनी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और उसकी सभी परिसंपत्तियां, दायित्व और कारोबार एनबीसीसी में समाहित हो जाएंगे।
एक्सचेंज से NOC की जरूरत क्यों नहीं?
कंपनी ने बताया कि DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) से इस विलय के लिए पहले ही नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल चुका है।
इसके अलावा, SEBI के नियमों के अनुसार यदि किसी होल्डिंग कंपनी और उसकी 100% स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के बीच विलय होता है, तो ऐसे मामलों में स्टॉक एक्सचेंज से अलग से NOC लेने की आवश्यकता नहीं होती।
इससे विलय की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान और तेज हो जाती है।
एक साल में कैसी रही NBCC के शेयर की चाल?
एनबीसीसी के शेयरों में पिछले एक साल के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
- 52 सप्ताह का उच्च स्तर: ₹126.00 (29 दिसंबर 2025)
- 52 सप्ताह का निचला स्तर: ₹77.17 (30 मार्च 2026)
- हाई से शेयर में करीब 38.75% की गिरावट दर्ज हुई।
- शुक्रवार, 17 जुलाई को शेयर ₹97.25 पर बंद हुआ।
हालांकि हाल के महीनों में शेयर में कुछ रिकवरी देखने को मिली है, लेकिन यह अभी भी अपने रिकॉर्ड हाई स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है।
सोमवार को क्यों रहेगा शेयर फोकस में?
बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि निवेशक इस विलय को किस तरह से लेते हैं। आमतौर पर पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के विलय से कॉरपोरेट स्ट्रक्चर सरल होता है, प्रशासनिक लागत घट सकती है और परिचालन दक्षता बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, शेयर की दिशा पर व्यापक बाजार का माहौल और निवेशकों की धारणा भी असर डाल सकती है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं देता।


