Who is Nandan Nilekani: देश के डिजिटल बदलाव की बात हो तो नंदन नीलेकणि का नाम सबसे पहले लिया जाता है। आधार, GST नेटवर्क, UPI और ONDC जैसे बड़े डिजिटल प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभाने के बाद अब केंद्र सरकार ने उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए गठित एग्जाम रिफॉर्म टास्क फोर्स की कमान सौंपी है। NTA विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। यही वजह है कि चाहे सरकार किसी भी दल की रही हो, बड़े तकनीकी बदलावों के समय नंदन नीलेकणि पर भरोसा लगातार कायम रहा है।
NTA परीक्षा सुधार की जिम्मेदारी क्यों मिली?
हाल के वर्षों में कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का फैसला किया और इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को चुना।
सरकार चाहती है कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल, सुरक्षित और विश्वसनीय हो, जहां प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत रहे, डेटा एन्क्रिप्शन का बेहतर इस्तेमाल हो, हर प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद रहे और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम हो।
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि भारत के सबसे प्रतिष्ठित टेक उद्यमियों और डिजिटल नीति विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। उनका जन्म वर्ष 1955 में बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और करियर की शुरुआत पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स से की। यहीं उनकी मुलाकात एन. आर. नारायण मूर्ति से हुई।
साल 1981 में उन्होंने नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर Infosys की स्थापना की। आज इन्फोसिस दुनिया की अग्रणी आईटी कंपनियों में शामिल है। नीलेकणि 2002 से 2007 तक कंपनी के CEO रहे और बाद में 2017 में नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में दोबारा कंपनी का नेतृत्व संभाला।
कितनी है नंदन नीलेकणि की संपत्ति?
सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग और विभिन्न वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर नंदन नीलेकणि की अनुमानित नेटवर्थ करीब ₹38,000 करोड़ बताई जाती है। वे भारत के सबसे अमीर और प्रभावशाली टेक उद्यमियों में शामिल हैं।
आधार प्रोजेक्ट से मिली राष्ट्रीय पहचान
नंदन नीलेकणि को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी पहचान आधार परियोजना से मिली। वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया।
उनके नेतृत्व में शुरू हुई आधार परियोजना आज दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम बन चुकी है। बैंकिंग, सरकारी योजनाएं, टैक्स, मोबाइल सिम, डिजिटल भुगतान और पहचान सत्यापन सहित अनेक सेवाओं में आधार अहम भूमिका निभा रहा है।
UPI और डिजिटल इंडिया में भी रहा बड़ा योगदान
नीलेकणि ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने NPCI के सलाहकार के रूप में काम किया और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया।
आज UPI दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम में शामिल है और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।
किन-किन बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे नंदन नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि कई राष्ट्रीय स्तर की डिजिटल परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
- आधार (Aadhaar): UIDAI के पहले चेयरमैन के रूप में आधार परियोजना का नेतृत्व।
- GST नेटवर्क (GSTN): जीएसटी लागू करने के लिए डिजिटल आईटी सिस्टम तैयार करने में अहम भूमिका।
- UPI: डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आसान और सुरक्षित बनाने में योगदान।
- TAGUP: सरकारी सेवाओं और वित्तीय प्रशासन में तकनीक के उपयोग के लिए गठित टेक्नोलॉजी एडवाइजरी ग्रुप की अध्यक्षता।
- G20 डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर टास्क फोर्स: डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन से जुड़े वैश्विक प्रयासों में योगदान।
- ONDC: ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स की सलाहकार परिषद में महत्वपूर्ण भूमिका।
हर सरकार क्यों करती है भरोसा?
नंदन नीलेकणि की सबसे बड़ी ताकत केवल तकनीकी विशेषज्ञता नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर जटिल सरकारी प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू करने का अनुभव है। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दौर में सरकारों के साथ काम किया और तकनीक आधारित सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
इसी वजह से जब भी देश के सामने डिजिटल सुधार, पारदर्शिता और बड़े पैमाने पर तकनीकी बदलाव की चुनौती आती है, तो सरकारें नंदन नीलेकणि के अनुभव पर भरोसा जताती हैं।
अब NTA सुधार पर रहेगी सबकी नजर
NTA परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की कमान मिलने के बाद अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की निगाहें नंदन नीलेकणि की सिफारिशों पर टिकी हैं। यदि उनकी अगुवाई में सुरक्षित डिजिटल परीक्षा प्रणाली, मजबूत साइबर सुरक्षा, एआई आधारित निगरानी और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया लागू होती है, तो देश की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


