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Reading: मुकेश अंबानी के लिए बड़ी राहत! सुप्रीम कोर्ट ने Reliance के खिलाफ SEBI का ₹447 करोड़ का आदेश किया रद्द, ₹250 करोड़ लौटाने का भी निर्देश
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मुकेश अंबानी के लिए बड़ी राहत! सुप्रीम कोर्ट ने Reliance के खिलाफ SEBI का ₹447 करोड़ का आदेश किया रद्द, ₹250 करोड़ लौटाने का भी निर्देश

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 4:44 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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8 Min Read
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नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके चेयरमैन मुकेश अंबानी के लिए शुक्रवार को बड़ी कानूनी राहत की खबर आई। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के चर्चित रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (RPL) फ्यूचर्स ट्रेडिंग मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कंपनी को ₹447.27 करोड़ लौटाने के लिए कहा गया था।

Contents
Highlightsक्या था पूरा मामला?SEBI ने क्यों लगाया था धोखाधड़ी का आरोप?SAT से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामलासुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?रिलायंस और निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?भारतीय पूंजी बाजार के लिए क्या संकेत?निष्कर्ष

Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ SEBI का ₹447.27 करोड़ लौटाने का आदेश रद्द किया।
  • अदालत ने SEBI को रिलायंस द्वारा जमा किए गए ₹250 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया।
  • रिलायंस पर लगाए गए धोखाधड़ी और बाजार में हेरफेर के आरोप भी खारिज हुए।
  • 2007 के रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (RPL) फ्यूचर्स ट्रेडिंग मामले का लगभग 19 साल बाद अंत हुआ।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि SEBI द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी और बाजार में हेरफेर के आरोप पर्याप्त रूप से साबित नहीं किए जा सके। अदालत ने इसके साथ ही SEBI को निर्देश दिया कि वह रिलायंस द्वारा जमा कराए गए ₹250 करोड़ भी वापस करे। यह फैसला न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार में नियामकीय कार्रवाई और न्यायिक समीक्षा के संबंध में भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2007 का है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी सहयोगी कंपनी रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (RPL) में लगभग 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी। कंपनी का उद्देश्य इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाना था। रिलायंस ने इस प्रक्रिया के लिए 12 संस्थाओं को एजेंट के रूप में नियुक्त किया। इन एजेंट कंपनियों ने RPL के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़ी मात्रा में शॉर्ट पोजिशन ली। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार इन संस्थाओं ने करीब 9.92 करोड़ शेयरों की नेट शॉर्ट पोजिशन बनाई थी। इसके बाद नवंबर 2007 के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कैश मार्केट में RPL के 20 करोड़ से अधिक शेयर बेचे। इस बिक्री से कंपनी को लगभग ₹4,500 करोड़ की राशि प्राप्त हुई। बाद में शेयर कीमतों में आई गिरावट के कारण फ्यूचर्स पोजिशन से भी कंपनी को अतिरिक्त लाभ हुआ। यही वह बिंदु था, जिसे लेकर SEBI ने जांच शुरू की थी।

SEBI ने क्यों लगाया था धोखाधड़ी का आरोप?

SEBI का आरोप था कि रिलायंस और उससे जुड़ी संस्थाओं ने पहले फ्यूचर्स मार्केट में बड़ी शॉर्ट पोजिशन बनाई और बाद में कैश मार्केट में बड़े पैमाने पर शेयर बेचकर कीमतों पर दबाव डाला। नियामक संस्था का मानना था कि यह एक सुनियोजित रणनीति थी, जिससे बाजार को प्रभावित किया गया और अनुचित लाभ कमाया गया। SEBI ने इसे निवेशकों के हितों के खिलाफ तथा बाजार की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया था। मार्च 2017 में SEBI के पूर्णकालिक सदस्य ने फैसला सुनाते हुए रिलायंस को कथित अनुचित लाभ के आधार पर ₹447.27 करोड़ वापस करने का आदेश दिया था। इस राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी लगाया गया था। इसके अलावा रिलायंस और उससे जुड़ी 12 संस्थाओं को इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार में एक निश्चित अवधि तक ट्रेडिंग से प्रतिबंधित भी किया गया था।

SAT से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

SEBI के आदेश के खिलाफ रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे पहले सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) का दरवाजा खटखटाया। हालांकि SAT ने SEBI के निर्णय को बरकरार रखा और कंपनी को राहत नहीं मिली। इसके बाद रिलायंस ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। लंबे समय तक चली सुनवाई और कानूनी बहस के बाद अब सर्वोच्च अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए SEBI के प्रमुख आदेशों को रद्द कर दिया है। इस तरह लगभग 19 वर्षों से चला आ रहा विवाद अब समाप्त हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और सबूतों के आधार पर धोखाधड़ी या बाजार में हेरफेर के आरोपों को कायम रखना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि नियामक कार्रवाई के लिए मजबूत और स्पष्ट साक्ष्य आवश्यक होते हैं। केवल बाजार में हुए परिणामों के आधार पर किसी कंपनी को धोखाधड़ी का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने ₹447.27 करोड़ की रिकवरी से जुड़ा आदेश रद्द कर दिया और SEBI को पहले जमा कराई गई ₹250 करोड़ की राशि वापस करने का निर्देश दिया। हालांकि अदालत ने मामले में लगाया गया ₹25 करोड़ का अलग जुर्माना बरकरार रखा है।

रिलायंस और निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत है। कंपनी लंबे समय से इस मामले का सामना कर रही थी और अब उसे एक बड़ी अनिश्चितता से राहत मिली है। निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह फैसला रिलायंस की कॉरपोरेट छवि को मजबूत करने वाला माना जा सकता है। हालांकि कंपनी के कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन पर इस मामले का तत्काल प्रभाव पहले से ही सीमित था, लेकिन कानूनी जोखिम खत्म होना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह फैसला भविष्य में SEBI की प्रवर्तन कार्रवाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बनेगा, क्योंकि अदालत ने साक्ष्यों के मानकों और नियामकीय शक्तियों की सीमा पर स्पष्ट संदेश दिया है।

भारतीय पूंजी बाजार के लिए क्या संकेत?

यह मामला केवल रिलायंस और SEBI के बीच का विवाद नहीं था, बल्कि यह भारतीय पूंजी बाजार में नियामकीय निगरानी और न्यायिक समीक्षा के संतुलन से भी जुड़ा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह संकेत देता है कि नियामक संस्थाओं को कार्रवाई करते समय मजबूत कानूनी आधार और पर्याप्त सबूतों की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट होता है कि बड़े कॉर्पोरेट समूहों के खिलाफ की गई कार्रवाई भी न्यायिक परीक्षण से गुजरती है और अंतिम निर्णय अदालतों के हाथ में होता है।

निष्कर्ष

करीब दो दशक पुराने रिलायंस पेट्रोलियम फ्यूचर्स ट्रेडिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। SEBI का ₹447.27 करोड़ लौटाने का आदेश रद्द होने और ₹250 करोड़ वापस करने के निर्देश के साथ कंपनी ने इस लंबे कानूनी संघर्ष में महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। यह फैसला न केवल रिलायंस बल्कि भारतीय कॉर्पोरेट और नियामकीय ढांचे के लिए भी दूरगामी महत्व रखता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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