Nepal Flood: चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ से नेपाल में भारी तबाही हुई है। भारत ने राहत और बचाव अभियान में अपनी तकनीकी, मेडिकल और फोरेंसिक टीमों को उतार दिया है।
Nepal Flood: नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ के बीच राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। चीन से लगी सीमा के आसपास रसुवा, नुवाकोट और लांगटांग क्षेत्र बाढ़ और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा है और कुछ लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
ऐसे मुश्किल हालात में भारत ने नेपाल की मदद के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। भारत की ओर से सुरंगों में बचाव कार्य करने वाली विशेषज्ञ टीम, मेडिकल स्टाफ और फोरेंसिक विशेषज्ञों को नेपाल भेजा गया है। फोरेंसिक टीम बरामद शवों और अवशेषों की DNA प्रोफाइलिंग के जरिए पहचान करने में भी मदद कर रही है।
बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की मौत की सूचना है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। खराब मौसम, अस्थिर जमीन, क्षतिग्रस्त सड़कें और दोबारा बाढ़ आने का खतरा राहत एवं बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
भारत ने भेजी स्पेशल टनल-रेस्क्यू टीम
भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों वाली 11 सदस्यीय विशेष टीम नेपाल भेजी है।
यह टीम विशेष रूप से चिलिमे और लांगटांग सहित प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। टीम का मुख्य उद्देश्य उन सुरंगों और ढांचों की जांच करना है, जहां बाढ़ के बाद लोगों के फंसे होने की आशंका है।
खराब मौसम के बावजूद बचावकर्मियों ने लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक क्षतिग्रस्त ढांचे में प्रवेश किया और वहां से एक व्यक्ति का शव बाहर निकाला। हालांकि, सुरंगों और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान अभी जारी है।
68.5 टन राहत सामग्री भी पहुंचाई
भारत ने सिर्फ रेस्क्यू टीम ही नहीं भेजी, बल्कि नेपाल में बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भी पहुंचाई है। भारत की ओर से करीब 68.5 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से भेजी गई है।
इस राहत सामग्री में जरूरतमंद लोगों के लिए:
- कंबल
- स्लीपिंग बैग
- तिरपाल
- प्लास्टिक शीट
- हाइजीन किट
जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं।
काठमांडू से प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भी राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। इसके लिए ट्रांसपोर्ट वाहनों के साथ हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
DNA टेस्ट से होगी लापता लोगों और शवों की पहचान
नेपाल में बड़ी संख्या में शव बरामद होने के बाद उनकी पहचान करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। इसी वजह से भारत ने फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी भेजी है।
शुरुआत में छह फोरेंसिक टीमों के भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद 19 सदस्यों वाले एक विशेष फोरेंसिक समूह की जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर स्थित नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यीय DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल है।
फोरेंसिक टीम ने काठमांडू में अपना काम शुरू कर दिया है। भारतीय अधिकारियों ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी स्तर पर बातचीत की है।
इस प्रक्रिया के तहत अज्ञात शवों और बरामद मानव अवशेषों से DNA सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही लापता लोगों के करीबी रिश्तेदारों से भी DNA सैंपल लेकर उनका मिलान किया जाएगा।
शवों को दफनाने से पहले DNA सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश
नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है, उन्हें सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित किए जाएं।
हर शव को एक विशिष्ट पहचान संख्या और बरामदगी की जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा। इससे भविष्य में परिवार के किसी सदस्य के DNA सैंपल से मिलान करके मृतक की पहचान करने में मदद मिलेगी।
नेपाल में मौजूद लापता लोगों के करीबी रिश्तेदारों, जैसे माता-पिता, बेटे या बेटी, से ताजा ब्लड सैंपल देने को कहा गया है। इसके साथ पासपोर्ट साइज की तस्वीरें भी मांगी गई हैं।
विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदार अधिकृत लैब से DNA प्रोफाइलिंग करा सकते हैं और तुलना के लिए प्रोफाइल नेपाल पुलिस को भेज सकते हैं।
अस्पताल में भी बड़ी संख्या में शव और घायल पहुंचे
काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में बाढ़ प्रभावित इलाकों से घायल और मृत लोगों को लाया गया है।
अस्पताल के अनुसार, 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन को इंटेंसिव केयर में रखा गया है। एक मरीज की मौत भी हुई है।
अस्पताल में कुल 59 शव लाए गए थे। इनमें से आठ की पहचान होने के बाद उन्हें अंतिम संस्कार के लिए परिवारों को सौंप दिया गया।
लापता लोगों के परिवार अपने रिश्तेदारों की जानकारी लेने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
भारतीय नागरिकों को निकालने का अभियान जारी
नेपाल और चीन की सीमा के आसपास बाढ़ और खराब मौसम के कारण कई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत सरकार और भारतीय दूतावास लगातार नेपाली अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।
बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। चीन की तरफ मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की भी पुष्टि की गई है। सीमा के दोनों ओर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल और जरूरत पड़ने पर चीन के अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन और ईमेल सेवा भी शुरू की है।
20 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे
नेपाल में राहत और बचाव अभियान को बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। इसके लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
अब तक:
- करीब 8,730 लोगों को जमीन के रास्ते सुरक्षित निकाला गया है
- हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं
- करीब 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया गया है
- एयरलिफ्ट किए गए लोगों में 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं
- हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है
ये आंकड़े बताते हैं कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान कितने बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है।
पृथ्वी हाईवे पर भी आवाजाही बंद
राहत एवं बचाव अभियान के बीच नेपाल में सड़क संपर्क बहाल करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क प्रभावित हुआ।
तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित हिस्से में वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।
इससे राहत सामग्री और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
8 हेलीकॉप्टर उड़ानों और 50 वाहनों से पहुंच रही राहत
काठमांडू से बाढ़ प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों में खाने-पीने की सामग्री, संचार उपकरण और अन्य जरूरी सामान भेजा जा रहा है।
राहत सामग्री पहुंचाने के लिए करीब 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लंबे समय तक राहत अभियान चलाने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।
इससे साफ है कि नेपाल में राहत अभियान को सिर्फ तत्काल बचाव तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि आने वाले दिनों के लिए भी तैयारी की जा रही है।
बैंक से करोड़ों की नकदी और सोना सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया
बाढ़ के दौरान सिर्फ लोगों की जान बचाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों और संपत्तियों को सुरक्षित रखना भी जरूरी हो गया है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ नेपाली रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है।
नेपाल सरकार ने भी जारी किया इमरजेंसी फंड
राहत और बचाव अभियान के लिए नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों को आपातकालीन आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई है।
इसके तहत:
- रसुवा को 1 करोड़ नेपाली रुपये
- नुवाकोट को 1 करोड़ नेपाली रुपये
- धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये
- 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये
जारी किए गए हैं।
क्यों मुश्किल है नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन?
नेपाल के प्रभावित हिमालयी इलाकों में बचाव अभियान कई प्राकृतिक और भौगोलिक चुनौतियों से जूझ रहा है। सबसे बड़ी समस्या खराब मौसम और अस्थिर जमीन है।
बाढ़ के बाद कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से जमीन के रास्ते राहत दलों का पहुंचना मुश्किल है। वहीं, झीलों और नदियों में पानी का स्तर बढ़ने से अचानक दोबारा बाढ़ आने का खतरा भी बना हुआ है।
हेलीकॉप्टर से राहत पहुंचाने में भी मौसम बाधा बन रहा है। दूसरी तरफ सुरंगों के अंदर मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त संरचनाएं बचावकर्मियों के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं।
इसके बावजूद नेपाली सेना, सुरक्षा एजेंसियां और भारतीय विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी और बचाव अभियान चला रहे हैं।
नेपाल में यह अभियान अब सिर्फ बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित निकालने तक सीमित नहीं है। सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश, लापता नागरिकों का पता लगाना, अज्ञात शवों की DNA से पहचान और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना—इन सभी मोर्चों पर भारत और नेपाल की टीमें मिलकर काम कर रही हैं।


