मारुति सुजुकी ने हरियाणा के खरखौदा प्लांट में दूसरी यूनिट शुरू कर दी है, जिससे उत्पादन क्षमता 5 लाख यूनिट सालाना हो गई। इसके बावजूद शेयर बाजार में कंपनी के शेयर 2% से ज्यादा टूट गए।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) ने सोमवार को हरियाणा के खरखौदा स्थित अपने प्लांट में दूसरी यूनिट का प्रोडक्शन शुरू कर दिया। कंपनी के लिए यह एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि इसके साथ ही इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 5 लाख यूनिट प्रति वर्ष हो गई है।
हालांकि, इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद शेयर बाजार में कंपनी के शेयर दबाव में दिखाई दिए। सोमवार को बाजार में भारी बिकवाली के बीच मारुति सुजुकी के शेयर भी 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। निवेशकों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी सकारात्मक खबर के बावजूद शेयर क्यों गिर गए?
खरखौदा प्लांट में क्या हुआ बड़ा बदलाव?
मारुति सुजुकी ने आधिकारिक बयान में बताया कि खरखौदा प्लांट की दूसरी यूनिट अब पूरी तरह चालू हो गई है। इस यूनिट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 2.5 लाख वाहन है।
पहली यूनिट पहले से चालू थी और अब दूसरी यूनिट जुड़ने के बाद पूरे प्लांट की क्षमता बढ़कर 5 लाख यूनिट सालाना हो गई है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस प्लांट की कुल क्षमता 10 लाख यूनिट प्रति वर्ष तक पहुंचाने का है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यही मारुति का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।
पीएम मोदी ने रखी थी आधारशिला
खरखौदा प्लांट की आधारशिला अगस्त 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। कंपनी ने काफी तेजी से इस परियोजना पर काम किया और अब इसका दूसरा चरण भी शुरू हो चुका है। मारुति सुजुकी के लिए यह प्लांट रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि NCR क्षेत्र में कंपनी की सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पहले से मजबूत हैं। इससे उत्पादन लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है।
कौन-कौन सी कारें बन रही हैं?
फिलहाल कंपनी इस यूनिट में अपनी लोकप्रिय कॉम्पैक्ट SUV ब्रेजा (Brezza) का उत्पादन कर रही है। इसके अलावा मिड-SUV सेगमेंट की विक्टोरिस (Victoris) का निर्माण भी यहां किया जा रहा है। SUV सेगमेंट में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी इस प्लांट को भविष्य के बड़े प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित कर रही है।
भारतीय ऑटो बाजार में पिछले कुछ वर्षों में SUV की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है और मारुति अब इसी सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही है।
भारत में मारुति की कुल क्षमता कितनी हुई?
नई यूनिट शुरू होने के बाद मारुति सुजुकी की भारत में कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 26.5 लाख यूनिट हो गई है। कंपनी के प्रमुख प्लांट इस समय गुरुग्राम (हरियाणा), मानेसर (हरियाणा), हंसलपुर (गुजरात), खरखौदा (हरियाणा) में मौजूद हैं। कंपनी आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और हाइब्रिड कारों पर भी बड़ा निवेश करने की तैयारी में है।
फिर शेयर क्यों टूट गए?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी सकारात्मक खबर के बावजूद शेयर में गिरावट क्यों आई? दरअसल सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में डर का माहौल बना रहा।
सुबह के कारोबार में सेंसेक्स एक समय 1000 अंक से ज्यादा टूट गया था। ऐसे माहौल में ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। मारुति सुजुकी के शेयर दोपहर करीब 12 बजे तक 265 रुपये से ज्यादा गिरकर करीब 12,960 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे।
क्या लॉन्ग टर्म में फायदा होगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट टर्म में शेयर बाजार की कमजोरी का असर दिख सकता है, लेकिन लंबी अवधि में खरखौदा प्लांट कंपनी की ग्रोथ को मजबूत कर सकता है।
इसके पीछे कई वजहें हैं:
- बढ़ती SUV डिमांड
- उत्पादन क्षमता में तेजी
- एक्सपोर्ट बढ़ाने की योजना
- नई टेक्नोलॉजी और EV फोकस
- लागत नियंत्रण की संभावना
अगर भारतीय ऑटो सेक्टर की मांग मजबूत बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह प्लांट मारुति की कमाई बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
ऑटो सेक्टर पर भी दबाव
सोमवार को सिर्फ मारुति ही नहीं, बल्कि कई ऑटो शेयरों में गिरावट देखी गई। बढ़ते कच्चे तेल के दाम और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो ऑटो सेक्टर में फिर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
खरखौदा प्लांट की दूसरी यूनिट शुरू होना मारुति सुजुकी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे कंपनी की उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और SUV सेगमेंट में उसकी पकड़ और मजबूत हो सकती है। हालांकि, फिलहाल शेयर बाजार की कमजोरी और वैश्विक दबाव के कारण निवेशकों का मूड खराब दिखाई दे रहा है। लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो यह विस्तार मारुति के भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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