NSE EGRs Trading Live: भारत के गोल्ड मार्केट में बड़ा बदलाव
भारत में सोने में निवेश करने वालों के लिए सोमवार 18 मई 2026 एक बड़ा दिन साबित हुआ। National Stock Exchange यानी NSE ने आधिकारिक तौर पर Electronic Gold Receipts (EGRs) सेगमेंट में लाइव ट्रेडिंग शुरू कर दी है। इसके साथ ही अब निवेशक शेयरों की तरह एक्सचेंज पर डिजिटल गोल्ड खरीद और बेच सकेंगे, जबकि उसके पीछे वास्तविक फिजिकल गोल्ड मौजूद रहेगा।
NSE ने बताया कि 16 मई को इस सिस्टम का मॉक ट्रेडिंग टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी या सिस्टम एरर सामने नहीं आया। इसके बाद सोमवार से लाइव ट्रेडिंग शुरू कर दी गई। यह कदम भारत के पारंपरिक गोल्ड मार्केट को अधिक पारदर्शी, संगठित और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
क्या है Electronic Gold Receipt (EGR)?
Electronic Gold Receipt यानी EGR एक तरह की डिमैट सिक्योरिटी है, जो फिजिकल गोल्ड के मालिकाना हक का डिजिटल प्रमाण होती है। आसान भाषा में समझें तो अगर किसी निवेशक के पास EGR है, तो इसका मतलब है कि उसके नाम पर तय मात्रा में असली सोना SEBI-मान्यता प्राप्त वॉल्ट में सुरक्षित रखा गया है। यह सोना इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में डिपॉजिटरी सिस्टम के जरिए रखा जाता है और निवेशक इसे शेयर बाजार की तरह खरीद-बेच सकते हैं।
NSE के मुताबिक EGR सिस्टम का मकसद भारत के बिखरे हुए गोल्ड मार्केट को एक संगठित प्लेटफॉर्म देना है, जहां गोल्ड की कीमतें पारदर्शी तरीके से तय हों, शुद्धता की गारंटी मिले, ट्रेडिंग आसान हो, निवेशकों को फिजिकल स्टोरेज की चिंता न करनी पड़े
“One Nation, One Price” मॉडल से कैसे बदलेगा गोल्ड मार्केट?
भारत में अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। लोकल टैक्स, ज्वेलर्स मार्जिन और सप्लाई के कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में दाम अलग हो सकते हैं। लेकिन NSE का कहना है कि EGR मॉडल “One Nation, One Price” व्यवस्था को बढ़ावा देगा। यानी एक्सचेंज पर गोल्ड की कीमत बाजार आधारित और अधिक पारदर्शी होगी।
इससे छोटे निवेशकों को फायदा मिल सकता है, गोल्ड ट्रेडिंग अधिक मानकीकृत होगी, नकली या कम शुद्धता वाले सोने की समस्या कम हो सकती है
किन शहरों में शुरू हुए वॉल्ट और कलेक्शन सेंटर?
फिलहाल अहमदाबाद और मुंबई में वॉल्टिंग और कलेक्शन सेंटर चालू हो चुके हैं। वहीं सोमवार से दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी नए सेंटर एक्टिव किए जा रहे हैं। NSE ने कहा है कि आने वाले समय में पूरे देश में लगभग 120 सेंटर बनाए जाएंगे। इससे छोटे शहरों के निवेशकों और कारोबारियों को भी EGR सिस्टम से जोड़ने की योजना है।
EGR में निवेश कैसे करें?
EGR खरीदने के लिए निवेशकों के पास कुछ जरूरी चीजें होनी चाहिए।
1. Demat और Trading Account जरूरी
निवेशक के पास डिमैट अकाउंट और SEBI-रजिस्टर्ड स्टॉकब्रोकर के साथ ट्रेडिंग अकाउंट होना अनिवार्य है।
2. KYC पूरा करना होगा
PAN, Aadhaar, बैंक डिटेल और एड्रेस प्रूफ जैसे दस्तावेज जमा कर KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
3. Broker पर EGR Segment Active होना चाहिए
हर ब्रोकर फिलहाल EGR ट्रेडिंग सपोर्ट नहीं कर रहा है। इसलिए निवेशकों को पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर EGR सेगमेंट एक्टिव है।
कितनी मात्रा में खरीद सकेंगे गोल्ड?
NSE ने EGR को कई denominations में उपलब्ध कराया है ताकि छोटे निवेशक भी इसमें भाग ले सकें। निवेशक इन यूनिट्स में खरीदारी कर सकते हैं 1 किलोग्राम, 100 ग्राम, 10 ग्राम, 1 ग्राम, 100 मिलीग्राम यानी अब बहुत कम रकम से भी एक्सचेंज आधारित गोल्ड निवेश संभव होगा।
क्या EGR को फिजिकल गोल्ड में बदल सकते हैं?
हाँ। NSE के मुताबिक EGR को तय प्रक्रिया के तहत फिजिकल गोल्ड में बदला जा सकता है। यानी निवेशक चाहें तो बाद में वास्तविक सोना भी प्राप्त कर सकते हैं। एक्सचेंज ने हाल ही में 1,000 ग्राम गोल्ड बार के सफल dematerialisation का उदाहरण भी दिया, जिसे इस सिस्टम की operational readiness माना जा रहा है।
निवेशकों को क्या फायदे मिल सकते हैं?
1. शुद्धता की गारंटी
सोना SEBI-मान्यता प्राप्त वॉल्ट में रखा जाएगा, जिससे गुणवत्ता को लेकर भरोसा बढ़ेगा।
2. सुरक्षित होल्डिंग
घर में सोना रखने का जोखिम कम होगा क्योंकि होल्डिंग डिमैट फॉर्म में रहेगी।
3. बेहतर Liquidity
शेयरों की तरह बाजार में खरीद-बिक्री संभव होगी।
4. Portfolio Diversification
निवेशक अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड एक्सपोजर जोड़ सकेंगे।
5. Settlement Guarantee
एक्सचेंज आधारित सिस्टम होने के कारण सेटलमेंट अधिक संगठित और सुरक्षित माना जा रहा है।
क्या EGR Gold ETF और Digital Gold से अलग है?
हाँ, EGR का मॉडल Gold ETF और ऐप आधारित डिजिटल गोल्ड दोनों से अलग है।
| विकल्प | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| Gold ETF | फंड आधारित निवेश |
| Digital Gold | प्राइवेट प्लेटफॉर्म आधारित |
| EGR | एक्सचेंज ट्रेडेड और फिजिकल गोल्ड बैक्ड |
EGR में underlying asset वास्तविक सोना होता है, जो regulated vaults में रखा जाता है।
क्या छोटे निवेशकों के लिए सही विकल्प बन सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि EGR सिस्टम में liquidity बढ़ती है और brokerage platforms इसे व्यापक रूप से सपोर्ट करते हैं, तो यह भारत में गोल्ड निवेश का लोकप्रिय माध्यम बन सकता है। हालांकि शुरुआती चरण में ट्रेडिंग वॉल्यूम, spread और investor awareness बड़ी भूमिका निभाएंगे। भारत में गोल्ड सिर्फ निवेश नहीं बल्कि सांस्कृतिक और पारिवारिक संपत्ति का भी हिस्सा है। ऐसे में NSE का यह कदम traditional gold buying और modern financial markets के बीच एक नया पुल बना सकता है।
क्या ध्यान रखना चाहिए?
हालांकि EGR सिस्टम regulated framework में काम करेगा, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है गोल्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहेगा, Brokerage और अन्य charges लागू हो सकते हैं, Liquidity शुरुआती समय में सीमित रह सकती है, निवेश से पहले product structure समझना जरूरी है
निष्कर्ष
NSE द्वारा Electronic Gold Receipts की लाइव ट्रेडिंग शुरू होना भारत के गोल्ड मार्केट के formalisation की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे गोल्ड ट्रेडिंग अधिक पारदर्शी और टेक्नोलॉजी आधारित हो सकती है।
यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारत में फिजिकल गोल्ड खरीदने का तरीका तेजी से बदल सकता है और निवेशकों को शेयर बाजार जैसी सुविधा के साथ regulated digital gold ownership का नया विकल्प मिल सकता है।
Disclaimer: NewsJagran केवल जानकारी के उद्देश्य से यह खबर प्रकाशित करता है। यह निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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