Lenskart Solutions Block Deal: लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में एक बड़ा ब्लॉक डील होने की खबर है। SoftBank Vision Fund II से जुड़ी SVF II Lightbulb (Cayman) Ltd कंपनी में करीब 2.6% हिस्सेदारी बेच सकती है। इस डील की वैल्यू करीब 30 करोड़ डॉलर यानी लगभग ₹2,700-2,800 करोड़ बताई जा रही है। ट्रांजेक्शन के लिए ₹635 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है।
पीयूष बंसल की कंपनी Lenskart Solutions के शेयरों में सोमवार, 24 अगस्त को ब्लॉक डील की खबर के चलते तेज हलचल देखने को मिल सकती है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया है कि SoftBank Vision Fund (SVF) II Lightbulb Cayman लेंसकार्ट में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने की तैयारी में है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस ब्लॉक डील में करीब 30 करोड़ डॉलर के शेयर बिक सकते हैं। इसके लिए फ्लोर प्राइस ₹635 प्रति शेयर रखा गया है। मौजूदा भाव के मुकाबले यह कीमत कम है, इसलिए डील के बाद बाजार में शेयर पर दबाव देखने को मिल सकता है। शेयर बेचने वाले निवेशक के लिए बाकी हिस्सेदारी पर 45 दिन का लॉक-अप पीरियड भी रहेगा।
Lenskart में SoftBank की कितनी हिस्सेदारी?
जून 2026 तिमाही के अंत तक लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 17.53% थी, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 82.05% हिस्सेदारी थी।
स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, SVF II Lightbulb (Cayman) Ltd के पास लेंसकार्ट में करीब 9.86% हिस्सेदारी थी। ऐसे में अगर करीब 2.6% हिस्सेदारी की बिक्री होती है, तो कंपनी में SoftBank से जुड़े इस निवेशक की हिस्सेदारी में अच्छी-खासी कमी आएगी।
BSE पर लेंसकार्ट सॉल्यूशंस का शेयर हाल में ₹661.55 के भाव पर था। इसके मुकाबले ₹635 का ब्लॉक डील फ्लोर प्राइस करीब 4% नीचे बैठता है।
2026 में अब तक 50% चढ़ चुका है शेयर
लेंसकार्ट सॉल्यूशंस का मार्केट कैप करीब ₹1.15 लाख करोड़ है। कंपनी ने 10 नवंबर 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। कंपनी का IPO करीब ₹7,278.02 करोड़ का था।
लिस्टिंग के बाद शेयर में काफी तेजी देखने को मिली है। 2026 में अब तक लेंसकार्ट का शेयर करीब 50% मजबूत हुआ है, जबकि पिछले तीन महीनों में इसकी कीमत करीब 32% बढ़ी है।
हाल ही में लेंसकार्ट सॉल्यूशंस को MSCI India Index में भी शामिल किया गया है। इसके साथ Laurus Labs, Adani Energy Solutions और Groww की पैरेंट कंपनी BillionBrance Garage Ventures को भी इंडेक्स में जगह मिली है।
जून तिमाही में मुनाफा 269% बढ़ा
लेंसकार्ट ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 269.24% बढ़कर ₹221.84 करोड़ हो गया।
इस दौरान ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 43.3% बढ़कर ₹2,714.18 करोड़ रहा। भारत से कंपनी का रेवेन्यू 30.7% बढ़कर करीब ₹1,531 करोड़ पहुंच गया। वहीं, इंटरनेशनल कारोबार से रेवेन्यू सालाना आधार पर 38% बढ़कर करीब ₹1,203 करोड़ रहा।
कंपनी ने जून तिमाही में 132 नए स्टोर भी खोले। इसके साथ लेंसकार्ट के एक्टिव स्टोर्स की कुल संख्या बढ़कर 3,459 हो गई।
हालांकि, तेजी से विस्तार के चलते कंपनी का खर्च भी बढ़ा। जून 2026 तिमाही में कुल खर्च करीब ₹2,483.52 करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह ₹1,836.58 करोड़ था।
Lenskart शेयर पर क्या है ब्रोकरेज की राय?
लेंसकार्ट को कवर करने वाले 21 एनालिस्ट्स में से 17 ने Buy, 3 ने Hold और एक एनालिस्ट ने Sell रेटिंग दी है।
Jefferies ने लेंसकार्ट पर Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹680 प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के लिए मांग के बजाय सप्लाई प्रमुख बाधा बनी हुई है।
वहीं, Citi ने लेंसकार्ट पर Neutral रेटिंग बरकरार रखी है और ₹650 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी के मार्जिन को बेहतर एवरेज सेलिंग प्राइस, प्रोडक्ट मिक्स में सुधार, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेटिंग लेवरेज से फायदा मिल रहा है।
Citi को उम्मीद है कि लेंसकार्ट की ग्रोथ आगे भी मजबूत रह सकती है। स्टोर नेटवर्क में विस्तार और नए ग्राहकों को जोड़ने से कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है।
HSBC ने भी स्टॉक पर Hold रेटिंग कायम रखी है और ₹575 प्रति शेयर का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 के लिए कंपनी के EBITDA अनुमान में क्रमशः 6% और 5% की बढ़ोतरी की है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
लेंसकार्ट के शेयर में मजबूत तेजी के बीच संभावित ब्लॉक डील शॉर्ट टर्म में शेयर की कीमत को प्रभावित कर सकती है। ₹635 का फ्लोर प्राइस मौजूदा बाजार भाव से नीचे है, इसलिए सोमवार को ट्रेडिंग के दौरान शेयर में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
हालांकि, कंपनी की मजबूत तिमाही ग्रोथ, स्टोर विस्तार और ब्रोकरेज की राय को देखते हुए लॉन्ग टर्म तस्वीर अलग हो सकती है। निवेशकों को ब्लॉक डील के अंतिम आकार, बिक्री के बाद शेयरहोल्डिंग में बदलाव और कंपनी के आगामी वित्तीय प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए।
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