Khagantak-243: भारतीय वायु सेना (IAF) ने स्वदेशी रूप से विकसित किए गए लंबी दूरी के ग्लाइड बम खगांतक-243 का सफल ड्रॉप ट्रायल किया है। करीब 300 किलोग्राम वर्ग का यह स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन-गाइडेड हथियार लगभग 140 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम बताया गया है। इस परीक्षण को भारत की स्वदेशी सटीक स्ट्राइक क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारतीय वायु सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि परीक्षण के दौरान हथियार ने अपने निर्धारित सभी लक्ष्यों को हासिल किया। IAF ने इस उपलब्धि को वायु सेना और भारतीय रक्षा उद्योग दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है।
140 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला करने की क्षमता
Precision. Power. Pride.
A significant milestone for the #IAF and Indian Industry. The Indian Air Force successfully conducted the drop of an indigenously designed & developed Long Range Glide Bomb (Khagantak-243). The Trials met all objectives scaling new peaks of lethality… pic.twitter.com/VWZEp89zL0
— Indian Air Force (@IAF_MCC) September 2, 2026 खगांतक-243 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे लड़ाकू विमान से लक्ष्य क्षेत्र से काफी दूरी पर रिलीज किया जा सके। इसके बाद यह पारंपरिक फ्री-फॉल बम की तरह सीधे नीचे गिरने के बजाय अपने ग्लाइड और गाइडेंस सिस्टम की मदद से लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 12,000 मीटर की ऊंचाई से रिलीज किए जाने पर यह ग्लाइड बम 140 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को निशाना बना सकता है। स्टैंड-ऑफ हथियार होने के कारण इसका एक बड़ा फायदा यह है कि लड़ाकू विमान को लक्ष्य के बिल्कुल ऊपर जाकर हमला करने की जरूरत नहीं पड़ती।
यानी विमान अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी से हथियार रिलीज कर सकता है और बम अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है।
क्या है Khagantak-243?
खगांतक-243 एक एयरबॉर्न लॉन्ग-रेंज स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम है। यह करीब 300 किलोग्राम वर्ग का हथियार है, जिसे लड़ाकू विमानों से इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया है।
इसमें गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं, जो हथियार को रिलीज किए जाने के बाद निर्धारित लक्ष्य की दिशा में ले जाने में मदद करते हैं। इसकी डिजाइन का उद्देश्य भारतीय वायु सेना को लंबी दूरी से सटीक हमला करने की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराना है।
यह हथियार Mk 81 जनरल-पर्पज ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वारहेड से लैस है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें करीब 125 किलोग्राम विस्फोटक मौजूद है।
BEL और JSR Dynamics ने मिलकर किया विकसित
खगांतक-243 को भारतीय रक्षा क्षेत्र की कंपनियों Bharat Electronics Limited (BEL) और JSR Dynamics ने मिलकर विकसित किया है।
इस प्रोजेक्ट में दोनों कंपनियों की अलग-अलग भूमिका रही है। JSR Dynamics ने हथियार की बॉडी और कंट्रोल सिस्टम से जुड़े हिस्सों की आपूर्ति की है, जबकि BEL ने इसके इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सब-सिस्टम पर काम किया है।
भारतीय वायु सेना की ओर से इस हथियार के लिए BEL को पहले ही ऑर्डर दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस सौदे की कुल कीमत और ऑर्डर किए गए हथियारों की संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
Su-30MKI से किया गया ड्रॉप टेस्ट
खगांतक-243 के शुरुआती उड़ान परीक्षणों के लिए भारतीय वायु सेना के Su-30MKI लड़ाकू विमान को प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल किया गया है।
Su-30MKI भारतीय वायु सेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है और इसे अलग-अलग स्वदेशी हथियार प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जा रहा है। भविष्य में खगांतक-243 को अन्य लड़ाकू विमानों के साथ भी इंटीग्रेट करने की संभावना पर काम किया जा सकता है।
IAF के लिए क्यों अहम है यह सफलता?
इस परीक्षण की सबसे बड़ी अहमियत इसकी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता में है। आम तौर पर स्टैंड-ऑफ हथियारों का मकसद यह होता है कि लड़ाकू विमान दुश्मन के मजबूत हवाई सुरक्षा क्षेत्र में प्रवेश किए बिना लंबी दूरी से लक्ष्य पर हमला कर सके।
खगांतक-243 की लंबी दूरी और प्रिसिजन गाइडेंस क्षमता भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे मिशनों में एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकती है।
इसके अलावा, स्वदेशी हथियार के विकास से भारत की रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
खगांतक-243 का सफल परीक्षण भारत के बढ़ते घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी दिखाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने स्वदेशी मिसाइलों, बमों, रडार और अन्य हथियार प्रणालियों के विकास पर जोर बढ़ाया है।
IAF के मुताबिक, यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और डिफेंस इनोवेशन से जुड़ी पहलों को भी मजबूती देती है।
हालांकि, किसी हथियार की वास्तविक ऑपरेशनल क्षमता केवल एक सफल ड्रॉप टेस्ट से तय नहीं होती। इसके लिए आगे भी कई परीक्षण, अलग-अलग परिस्थितियों में वैलिडेशन और संबंधित लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेशन जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
फिलहाल खगांतक-243 का सफल ड्रॉप ट्रायल भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमताओं के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


