नई दिल्ली: क्या शेयर बाजार से करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाने के बाद भी इनकम टैक्स से पूरी तरह राहत मिल सकती है? सामान्य परिस्थितियों में इसका जवाब ‘नहीं’ होगा, लेकिन एक खास मामले में इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT), कोलकाता ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने टैक्सपेयर्स और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
कोलकाता की रहने वाली सरोज गोयनका, जो इमामी समूह के प्रमोटर परिवार से जुड़ी हैं, ने शेयर बेचकर करीब ₹26.77 करोड़ का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कमाया। इसके बाद उन्होंने इस राशि का इस्तेमाल नया आवासीय बंगला बनाने में किया। आयकर विभाग ने उनकी टैक्स छूट को खारिज करते हुए करोड़ों रुपये की टैक्स डिमांड जारी कर दी, लेकिन ITAT ने सभी प्रमुख आपत्तियों को खारिज करते हुए महिला के पक्ष में फैसला सुनाया।
Highlights
- शेयर बेचकर करीब ₹26.77 करोड़ का LTCG हुआ।
- पूरी राशि नए आवासीय बंगले के निर्माण में निवेश की गई।
- आयकर विभाग ने ₹3 करोड़ से अधिक की टैक्स डिमांड जारी की।
- ITAT ने धारा 54F के तहत टैक्स छूट को सही माना।
- ट्रिब्यूनल ने विभाग की तीनों प्रमुख आपत्तियां खारिज कर दीं।
- हालांकि अब बजट 2023 के बाद धारा 54F के नियम बदल चुके हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 2020 का है। सरोज गोयनका ने अपनी कंपनी के लगभग 36 लाख शेयर करीब ₹33.77 करोड़ में बेचे। इस लेनदेन से उन्हें ₹26.77 करोड़ का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन हुआ।
इतने बड़े मुनाफे पर सामान्य रूप से भारी टैक्स बनता है। लेकिन उन्होंने इस रकम का उपयोग कोलकाता के प्रतिष्ठित क्वींस पार्क इलाके में नया आवासीय बंगला बनाने में किया।
बंगले का निर्माण जून 2022 में पूरा हो गया, जो शेयर बिक्री के तीन वर्ष के भीतर था। इसी आधार पर उन्होंने आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत पूरी टैक्स छूट का दावा किया।
आयकर विभाग ने क्यों भेजा टैक्स नोटिस?
आयकर अधिकारी (AO) ने महिला के दावे को स्वीकार नहीं किया और ₹3 करोड़ से अधिक की टैक्स डिमांड जारी कर दी। विभाग ने तीन प्रमुख आधारों पर छूट देने से इनकार किया।
1. पहले से दो संपत्तियां होने का आरोप
विभाग का कहना था कि महिला के पास पहले से दो संपत्तियां थीं, इसलिए वह धारा 54F की पात्र नहीं हैं।
ITAT ने क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि:
- पहली संपत्ति खाली औद्योगिक भूमि थी, आवासीय मकान नहीं।
- दूसरी संपत्ति में महिला केवल संयुक्त स्वामित्व (Joint Ownership) रखती थीं।
ITAT ने स्पष्ट किया कि संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति या गैर-आवासीय संपत्ति होने से धारा 54F का लाभ स्वतः समाप्त नहीं हो जाता।
2. निर्माण पहले शुरू होने पर विभाग की आपत्ति
आयकर विभाग ने कहा कि बंगले का निर्माण शेयर बेचने से पहले शुरू हो चुका था, इसलिए छूट नहीं मिलनी चाहिए।
ITAT का फैसला
ट्रिब्यूनल ने कहा कि कानून में कहीं भी यह शर्त नहीं है कि निर्माण कार्य शेयर बेचने के बाद ही शुरू होना चाहिए।
धारा 54F केवल यह कहती है कि:
- निर्माण शेयर बिक्री की तारीख से तीन वर्ष के भीतर पूरा होना चाहिए।
यदि यह शर्त पूरी होती है, तो केवल निर्माण पहले शुरू होने के आधार पर छूट नहीं रोकी जा सकती।
3. पैसा सीधे निर्माण में नहीं लगाया गया
विभाग की तीसरी दलील थी कि शेयर बेचने से प्राप्त रकम सीधे निर्माण खाते या बिल भुगतान में उपयोग नहीं की गई।
ITAT ने क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि:
- कानून One-to-One Fund Tracking की मांग नहीं करता।
- आवश्यक केवल इतना है कि करदाता ने पूंजीगत लाभ के बराबर या उससे अधिक राशि नए आवासीय घर में निवेश की हो।
यानी यदि कुल निवेश आवश्यक राशि के बराबर है, तो केवल बैंक खाते के फ्लो के आधार पर टैक्स छूट से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है आयकर अधिनियम की धारा 54F?
धारा 54F उन करदाताओं को राहत देती है जो किसी दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्ति (Long-Term Capital Asset) को बेचते हैं, जैसे:
- शेयर
- म्यूचुअल फंड
- गोल्ड
- बॉन्ड
- अन्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट
यदि बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ का निवेश नया आवासीय घर खरीदने या बनवाने में किया जाता है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार टैक्स छूट मिल सकती है।
धारा 54F की प्रमुख शर्तें
- नया घर बिक्री से 1 वर्ष पहले खरीदा जा सकता है।
- या बिक्री के 2 वर्ष के भीतर खरीदा जा सकता है।
- या बिक्री के 3 वर्ष के भीतर नया घर बनवाया जा सकता है।
- अन्य निर्धारित कानूनी शर्तों का पालन भी आवश्यक होता है।
बजट 2023 के बाद क्या बदल गया?
यह मामला वर्ष 2020 का था, इसलिए उस समय पुराने नियम लागू थे।
लेकिन बजट 2023 के बाद सरकार ने धारा 54F में महत्वपूर्ण संशोधन किया।
अब:
- धारा 54F के तहत अधिकतम टैक्स छूट ₹10 करोड़ तक ही सीमित है।
- यदि पूंजीगत लाभ इससे अधिक है, तो अतिरिक्त राशि पर टैक्स देय होगा।
इसलिए आज यदि किसी निवेशक को ₹20 करोड़, ₹30 करोड़ या उससे अधिक का पूंजीगत लाभ होता है, तो पूरी राशि पर पहले जैसी असीमित छूट उपलब्ध नहीं होगी।
निवेशकों के लिए क्या सीख?
यह फैसला बताता है कि टैक्स कानूनों की व्याख्या केवल तकनीकी आधार पर नहीं बल्कि कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाती है।
इस मामले से तीन महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं:
- संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति हमेशा धारा 54F का लाभ खत्म नहीं करती।
- निर्माण पहले शुरू होने से स्वतः छूट समाप्त नहीं होती, यदि समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा हो जाए।
- निवेश की राशि महत्वपूर्ण है, न कि हर रुपये की बैंकिंग ट्रेल।
हालांकि, प्रत्येक टैक्स मामला अपने तथ्यों और दस्तावेजों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी बड़े निवेश या टैक्स प्लानिंग से पहले योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।


