नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर भारत के सरकारी खजाने पर भी पड़ा। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कुछ नरम हुए हैं, लेकिन सरकार राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में सरकार कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है।
HighLights
- सरकार ने 8 कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की तैयारी तेज की
- एलआईसी और हिंदुस्तान जिंक समेत कई कंपनियां सूची में शामिल
- FY27 में एसेट सेल से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य
- आईडीबीआई बैंक की बिक्री प्रक्रिया में भी बदलाव पर विचार
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने ऐसी 8 कंपनियों की पहचान की है, जिनमें अगले कुछ महीनों के दौरान हिस्सेदारी बिक्री (Stake Sale) की जा सकती है। इसके लिए निवेश बैंकरों के साथ लगातार बैठकें भी चल रही हैं।
इन कंपनियों में हिस्सेदारी बेच सकती है सरकार
रिपोर्ट के मुताबिक संभावित सूची में शामिल प्रमुख कंपनियां हैं:
- एलआईसी (LIC)
- हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड
- कुछ सरकारी बैंक
- अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, जिनके नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, एलआईसी में हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को करीब 10,000 करोड़ रुपये (100 अरब रुपये) तक मिल सकते हैं। वहीं हिंदुस्तान जिंक में स्टेक सेल से करीब 5,000 करोड़ रुपये (50 अरब रुपये) जुटाए जा सकते हैं।
सरकार का क्या है लक्ष्य?
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 80,000 करोड़ रुपये (800 अरब रुपये) की एसेट बिक्री का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य के तहत सरकार सार्वजनिक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर राजस्व जुटाना चाहती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के दौरान सरकार शेयर बिक्री के जरिए करीब 2 अरब डॉलर की राशि जुटा चुकी है। अब अगले चरण में बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की योजना बनाई जा रही है।
निवेश बैंकरों के साथ चल रही बैठकें
सूत्रों के मुताबिक सरकारी अधिकारी हर सप्ताह निवेश बैंकरों के साथ बैठक कर रहे हैं। इन बैठकों में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हो रही है, जैसे:
- निवेशकों की मांग का आकलन
- हिस्सेदारी बिक्री का सही समय
- शेयरों की उचित कीमत तय करना
- अलग-अलग कंपनियों के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) की रणनीति
सरकार अन्य सरकारी कंपनियों में भी हिस्सेदारी बिक्री की संभावनाएं तलाश रही है और इसके लिए कई निवेश बैंकरों की सेवाएं ली गई हैं।
आईडीबीआई बैंक की बिक्री पर भी नया विचार
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए:
- नई बोलियां आमंत्रित करने पर विचार किया जा रहा है।
- रिजर्व प्राइस में कमी की संभावना भी देखी जा रही है।
- इससे अधिक निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश होगी।
हालांकि इस पूरे मामले पर वित्त मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को क्या फायदा होगा?
सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने से सरकार को कई तरह के फायदे मिलते हैं।
- राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त धन मिलता है।
- कंपनियों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ती है, जिससे बाजार में उनकी लिक्विडिटी बेहतर होती है।
- सरकार को बिना नया टैक्स लगाए राजस्व जुटाने का विकल्प मिलता है।
क्या निवेशकों पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिस्सेदारी बिक्री सही मूल्यांकन और उचित समय पर की जाती है तो इसका बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ता। हालांकि बड़ी हिस्सेदारी बिक्री के दौरान संबंधित शेयरों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एलआईसी, हिंदुस्तान जिंक और सरकारी बैंकों जैसे बड़े शेयरों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा और हिस्सेदारी बिक्री की समय-सीमा सामने आने के बाद बाजार की प्रतिक्रिया अधिक स्पष्ट होगी.


