Indian Economy: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर SBI रिसर्च की रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बावजूद भारत की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। मजबूत बैंकिंग सेक्टर, बढ़ती क्रेडिट डिमांड, डिपॉजिट में तेजी, विदेशी मुद्रा का बढ़ता प्रवाह और बेहतर मॉनसून जैसे कई फैक्टर इकोनॉमी को मजबूती दे रहे हैं।
नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर SBI रिसर्च ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक खास रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का विस्तृत आकलन किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आगे भी इसकी रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद है।
SBI रिसर्च के मुताबिक, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक था, है और आगे भी रहेगा। रिपोर्ट में मजबूत आर्थिक वृद्धि, बैंकिंग सेक्टर की बेहतर स्थिति, क्रेडिट और डिपॉजिट में बढ़ोतरी, कॉर्पोरेट प्रदर्शन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार को अहम ताकत बताया गया है।
8% रह सकती है रियल GDP ग्रोथ
SBI रिसर्च ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, अर्थव्यवस्था में कर्ज की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
31 जुलाई को समाप्त पखवाड़े के दौरान बैंक क्रेडिट ग्रोथ 19.3 फीसदी रही। वहीं, बैंक डिपॉजिट की वृद्धि दर बढ़कर 15.4 फीसदी हो गई। यह आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में आर्थिक गतिविधियां और फंड की मांग दोनों मजबूत बनी हुई हैं।
विदेशी मुद्रा का बढ़ता प्रवाह भी बड़ी ताकत
SBI रिसर्च ने विदेशी मुद्रा के बढ़ते प्रवाह को भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। रिपोर्ट में विशेष FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने की स्कीम का उल्लेख करते हुए कहा गया कि 13 अगस्त तक इसके जरिए 52.3 अरब डॉलर जुटाए जा चुके थे।
अगर फॉरेन करेंसी बॉन्ड और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग को भी शामिल किया जाए तो कुल रकम 56.8 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।
SBI रिसर्च का अनुमान है कि स्कीम की अवधि समाप्त होने तक FCNR(B) के तहत जुटाई गई रकम 65-70 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। वहीं, OFCBs और ECBs को मिलाकर कुल रकम 80-85 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, RBI ने 7 अगस्त तक करीब 31 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा संपत्ति दोबारा हासिल कर ली थी। इससे देश के फॉरेन एक्सचेंज बफर और बाहरी वित्तीय स्थिति को भी मजबूती मिलती है।
डिपॉजिट बढ़ने से सरकारी बॉन्ड मार्केट को भी सहारा
SBI रिसर्च के मुताबिक, बैंकिंग सिस्टम में मजबूत डिपॉजिट और विदेशी मुद्रा फंडिंग की स्थिति सरकारी सिक्योरिटीज मार्केट के लिए भी सकारात्मक हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 3-7 साल की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड सेगमेंट को सप्लाई के दबाव में कमी और मैच्योरिटी मैचिंग से सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके बाद 7-10 साल की अवधि वाले सेगमेंट को भी फायदा मिल सकता है।
रिपोर्ट में RBI और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के रुख में संभावित बदलाव की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।
कॉर्पोरेट सेक्टर का प्रदर्शन भी मजबूत
भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन को भी SBI रिसर्च ने अर्थव्यवस्था की मजबूती का अहम संकेत माना है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2,257 लिस्टेड नॉन-BFSI कंपनियों की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में नेट सेल्स में 24 फीसदी, EBITDA में 9 फीसदी और टैक्स के बाद मुनाफे में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों की बिक्री और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस में मजबूती बनी हुई है। हालांकि मुनाफे की वृद्धि बिक्री की तुलना में कम रही, फिर भी कॉर्पोरेट सेक्टर का प्रदर्शन आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
मॉनसून में सुधार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा
भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती में ग्रामीण क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। SBI रिसर्च ने मॉनसून की स्थिति में सुधार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून में बारिश में बड़ी कमी देखने को मिली थी, लेकिन जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश हुई और अगस्त में भी बारिश की स्थिति सामान्य रही। इसके परिणामस्वरूप देशभर में मॉनसून की कमी घटकर करीब 13 फीसदी रह गई।
वहीं, खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल के स्तर से केवल 2 फीसदी कम रही। SBI रिसर्च के मुताबिक, यह स्थिति देश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है।
ज्यादा कमाई वाले टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़ी
टैक्स कलेक्शन और व्यक्तिगत आय के आंकड़ों को भी रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था की मजबूती से जोड़कर देखा गया है।
असेसमेंट ईयर 2026 में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक आय वाले टैक्सपेयर्स की संख्या 39 फीसदी बढ़कर 576 हो गई। वहीं, 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक कमाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या 14 फीसदी बढ़कर 5.36 लाख हो गई।
SBI रिसर्च के मुताबिक, ज्यादा आय वाले टैक्सपेयर्स की संख्या में बढ़ोतरी देश में आय के स्तर और औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार से जुड़े सकारात्मक संकेत देती है।
आगे भी टिकाऊ ग्रोथ के लिए क्या जरूरी?
SBI रिसर्च ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती की सराहना करते हुए यह भी कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भरोसेमंद और टिकाऊ मैक्रो-इकोनॉमिक सिस्टम को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, मजबूत बैंकिंग सिस्टम, बढ़ती क्रेडिट डिमांड, डिपॉजिट में तेजी, विदेशी मुद्रा का प्रवाह, कॉर्पोरेट सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन और मॉनसून की सुधरती स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। SBI रिसर्च का आकलन है कि इन फैक्टर्स के दम पर भारत आने वाले समय में भी दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सकता है।


