Toy Industry Updates: कभी सस्ते विदेशी खिलौनों पर निर्भर रहने वाला भारत अब वैश्विक खिलौना बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। पिछले सात वर्षों में भारतीय खिलौना उद्योग ने जबरदस्त बदलाव देखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के खिलौनों के निर्यात (Toy Export) में 89.1% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि खिलौनों के आयात (Toy Import) में 37.5% की कमी आई है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और गुणवत्ता सुधार से जुड़ी नीतियों के चलते भारत अब अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड्स समेत कई विकसित देशों को बड़े पैमाने पर खिलौने निर्यात कर रहा है।
लोकसभा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लिखित उत्तर में बताया कि सरकार की विभिन्न नीतियों, गुणवत्ता नियंत्रण और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों से भारत का खिलौना उद्योग नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है।
7 साल में पूरी तरह बदल गई भारतीय खिलौना उद्योग की तस्वीर
ट्रेडस्टैट के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में भारत ने दुनिया भर से 371.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर के खिलौने आयात किए थे। वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 232.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
दूसरी ओर, भारतीय खिलौनों का निर्यात 203.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 384.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो करीब 89.1% की वृद्धि को दर्शाता है।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल घरेलू मांग पूरी नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
| विवरण | 2018-19 | 2025-26 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| खिलौना आयात | 371.7 मिलियन डॉलर | 232.3 मिलियन डॉलर | 37.5% की कमी |
| खिलौना निर्यात | 203.5 मिलियन डॉलर | 384.7 मिलियन डॉलर | 89.1% की वृद्धि |
गुणवत्ता और सुरक्षा में आया बड़ा सुधार
कुछ साल पहले तक भारतीय बाजार में बिकने वाले कई आयातित खिलौनों की गुणवत्ता पर सवाल उठते थे। वर्ष 2019 में हुए एक मिस्ट्री शॉपिंग सर्वे में पाया गया था कि बाजार में उपलब्ध केवल 33% खिलौने ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते थे।
सरकार द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) लागू करने और BIS प्रमाणन को अनिवार्य बनाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई।
अब 2025 के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में बिकने वाले 95% खिलौने निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं।
दुनिया भर के खरीदारों ने दिखाई भारतीय खिलौनों में दिलचस्पी
4 से 7 जुलाई 2026 के दौरान नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 17वीं Toy Biz International B2B Exhibition भारतीय खिलौना उद्योग के लिए बड़ा अवसर साबित हुई।
इस आयोजन में शामिल हुए—
- 400 भारतीय खिलौना ब्रांड
- 40 से अधिक देशों के 100 अंतरराष्ट्रीय खरीदार
- करीब 30,000 बिजनेस विजिटर्स
इस प्रदर्शनी के माध्यम से भारतीय कंपनियों को वैश्विक वितरकों, थोक विक्रेताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ व्यापार बढ़ाने का अवसर मिला।
सरकार की नीतियों ने बदली तस्वीर
हालांकि भारत के पास अभी कोई अलग राष्ट्रीय खिलौना नीति (Toy Policy) नहीं है, लेकिन कई मंत्रालयों के संयुक्त प्रयासों ने इस उद्योग को नई दिशा दी है।
सरकार ने 14 मंत्रालयों के सहयोग से National Action Plan for Toys (NAPT) तैयार किया, जिसमें 21 प्रमुख कार्य बिंदुओं पर काम किया गया।
इन पहलों में शामिल हैं—
- भारतीय संस्कृति और परंपरा पर आधारित खिलौनों को बढ़ावा
- स्थानीय खिलौना क्लस्टरों का विकास
- डिजाइन और नवाचार को प्रोत्साहन
- घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाना
आयात शुल्क बढ़ाकर घरेलू उद्योग को मिला संरक्षण
सरकार ने विदेशी खिलौनों पर निर्भरता कम करने के लिए सीमा शुल्क (Custom Duty) में भी बड़ा बदलाव किया।
- फरवरी 2020 में बेसिक कस्टम ड्यूटी 20% से बढ़ाकर 60% की गई।
- वर्ष 2023 में इसे बढ़ाकर 70% कर दिया गया।
- बजट 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के कुछ कलपुर्जों पर शुल्क संरचना में संशोधन किया गया।
इसके अलावा 1 जनवरी 2021 से Quality Control Order (QCO) लागू किया गया।
अब तक BIS ने—
- 1800 से अधिक घरेलू निर्माताओं को लाइसेंस जारी किए हैं।
- 50 से अधिक विदेशी कंपनियों को भी प्रमाणन दिया गया है।
नई शिक्षा नीति ने भी बढ़ाई स्वदेशी खिलौनों की मांग
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत NCERT ने Toy Based Pedagogy को बढ़ावा दिया है।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाना है, जिसमें भारतीय खिलौनों का उपयोग किया जा रहा है।
इसके साथ ही—
- MSME मंत्रालय की SFURTI योजना के तहत 18 खिलौना क्लस्टर स्वीकृत किए गए।
- वस्त्र मंत्रालय 40 क्लस्टरों को डिजाइन और टूलिंग सहायता दे रहा है।
- DPIIT ने 700 से अधिक Toy Startups को मान्यता दी है।
- RoDTEP योजना के माध्यम से 2200 से अधिक निर्यातकों को लाभ मिला है।
मुक्त व्यापार समझौतों से मिला बड़ा फायदा
भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) ने भी खिलौना उद्योग को नई ताकत दी है।
इन देशों के साथ हुए समझौतों से भारतीय खिलौनों को कई बाजारों में शून्य या कम शुल्क पर पहुंच मिली है—
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- ऑस्ट्रेलिया
- EFTA देश
- ओमान
- न्यूजीलैंड
- यूनाइटेड किंगडम (UK)
इससे भारतीय खिलौना कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है और नए निर्यात बाजार खुले हैं।
भारत बन रहा है वैश्विक टॉय मैन्युफैक्चरिंग हब
सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं, गुणवत्ता नियंत्रण, घरेलू विनिर्माण में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच ने भारत को खिलौना उद्योग में नई पहचान दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से निवेश, नवाचार और निर्यात बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के प्रमुख Toy Manufacturing Hub के रूप में उभर सकता है।


