नई दिल्ली: भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते पिछले एक साल में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। दोनों देशों के बीच 120 से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) समझौते हुए हैं, जिन्होंने निवेश, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री के अनुसार, पिछले वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी में उल्लेखनीय तेजी आई है। इन समझौतों से भारत में बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार सृजन और अत्याधुनिक तकनीक के हस्तांतरण की उम्मीद है।
भारत-जापान के बीच क्यों बढ़ रही है साझेदारी?
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि जापान उन्नत तकनीक, पूंजी और उच्च गुणवत्ता वाली मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाता है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करती है।
भारत को जापान से पूंजी, तकनीक और आधुनिक उत्पादन प्रणाली मिल रही है, वहीं जापानी कंपनियों को भारत का विशाल बाजार, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित होता औद्योगिक इकोसिस्टम आकर्षित कर रहा है।
पिछले एक साल की प्रमुख भारत-जापान बिजनेस डील्स
1. सुजुकी का नया प्लांट
मारुति सुजुकी की मूल कंपनी सुजुकी भारत में नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण करेगी।
- निवेश: 5,000 करोड़ रुपये
2. डाइकिन का नया R&D सेंटर
एयर कंडीशनिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डाइकिन हरियाणा में नया रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करेगी।
- निवेश: 1,000 करोड़ रुपये
3. सुमितोमो कॉर्पोरेशन-हरियाणा सरकार समझौता
सुमितोमो कॉर्पोरेशन और हरियाणा सरकार के बीच व्यापक औद्योगिक सहयोग पर सहमति बनी।
- निवेश: 3,800 करोड़ रुपये
4. सुमितोमो की ग्रीन एनर्जी परियोजना
सुमितोमो कॉर्पोरेशन भारत की एक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी के साथ स्वच्छ ऊर्जा परियोजना विकसित करेगी।
- निवेश: 10,000 करोड़ रुपये
5. कांडला में ग्रीन अमोनिया प्लांट
इतोचू कॉर्पोरेशन और एलएंडटी गुजरात के कांडला में 3 लाख टन क्षमता वाला ग्रीन अमोनिया प्लांट स्थापित करेंगे।
- निवेश: 18,900 करोड़ रुपये
6. आईएचआई और एसीएमई का बड़ा प्रोजेक्ट
आईएचआई और एसीएमई मिलकर 4 लाख टन क्षमता वाला ग्रीन अमोनिया प्लांट बनाएंगे।
- निवेश: 29,500 करोड़ रुपये
7. ग्रीन मेथनॉल प्लांट
मित्सुबिशी गैस केमिकल और एसीएमई संयुक्त रूप से 1 लाख टन क्षमता वाला ग्रीन मेथनॉल प्लांट लगाएंगे।
- निवेश: 9,000 करोड़ रुपये
8. फूजीफिल्म की सेमीकंडक्टर पहल
फूजीफिल्म गुजरात में सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली विशेष सामग्री का उत्पादन करेगी।
9. जेएफई स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील
दोनों कंपनियां भारत में एकीकृत स्टील प्लांट स्थापित करेंगी।
- निवेश: 16,000 करोड़ रुपये
10. टोयोटा का नया वाहन संयंत्र
टोयोटा महाराष्ट्र के बिदकिन में नया ऑटोमोबाइल प्लांट स्थापित करेगी।
- वार्षिक उत्पादन क्षमता: 1 लाख वाहन
- संभावित रोजगार: करीब 2,800 लोगों को
11. एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी में सहयोग
मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक और आईआईटी हैदराबाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी और सुरक्षा क्षेत्र में मानव संसाधन विकास पर साथ काम करेंगे।
12. क्वांटम रिसर्च
याकुमो और आईआईएससी बेंगलुरु संयुक्त रूप से क्वांटम टेक्नोलॉजी पर अनुसंधान करेंगे।
13. चंद्र मिशन पर साझेदारी
जापान की आईस्पेस और भारत की डिगंतरा संयुक्त चंद्र मिशन पर सहयोग करेंगी।
14. असम में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
तोहो कोकी और आईआईटी गुवाहाटी असम में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करेंगे।
15. असम में बायोगैस प्लांट
सुजुकी आरएंडडी, एनडीडीबी और नेडफी मिलकर बायोगैस प्लांट स्थापित करेंगे।
16. एनटीटी डेटा की सबमरीन केबल परियोजना
एनटीटी डेटा भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए सबमरीन केबल परियोजना में निवेश करेगी।
- निवेश: 3,800 करोड़ रुपये
17. एमयूएफजी बैंक का बड़ा निवेश
जापान का एमयूएफजी बैंक भारतीय वित्तीय कंपनी श्रीराम फाइनेंस में निवेश करेगा।
- निवेश: 40,000 करोड़ रुपये
18. एसएमबीसी बैंक का यस बैंक में निवेश
एसएमबीसी बैंक यस बैंक में रणनीतिक निवेश करेगा।
- निवेश: 17,000 करोड़ रुपये
19. मेघालय में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा
बीआईजेएसआई मेघालय में वैल्यू एडेड एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करेगा।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सहयोग?
भारत-जापान साझेदारी अब पारंपरिक ऑटोमोबाइल सेक्टर से आगे बढ़कर कई उभरते क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
- ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया
- ग्रीन मेथनॉल
- इलेक्ट्रिक वाहन
- ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग
- सेमीकंडक्टर
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- क्वांटम टेक्नोलॉजी
- स्पेस टेक्नोलॉजी
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
- बैंकिंग और वित्त
- स्टील उद्योग
- बायोगैस और स्वच्छ ऊर्जा
- कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग
भारत को क्या होगा फायदा?
इन समझौतों का सबसे बड़ा लाभ भारत के औद्योगिक विकास और रोजगार पर पड़ेगा। ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नए निवेश से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। साथ ही अत्याधुनिक तकनीक भारत में आएगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में जापानी निवेश से भारतीय कंपनियों को पूंजी उपलब्ध होगी, जबकि ऑटोमोबाइल और स्टील सेक्टर में नई उत्पादन इकाइयों से हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
निष्कर्ष
भारत और जापान के बीच पिछले एक वर्ष में हुए 120 से अधिक बिजनेस समझौते केवल निवेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी की मजबूत नींव भी तैयार कर रहे हैं। ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, ऑटोमोबाइल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को नई दिशा दे सकता है।


