पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है। फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है और दुनिया भर में तेल का “बफर स्टॉक” तेजी से घट रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz कुछ और समय तक बंद रहा तो वैश्विक स्तर पर तेल, पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की भारी कमी पैदा हो सकती है।
ब्लूमबर्ग और अंतरराष्ट्रीय एनर्जी एजेंसियों की रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट करीब दो महीने से बाधित है। इससे दुनिया को एक अरब बैरल से ज्यादा तेल सप्लाई का नुकसान हो चुका है। अब सरकारों, रिफाइनर कंपनियों और एनर्जी मार्केट में चिंता तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति एक-दो महीने और बनी रहती है तो कई देशों में ईंधन संकट, महंगाई और आर्थिक झटका देखने को मिल सकता है।
क्यों इतना अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil transport routes में गिना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- दुनिया के बड़े crude exports इसी रूट से गुजरते हैं
- LNG सप्लाई भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती है
- एशियाई देशों की energy security इससे सीधे जुड़ी है
यही वजह है कि इस रास्ते में रुकावट का असर पूरी दुनिया की economy पर दिखाई देने लगा है।
कितनी तेजी से घट रहा है तेल स्टॉक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 मार्च से 25 अप्रैल के बीच global oil inventories में हर दिन करीब 48 लाख बैरल की गिरावट दर्ज की गई।
Morgan Stanley के डेटा के अनुसार यह गिरावट इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के रिकॉर्ड में दर्ज पिछली कई तिमाहियों से भी तेज है। इसमें लगभग 60% गिरावट crude oil में दर्ज की गई जबकि बाकी गिरावट refined fuel products में रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया का “shock absorber oil buffer” तेजी से खत्म हो रहा है।
जेपी मॉर्गन ने क्यों दी बड़ी चेतावनी?
JPMorgan Chase की ग्लोबल कमोडिटी रिसर्च हेड नताशा कानेवा ने कहा कि inventories global oil system का shock absorber होती हैं। उन्होंने कहा, “हर बैरल को सिस्टम से नहीं निकाला जा सकता।”
जेपी मॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है तो अगले महीने OECD inventories operational stress level तक पहुंच सकती हैं और सितंबर तक operational minimum level तक गिर सकती हैं।
यानी दुनिया के कई हिस्सों में fuel supply बेहद कमजोर हो सकती है।
किन देशों पर सबसे ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे ज्यादा दबाव fuel-import dependent एशियाई देशों पर दिखाई दे रहा है।
ट्रेडर्स और एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि:
- इंडोनेशिया
- वियतनाम
- पाकिस्तान
- फिलीपींस
सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
इन देशों में एक महीने के अंदर fuel shortage जैसी स्थिति बन सकती है।
भारत और जापान की स्थिति कितनी गंभीर?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास फिलहाल अपेक्षाकृत बेहतर सप्लाई मौजूद है, लेकिन चीन के बाहर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में inventories तेजी से गिरी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जापान के seasonal oil stock में करीब 50% गिरावट और भारत में करीब 10% गिरावट देखी गई है।
यह दोनों देशों के लिए पिछले लगभग 10 वर्षों के सबसे निचले seasonal levels में शामिल बताया जा रहा है।
पेट्रोल और LPG पर क्यों बढ़ा खतरा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोकेमिकल्स के लिए जरूरी:
- नैफ्था
- LPG
- gasoline (petrol)
की सप्लाई भी तेजी से प्रभावित हुई है।
एनर्जी ट्रेडर Gunvor Group के रिसर्च हेड फ्रेडरिक लासेरे ने कहा कि एशिया में सबसे पहले पेट्रोल की कमी दिखाई दे सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जून की शुरुआत तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो एशिया के कई हिस्सों को macroeconomic shock लग सकता है।
भारत ने क्या कहा?
भारत सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त crude inventories मौजूद हैं। भारत के तेल मंत्रालय ने 3 मई को कहा था कि रिफाइनरियों के पास पर्याप्त स्टॉक है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
हालांकि कई private refiners ने अनौपचारिक तौर पर supply pressure और rising costs को स्वीकार किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संकट लंबा खिंचता है तो भारत में fuel inflation, transportation cost, LPG prices और industrial input cost पर असर दिखाई दे सकता है।
अमेरिका और यूरोप में भी बढ़ी चिंता
अमेरिका में भी fuel inventories लगातार घट रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- अमेरिकी crude inventories चार हफ्तों से लगातार गिर रही हैं
- gasoline stocks seasonal lows के करीब हैं
- distillate stocks 2005 के बाद सबसे कम स्तर पर हैं
हालांकि अमेरिकी कंपनियां production बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं यूरोप में jet fuel सबसे ज्यादा प्रभावित fuel category बनकर उभरा है।
एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प हब में jet fuel stock छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस आने वाले महीनों में सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
क्या बढ़ सकती है वैश्विक महंगाई?
विशेषज्ञों का कहना है कि crude oil और fuel prices में तेजी का असर अब global inflation पर दिखाई देने लगा है।
अगर संकट लंबा चला तो:
- transportation महंगा होगा
- FMCG products महंगे होंगे
- aviation cost बढ़ेगी
- food inflation बढ़ सकती है
यानी इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंच सकता है।
क्यों अहम है यह संकट?
दुनिया की बड़ी economies अभी भी crude oil imports पर भारी निर्भर हैं। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट सिर्फ regional crisis नहीं बल्कि global economic risk बन चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले हफ्तों में हालात नहीं सुधरे तो दुनिया को fuel shortage, energy inflation, supply chain disruption और economic slowdown जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
FAQ
होर्मुज स्ट्रेट क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया के सबसे बड़े oil transport routes में शामिल है और बड़ी मात्रा में crude oil इसी रास्ते से गुजरता है।
कौन से देश सबसे ज्यादा जोखिम में हैं?
इंडोनेशिया, पाकिस्तान, फिलीपींस और वियतनाम जैसे fuel-import dependent देश सबसे ज्यादा जोखिम में बताए जा रहे हैं।
क्या भारत में भी असर दिख सकता है?
हाँ, अगर संकट लंबा चला तो fuel prices और inflation पर असर पड़ सकता है।
क्या दुनिया में तेल की कमी हो रही है?
विशेषज्ञों के मुताबिक global oil inventories तेजी से घट रही हैं।
यूरोप में कौन सा fuel सबसे ज्यादा प्रभावित है?
Jet fuel सबसे ज्यादा प्रभावित category बनकर सामने आया है।
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