पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, पैकेट वाला खाना, ड्रिंक्स और दूसरे FMCG प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं। बड़ी कंपनियां बढ़ती इनपुट कॉस्ट और सप्लाई चेन दबाव से निपटने के लिए नई रणनीति अपना रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक कई कंपनियां सीधे दाम बढ़ाने के बजाय “shrinkflation” मॉडल पर काम कर रही हैं। यानी कीमत वही रहेगी लेकिन पैकेट में सामान की मात्रा कम कर दी जाएगी। कुछ कंपनियां दोनों तरीके एक साथ इस्तेमाल कर रही हैं। यानी दाम भी बढ़ाए जा रहे हैं और पैकेट का आकार भी छोटा किया जा रहा है।
क्यों बढ़ रही है FMCG कंपनियों की लागत?
पश्चिम एशिया संकट के कारण crude oil prices में भारी उछाल आया है। इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है बल्कि FMCG सेक्टर की packaging, transportation और manufacturing cost भी तेजी से बढ़ी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक plastic packaging महंगी हुई है, laminate और chemicals की कीमतें बढ़ी हैं, logistics cost ऊपर गई है, रुपये की कमजोरी से import cost बढ़ी है और global supply chain बाधित हुई है।
यही वजह है कि कंपनियों का operational pressure लगातार बढ़ रहा है।
क्या है कंपनियों की नई स्ट्रैटेजी?
FMCG कंपनियां फिलहाल मुनाफा बचाने और बिक्री बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। इसके लिए कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं, पैकेट का वजन घटा रही हैं, discount कम कर रही हैं, छोटे पैक (SKU) बनाए रख रही हैं और supply chain optimization पर काम कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ₹5, ₹10 और ₹15 वाले छोटे पैक अभी भी बनाए रखे जा रहे हैं ताकि ग्रामीण और lower-income consumers पर अचानक बड़ा असर न पड़े।
लेकिन कई मामलों में कंपनियां धीरे-धीरे gram adjustment कर रही हैं। यानी पैकेट छोटा किया जा रहा है जबकि कीमत लगभग वही रखी जा रही है।
डाबर ने पहले ही बढ़ाए दाम
Dabur India के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी इस वित्त वर्ष में करीब 10% inflation pressure का सामना कर रही है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग categories में लगभग 4% तक price hike लागू किया जा चुका है। कंपनी internal cost management पर भी काम कर रही है।
इसके बावजूद कंपनी को इस साल double digit growth की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के मुताबिक FMCG सेक्टर में अब price-led growth ज्यादा दिखाई दे सकती है।
ब्रिटानिया ने भी दिए बड़े संकेत
Britannia Industries ने भी संकेत दिया है कि fuel और packaging cost बढ़ने के कारण आगे कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। कंपनी के MD और CEO रक्षित हरगावे ने कहा कि कंपनी direct price increase और packet size reduction दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि खासकर ₹10 से ऊपर वाले packs में gram adjustment और price increase दोनों देखने को मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि biscuit और bakery products पर सबसे ज्यादा असर packaging और fuel cost का पड़ रहा है।
HUL ने भी बढ़ाया दबाव का संकेत
Hindustan Unilever (HUL) ने भी साफ संकेत दिए हैं कि अगर commodity pressure बना रहता है तो आगे और price hikes किए जा सकते हैं। कंपनी के CFO निरंजन गुप्ता के मुताबिक material cost में 8-10% तक बढ़ोतरी हुई है और कई categories में 2-5% तक दाम बढ़ाए जा चुके हैं।
HUL के लोकप्रिय brands में Surf Excel, Lifebuoy, Dove, Sunsilk, Lakme और Clinic Plus जैसे बड़े consumer products शामिल हैं।
Fevicol बनाने वाली कंपनी भी बढ़ा सकती है दाम
Pidilite Industries ने भी संकेत दिया है कि input cost pressure के कारण कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनी के अनुसार अप्रैल और मई में दो बार price hike किया जा चुका है और input cost 40-50% तक बढ़ चुकी है।
Pidilite के लोकप्रिय brands में Fevicol, FeviKwik, Dr Fixit और M-Seal शामिल हैं।
कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड वॉटर पर भी असर
Varun Beverages के चेयरमैन रवि जयपुरिया ने कहा कि कंपनियां बढ़ती लागत के कारण discounts कम करना शुरू कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अगर fuel prices और बढ़ते हैं तो आगे promotional offers घट सकते हैं, discount कम हो सकते हैं और retail pricing पर असर पड़ सकता है।
मारिको और टाटा कंज्यूमर ने क्या कहा?
Marico ने बताया कि उसने अपने value-added hair oil portfolio में 6-7% तक price hike किया है। कंपनी के brands में Parachute, Saffola और Livon शामिल हैं।
वहीं Tata Consumer Products ने packaging और LPG/PNG लागत बढ़ने की बात कही। हालांकि diversified portfolio के कारण फिलहाल pressure manageable बताया गया है।
क्या आम लोगों पर बढ़ेगा बोझ?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में consumers को धीरे-धीरे महंगे FMCG products, छोटे पैकेट, कम discounts और reduced quantity का सामना करना पड़ सकता है।
इसका असर खासकर middle class और lower income households पर ज्यादा पड़ सकता है क्योंकि रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें सीधे household budget को प्रभावित करती हैं।
क्यों अहम है यह मामला?
FMCG सेक्टर भारत की economy और consumption pattern का बड़ा indicator माना जाता है। अगर crude oil prices ऊंचे बने रहते हैं, Middle East tensions जारी रहते हैं और logistics cost बढ़ती रहती है, तो आने वाले महीनों में retail inflation पर भी दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक “दाम बढ़ाओ, माल घटाओ” वाली रणनीति आने वाले समय में और ज्यादा दिखाई दे सकती है।
FAQ
FMCG products महंगे क्यों हो रहे हैं?
कच्चे तेल की कीमतों, packaging cost और logistics expenses बढ़ने के कारण कंपनियों की लागत बढ़ गई है।
Shrinkflation क्या होती है?
जब कीमत लगभग वही रहती है लेकिन पैकेट में सामान की मात्रा कम कर दी जाती है, उसे shrinkflation कहा जाता है।
किन products पर असर पड़ सकता है?
साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, स्नैक्स, ड्रिंक्स, पैकेज्ड फूड और personal care products महंगे हो सकते हैं।
क्या कंपनियां सीधे दाम बढ़ा रही हैं?
हाँ, कई कंपनियां 3-5% तक price hike कर चुकी हैं।
आम लोगों पर इसका क्या असर होगा?
Household expenses बढ़ सकते हैं और रोजमर्रा की चीजों पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
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