ईरान युद्ध और महंगे एयर टिकटों का असर अब पर्यटन उद्योग पर भी
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक संकट का असर अब सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहा है। इसका प्रभाव भारतीय पर्यटन उद्योग और अंतरराष्ट्रीय यात्रा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों, लंबी उड़ान अवधि और कई देशों के एयरस्पेस बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई किरायों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर भारतीय यात्रियों की पसंद पर पड़ा है।
जहां पहले गर्मियों की छुट्टियों में यूरोप और अमेरिका भारतीय पर्यटकों की पहली पसंद हुआ करते थे, वहीं अब लोग कम दूरी वाले और अपेक्षाकृत सस्ते गंतव्यों की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रैवल कंपनियों के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया और पड़ोसी देशों की मांग में इस साल तेज उछाल देखा गया है।
क्यों बढ़ गए हवाई किराए?
एयरलाइन उद्योग की कुल परिचालन लागत में विमान ईंधन यानी एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की हिस्सेदारी 35 से 45 प्रतिशत तक होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से एयरलाइंस की लागत बढ़ गई है। इसके अलावा ईरान और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण कई एयरलाइंस को वैकल्पिक और लंबे मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं। इससे उड़ान का समय बढ़ रहा है, ईंधन की खपत अधिक हो रही है और टिकट की कीमतें ऊपर जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है क्योंकि इन रूट्स पर कई विमान पहले पश्चिम एशियाई एयरस्पेस का उपयोग करते थे।
यूरोप और अमेरिका की मांग में गिरावट
ट्रैवल इंडस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि महंगे टिकट और लंबी यात्रा अवधि के कारण यूरोप जाने वाली बुकिंग में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। यात्रियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में कई यूरोपीय शहरों के टिकट 20 से 35 प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा वीजा प्रक्रिया, होटल लागत और स्थानीय खर्चों में वृद्धि ने भी यात्रियों को नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यही वजह है कि इस साल बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक लंबी दूरी के बजाय कम दूरी वाले अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
फिलीपींस बना नया फेवरेट डेस्टिनेशन
ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के अनुसार इस वर्ष फिलीपींस भारतीय पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय विदेशी गंतव्य बनकर उभरा है। इसके अलावा थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम और इंडोनेशिया के बाली द्वीप की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इन देशों की लोकप्रियता के पीछे कई कारण हैं: 4 से 6 घंटे की अपेक्षाकृत छोटी उड़ान, कई देशों में आसान या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा, यूरोप की तुलना में कम खर्च, परिवार और युवा यात्रियों के लिए बेहतर बजट विकल्प ट्रैवल कंपनियों का कहना है कि इन गंतव्यों के लिए पैकेज बुकिंग में पिछले साल की तुलना में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है।
जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर बढ़ा झुकाव
थॉमस कुक इंडिया और एसओटीसी ट्रैवल के अधिकारियों के अनुसार भारतीय पर्यटक अब जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। विशेष रूप से जापान के टोक्यो और दक्षिण कोरिया के बुसान जैसे शहरों के लिए पूछताछ में 90 से 95 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता, बेहतर कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक आकर्षण इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
पड़ोसी देशों को भी मिल रहा फायदा
महंगे हवाई किराए के बीच श्रीलंका, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों की मांग भी बढ़ी है। इन देशों में जाने के लिए अपेक्षाकृत कम खर्च आता है और यात्रा अवधि भी कम होती है। यही कारण है कि परिवार और मध्यम आय वर्ग के यात्री इन विकल्पों को अधिक पसंद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयरफेयर लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो आने वाले महीनों में इन देशों में भारतीय पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है।
घरेलू पर्यटन को मिला बड़ा फायदा
अंतरराष्ट्रीय यात्रा महंगी होने का सबसे बड़ा लाभ भारत के घरेलू पर्यटन उद्योग को मिला है। क्लियरट्रिप के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान का जैसलमेर इस साल सबसे लोकप्रिय घरेलू गंतव्य बनकर उभरा है। प्लेटफॉर्म पर जैसलमेर के लिए बुकिंग में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा जयपुर, उदयपुर, वाराणसी, लखनऊ, ऋषिकेश और कोझिकोड जैसे शहरों की मांग भी तेजी से बढ़ी है।
पूर्वोत्तर भारत की लोकप्रियता बढ़ी
ट्रैवल कंपनियों के अनुसार पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लिए भी डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है। मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और असम जैसे राज्यों में प्राकृतिक सौंदर्य, एडवेंचर टूरिज्म और बेहतर सड़क एवं हवाई संपर्क के कारण पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत घरेलू पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
पर्यटन उद्योग पर क्या होगा असर?
पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो एयरलाइन कंपनियां किराए में और बढ़ोतरी कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में कमजोरी बनी रह सकती है। दक्षिण-पूर्व एशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की मांग बढ़ सकती है। घरेलू पर्यटन उद्योग को और फायदा मिल सकता है। बजट यात्रियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।
आगे क्या?
भारतीय यात्रियों की बदलती पसंद यह दिखाती है कि अब यात्रा का निर्णय केवल गंतव्य के आकर्षण से नहीं बल्कि कुल लागत, उड़ान अवधि और वीजा सुविधा जैसे कारकों से भी प्रभावित हो रहा है। ईरान संकट और बढ़ते एयरफेयर ने पर्यटन उद्योग का समीकरण बदल दिया है। यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में एशियाई देशों और भारत के घरेलू पर्यटन बाजार को सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है, जबकि यूरोप और अमेरिका जैसे पारंपरिक गंतव्यों की मांग दबाव में रह सकती है।
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