नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का एक और संकेत सामने आया है। मई 2026 में देश का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.2 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन भारत में उपभोग, औद्योगिक गतिविधियों और आयात में मजबूती बनी हुई है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में सकल GST संग्रह 1.88 लाख करोड़ रुपये था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा घरेलू मांग में सुधार, कारोबार के विस्तार और आयात गतिविधियों में तेजी का संकेत देता है।
GST संग्रह में बढ़ोतरी क्यों महत्वपूर्ण है?
GST संग्रह को किसी भी अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। जब वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री बढ़ती है, तब सरकार को अधिक टैक्स प्राप्त होता है। ऐसे में GST संग्रह में वृद्धि यह दर्शाती है कि बाजार में मांग मजबूत है और व्यापारिक गतिविधियां सामान्य से बेहतर चल रही हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, मई का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता खर्च में स्थिरता बनी हुई है और कंपनियों की उत्पादन गतिविधियां भी मजबूत हैं। यह आने वाले महीनों में आर्थिक विकास दर को समर्थन दे सकता है।
घरेलू लेनदेन से मिला बड़ा योगदान
मई 2026 के दौरान विभिन्न GST श्रेणियों से सरकार को निम्नलिखित राजस्व प्राप्त हुआ:
| GST श्रेणी | संग्रह (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| CGST | 37,397 |
| SGST | 45,143 |
| IGST | 51,990 |
| आयात पर IGST | 59,654 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि घरेलू लेनदेन के साथ-साथ आयात आधारित कर संग्रह ने भी GST राजस्व को मजबूती प्रदान की है।
वस्तुओं और सेवाओं की मांग में जोरदार वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई के दौरान कर योग्य वस्तुओं की आपूर्ति में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि विनिर्माण, व्यापार और वितरण गतिविधियां तेज हुई हैं।
वहीं सेवाओं के क्षेत्र में 22.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि यात्रा, होटल, बैंकिंग, बीमा, आईटी और अन्य सेवा क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती घरेलू खपत भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती प्रदान कर रही है।
आयात से GST संग्रह में बड़ी छलांग
मई के आंकड़ों में सबसे उल्लेखनीय बात आयात पर GST संग्रह की मजबूत वृद्धि रही।
आयात से IGST संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर 59,654 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह संकेत देता है कि देश में औद्योगिक कच्चे माल, मशीनरी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात में वृद्धि हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि आयात आधारित कर संग्रह में वृद्धि उद्योगों की विस्तार योजनाओं और उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी का संकेत हो सकती है। इससे आने वाले महीनों में औद्योगिक उत्पादन को भी समर्थन मिलने की संभावना है।
रिफंड बढ़ने के बावजूद मजबूत रहा राजस्व
GST रिफंड भी मई में 2.6 प्रतिशत बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये हो गया।
रिफंड का स्तर बढ़ना आमतौर पर निर्यात और उत्पादन गतिविधियों में बढ़ोतरी का संकेत माना जाता है। रिफंड समायोजन के बाद मई 2026 में सरकार का नेट GST राजस्व लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.3 प्रतिशत अधिक है।
यह दर्शाता है कि रिफंड देने के बावजूद सरकार का वास्तविक कर संग्रह मजबूत बना हुआ है।
GST व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जलान के अनुसार, मई 2026 के GST आंकड़े अवसर और चुनौतियां दोनों प्रस्तुत करते हैं।
उनका कहना है कि आयात आधारित GST संग्रह में मजबूत वृद्धि ने कुल राजस्व को समर्थन दिया है, लेकिन GST ढांचे में कुछ संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुधारों पर जोर दिया है:
- उल्टी शुल्क संरचना (Inverted Duty Structure) की समस्या का समाधान
- इनपुट सर्विसेज पर रिफंड प्रक्रिया को सरल बनाना
- टैक्सपेयर्स को ‘रिस्की’ टैग करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना
- पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे में लाने पर विचार करना
- रिफंड दावों की मंजूरी में लगने वाले समय को कम करना
उनका मानना है कि ये सुधार व्यवसायों की लागत कम कर सकते हैं और कर प्रणाली को अधिक सरल बना सकते हैं।
क्या पेट्रोलियम उत्पादों को GST में लाया जा सकता है?
GST लागू होने के बाद भी पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल जैसे उत्पाद GST के बाहर हैं। कई उद्योग संगठन और टैक्स विशेषज्ञ लंबे समय से इन्हें GST के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे टैक्स की दोहरी व्यवस्था समाप्त होगी और परिवहन लागत कम हो सकती है।
हालांकि राज्यों की राजस्व चिंताओं के कारण इस विषय पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। आगामी GST काउंसिल बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
अप्रैल में बना था नया रिकॉर्ड
मई का GST संग्रह भले ही अप्रैल के मुकाबले कम रहा हो, लेकिन यह सामान्य मौसमी पैटर्न का हिस्सा माना जाता है। अप्रैल 2026 में GST संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जो अब तक का सर्वाधिक मासिक GST संग्रह है। अप्रैल के रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद मई में भी 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह यह दिखाता है कि कर राजस्व का आधार लगातार मजबूत हो रहा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार मई का GST डेटा कई सकारात्मक संकेत देता है:
- घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।
- उपभोक्ता खर्च में गिरावट नहीं आई है।
- औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
- आयात और व्यापार प्रवाह मजबूत हैं।
- सरकार का कर आधार लगातार विस्तृत हो रहा है।
यदि आने वाले महीनों में यही रुझान जारी रहता है, तो इससे वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी राजस्व और आर्थिक विकास दोनों को मजबूती मिल सकती है।
निष्कर्ष
मई 2026 में GST संग्रह का 1.94 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। घरेलू मांग, सेवाओं की खपत और आयात आधारित गतिविधियों में वृद्धि ने कर राजस्व को समर्थन दिया है। हालांकि विशेषज्ञ GST व्यवस्था में कुछ संरचनात्मक सुधारों की जरूरत भी बता रहे हैं। आने वाले महीनों में GST काउंसिल के फैसले और आर्थिक गतिविधियों की गति यह तय करेगी कि यह सकारात्मक रुझान कितनी मजबूती से आगे बढ़ता है।
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