Gold Silver Prices Today: घरेलू सर्राफा बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का भाव ₹2,000 प्रति 10 ग्राम बढ़कर ₹1,58,800 पर पहुंच गया। सोने की कीमत में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई है। बाजार में रिटेलर्स और स्टॉकिस्ट्स की मांग बेहतर रहने से घरेलू कीमतों को सपोर्ट मिला।
वहीं, लगातार दो कारोबारी सत्र तक स्थिर रहने के बाद चांदी की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई। चांदी ₹730 प्रति किलोग्राम महंगी होकर ₹2,40,730 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। हालांकि, घरेलू बाजार में तेजी के विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली।
दिल्ली में सोना और चांदी आज कितने रुपये पर पहुंचे?
18 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों प्रमुख कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
| कीमती धातु | पिछली कीमत | आज की कीमत | बदलाव |
|---|---|---|---|
| सोना | ₹1,56,800/10 ग्राम | ₹1,58,800/10 ग्राम | ₹2,000 तेजी |
| चांदी | ₹2,40,000/किलो | ₹2,40,730/किलो | ₹730 तेजी |
सोने में आई ₹2,000 की तेजी घरेलू बाजार में मजबूत मांग का संकेत देती है। खासकर रिटेलर्स और स्टॉकिस्ट्स की खरीदारी बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला। चांदी में भी खरीदारी का रुझान मजबूत रहा, जिसके चलते इसका भाव दो सत्र तक स्थिर रहने के बाद ऊपर आया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी कमजोर
घरेलू बाजार में तेजी के बीच अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में मंगलवार को सोने और चांदी पर दबाव दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, स्पॉट गोल्ड 0.51 फीसदी गिरकर 4,393 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब 1.41 फीसदी टूटकर 64.82 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
इस तरह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच फिलहाल अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं। भारत में मजबूत स्थानीय मांग और रुपये से जुड़े प्रभाव घरेलू कीमतों को सपोर्ट कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का असर बुलियन पर दिखाई दे रहा है।
क्रूड ऑयल की तेजी से सोने पर क्यों पड़ा दबाव?
बुलियन बाजार के लिए इस समय कच्चे तेल की कीमतें भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अगस्त को ब्रेंट क्रूड एक समय 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया था।
मिरै एसेट शेयरखान के कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से क्रूड की कीमतों में उछाल आया है और इसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ा है।
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम 17 अगस्त को समाप्त होने के बाद बाजार में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ी है। निवेशक अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्षेत्रीय तनाव आगे किस दिशा में जाता है और इसका तेल की सप्लाई पर कितना असर पड़ता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बाजार की नजर
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी वैश्विक कमोडिटी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। अगर यहां लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है।
क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। महंगा तेल परिवहन और उत्पादन लागत को बढ़ा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
यही वजह है कि निवेशक इस समय सोने के साथ-साथ क्रूड ऑयल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरों पर भी लगातार नजर रख रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से चांदी पर दबाव
कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीबी कायनात चेनवाला के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब 65 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है। चांदी की कीमत पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का असर दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा हाल की तेजी के बाद चांदी में मुनाफावसूली भी देखने को मिली है। जब किसी कमोडिटी में तेज उछाल आता है तो कुछ निवेशक मुनाफा बुक करते हैं। इससे कीमतों पर अस्थायी दबाव बन सकता है।
चांदी के मामले में यह दबाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल निवेश कीमती धातु नहीं है, बल्कि इंडस्ट्रियल मेटल के तौर पर भी इस्तेमाल होती है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक मांग में बदलाव का असर इसकी कीमत पर पड़ सकता है।
क्या सोने के लिए अभी भी माहौल सकारात्मक है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालिया कमजोरी के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि बुलियन के लिए व्यापक तस्वीर फिलहाल पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुई है।
सोने को सपोर्ट देने वाले कई फैक्टर अभी भी मौजूद हैं। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी और निवेशकों की मांग प्रमुख हैं।
अगर बाजार को लगता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी नहीं करेगा, तो सोने के लिए माहौल बेहतर हो सकता है। आमतौर पर कम ब्याज दरों की उम्मीद से ऐसे एसेट्स को फायदा मिल सकता है जिनसे नियमित ब्याज आय नहीं होती।
इसके अलावा चीन समेत दुनिया के कई केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी कर रहे हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी लंबे समय में सोने की कीमतों के लिए सपोर्टिंग फैक्टर मानी जाती है।
फेड के फैसले और महंगाई पर रहेगी नजर
आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और महंगाई के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। अगर क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और उससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता मुश्किल हो सकता है।
दूसरी तरफ, अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और फेड से ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत होती है, तो सोने को फिर से सपोर्ट मिल सकता है।
इसलिए फिलहाल बुलियन बाजार में एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग है, तो दूसरी तरफ ऊंची बॉन्ड यील्ड और क्रूड की तेजी जैसे दबाव भी मौजूद हैं।
आगे सोने-चांदी का क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, निकट अवधि में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। घरेलू बाजार में त्योहारी सीजन की मांग बढ़ने पर सोने और चांदी को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है। वहीं, वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड, फेड की नीति और पश्चिम एशिया की स्थिति कीमतों की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर रहेंगे।
अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तथा क्रूड ऑयल की सप्लाई पर असर पड़ता है, तो महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं। इससे फेड की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं, जिसका असर सोने पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग भी बढ़ सकती है। ऐसे में सोने की कीमतों पर दो विपरीत ताकतों का असर देखने को मिल सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सोने और चांदी की कीमतें इस समय ऊंचे स्तरों के आसपास हैं, इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेने से बचना चाहिए। बुलियन में निवेश करते समय अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ डॉलर-रुपया विनिमय दर, घरेलू मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक ब्याज दरों पर भी नजर रखना जरूरी है।
चांदी में भी हाल की तेजी के बाद उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए छोटे निवेशकों के लिए एकमुश्त बड़ी खरीदारी के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
Gold Silver Prices Today: क्या है निष्कर्ष?
18 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना ₹2,000 बढ़कर ₹1,58,800 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹730 बढ़कर ₹2,40,730 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। घरेलू मांग ने दोनों कीमती धातुओं को सहारा दिया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल की तेजी के कारण दबाव देखने को मिला।
आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, क्रूड ऑयल की कीमतें, पश्चिम एशिया का तनाव और केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी बुलियन बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे। इसलिए सोने और चांदी में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


