Gold Silver Price Today: भारतीय सर्राफा बाजार में शनिवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव करीब 0.79% टूटकर ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी का वायदा भाव ₹2,400 यानी करीब 1% गिरकर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में यह कमजोरी मुख्य रूप से वैश्विक बाजार में आई नरमी, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली का असर है।
Highlights
- MCX पर सोना 0.79% गिरकर ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम
- चांदी ₹2,400 टूटकर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम से नीचे
- COMEX गोल्ड और सिल्वर में भी कमजोरी
- डॉलर की रिकवरी और मुनाफावसूली से बुलियन पर दबाव
- त्योहारी सीजन से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर
MCX पर सोना और चांदी के ताजा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना 0.79% की गिरावट के साथ ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं 4 सितंबर डिलीवरी वाली चांदी लगभग ₹2,400 की गिरावट के साथ ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे फिसल गई।
हालांकि सप्ताह की शुरुआत में दोनों कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिली थी, लेकिन सप्ताह के अंत तक बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव हावी हो गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखी कमजोरी
घरेलू बाजार की तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बुलियन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
- COMEX Gold Futures: 0.39% गिरकर 4,144.40 डॉलर प्रति औंस
- COMEX Silver Futures: 0.22% गिरकर 58.89 डॉलर प्रति औंस
पिछले कारोबारी सत्र में एक सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद स्पॉट गोल्ड में भी हल्की गिरावट देखने को मिली।
सोना और चांदी की कीमतें क्यों गिरीं?
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
1. अमेरिकी डॉलर में मजबूती
इस सप्ताह की शुरुआत में डॉलर में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन बाद में इसमें रिकवरी आई। मजबूत डॉलर के कारण सोना और चांदी विदेशी निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग कमजोर पड़ती है और कीमतों पर दबाव आता है।
2. मुनाफावसूली
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के बाद बुलियन में अच्छी तेजी आई थी। इसी तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा वसूला, जिससे कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
3. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी सोने की तेजी को सीमित कर रही है क्योंकि निवेशकों को सुरक्षित विकल्प के रूप में बॉन्ड आकर्षक लगने लगते हैं।
गिरावट के बावजूद सोने को क्यों मिल रहा है सपोर्ट?
हालांकि शुक्रवार को सोने की कीमतों में कमजोरी रही, लेकिन पूरे महीने के प्रदर्शन को देखें तो सोना लगातार मजबूत बना हुआ है।
इसके पीछे प्रमुख कारण हैं—
- अमेरिकी मौद्रिक सख्ती की रफ्तार धीमी पड़ने की उम्मीद
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
- मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
- सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की बढ़ती मांग
यही वजह है कि पांच महीनों में पहली बार सोना मासिक आधार पर बढ़त दर्ज करने की राह पर दिखाई दे रहा है।
एक्सपर्ट की राय
कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP कायनात चेनवाला के अनुसार,
“कीमती धातुएं फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में नरमी सोने को सपोर्ट दे रही है, जबकि मजबूत डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व का सख्त रुख तेजी को सीमित कर रहा है।”
उनका मानना है कि फिलहाल बाजार में बड़े ट्रेंड की बजाय रेंज-बाउंड मूवमेंट देखने को मिल सकती है।
भारतीय खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत में सोने और चांदी की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होतीं। इन पर कई अन्य कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
- अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतें
- डॉलर-रुपया विनिमय दर
- आयात शुल्क और अन्य लागत
- घरेलू मांग
- शादी और त्योहारी सीजन की खरीदारी
यदि वैश्विक बाजार में कमजोरी जारी रहती है और रुपया स्थिर रहता है, तो घरेलू बाजार में भी कीमतों में राहत मिल सकती है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट क्या कहती है?
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत में ऊंची कीमतों के कारण सोने की फिजिकल मांग पर दबाव रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक—
- सालाना आधार पर सोने की मांग में 6% की गिरावट दर्ज की गई।
- हालांकि कुल उपभोक्ता खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया क्योंकि सोने की कीमतें काफी ऊंची बनी रहीं।
- पिछली तिमाही की तुलना में ज्वेलरी की मांग में सुधार देखने को मिला, जिसका कारण शादी और त्योहारी खरीदारी रही।
आगे किन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर?
बाजार की नजर अब अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी, जिनमें शामिल हैं—
- यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन कंज्यूमर सेंटीमेंट
- महंगाई की उम्मीदों (Inflation Expectations) का डेटा
- अमेरिकी डॉलर इंडेक्स
- ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड
- फेडरल रिजर्व की आगामी नीति संकेत
- पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति
इन सभी कारकों से आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय हो सकती है।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
यदि आपका उद्देश्य लंबी अवधि का निवेश या त्योहारी एवं शादी की खरीदारी है, तो मौजूदा गिरावट को चरणबद्ध खरीदारी (SIP या Averaging) के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। वहीं, अल्पकालिक ट्रेडर्स को अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की चाल पर नजर रखते हुए निवेश रणनीति बनानी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


