Gold Silver Price Outlook 2027: वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट में सोने और चांदी की कीमतों को लेकर बड़ा अनुमान जताया गया है। बैंक के मुताबिक, 2026 में रिकॉर्ड तेजी के बाद आने वाले दो वर्षों में दोनों कीमती धातुओं के दाम में गिरावट आ सकती है। खासकर चांदी को 2027 और 2028 में बड़े करेक्शन का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी रह सकती है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ समय से जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ इन कीमती धातुओं ने इस साल नए रिकॉर्ड बनाए हैं, तो दूसरी तरफ हाल के दिनों में इनके भाव में बड़ी गिरावट भी दर्ज की गई है। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या सोने-चांदी की तेजी अब खत्म होने वाली है? क्या आने वाले दो वर्षों में इनकी कीमतें और नीचे जा सकती हैं?
अगर आप भी गोल्ड या सिल्वर में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। विश्व बैंक ने अपनी ‘कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक’ रिपोर्ट में 2026, 2027 और 2028 के लिए सोने और चांदी की कीमतों का अनुमान जारी किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में दोनों धातुओं की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी के बाद अगले दो वर्षों में बाजार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोना-चांदी अपने पुराने स्तर पर लौट जाएंगे। कीमतें ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर बनी रहने का अनुमान है।
कॉमेक्स और MCX पर क्या हैं सोने-चांदी के ताजा भाव?
वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। कॉमेक्स पर सोना 1.44 फीसदी टूटकर 4,054 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। इस दौरान इसकी कीमत में 59 डॉलर से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, चांदी में भी बिकवाली देखने को मिली। कॉमेक्स पर सिल्वर का भाव 1.74 फीसदी गिरकर 52 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया।
भारतीय वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) की बात करें तो सोने की कीमत 2,356 रुपये गिरकर 1,41,739 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। इसमें 1.65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
चांदी का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। MCX पर चांदी 3,424 रुपये टूटकर 1,83,716 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि वायदा बाजार के भाव और देश के अलग-अलग शहरों में मिलने वाले रिटेल गोल्ड-सिल्वर के दाम अलग हो सकते हैं। ज्वैलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य लागू शुल्क भी कीमत को प्रभावित करते हैं।
2026 में कहां पहुंचेगा सोने का भाव?
वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में सोने की औसत कीमत लगभग 4,600 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। यह 2025 के औसत भाव के मुकाबले करीब 33.6 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
इस तेजी के पीछे वैश्विक अनिश्चितता, सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी जैसे कारक महत्वपूर्ण रहे हैं।
हालांकि, वर्ल्ड बैंक का मानना है कि 2026 के बाद सोने की कीमतों में तेजी की रफ्तार कम हो सकती है। 2027 में गोल्ड की औसत कीमत 7.6 फीसदी घटकर लगभग 4,250 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान है।
इसके बाद 2028 में भी गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है। बैंक के मुताबिक, इस साल सोने की कीमत में करीब 5.9 फीसदी की और कमी आ सकती है और इसका औसत भाव 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच सकता है।
इसका मतलब है कि अगले दो वर्षों में सोने में करेक्शन की आशंका जरूर है, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
चांदी के निवेशकों को लग सकता है बड़ा झटका
सोने के मुकाबले चांदी को लेकर वर्ल्ड बैंक का अनुमान थोड़ा ज्यादा चिंताजनक है। पिछले कुछ समय में चांदी ने कई मौकों पर सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। औद्योगिक मांग और निवेशकों की दिलचस्पी ने इसकी कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में चांदी की औसत कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। यह 2025 के मुकाबले करीब 76 फीसदी की सालाना बढ़त को दर्शाता है।
लेकिन यह तेजी लंबे समय तक जारी रहने की उम्मीद नहीं है। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि 2027 में चांदी की औसत कीमत 11 फीसदी से ज्यादा गिरकर लगभग 62 डॉलर प्रति औंस रह सकती है।
2028 में भी चांदी पर दबाव बना रहने की आशंका है। इस दौरान इसकी औसत कीमत घटकर करीब 58 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है।
इस तरह 2026 के 70 डॉलर के अनुमानित स्तर से 2028 तक चांदी में लगभग 17 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि वर्ल्ड बैंक के ये अनुमान सालाना औसत कीमतों के हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि चांदी का भाव हर दिन इसी स्तर पर रहेगा या किसी खास तारीख को बिल्कुल इसी कीमत पर कारोबार करेगा।
सोने-चांदी की कीमतों पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?
कीमती धातुओं में गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण काम कर रहे हैं। इनमें अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें प्रमुख हैं।
जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए डॉलर में कारोबार करने वाली सोने और चांदी जैसी धातुएं महंगी हो जाती हैं। इससे इनकी मांग प्रभावित हो सकती है।
इसी तरह, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्पों में आकर्षक रिटर्न मिलने लगता है। ऐसी स्थिति में कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड या अन्य वित्तीय विकल्पों में लगा सकते हैं।
इसके अलावा, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी कीमतों के कारण ज्वैलरी की मांग पर भी असर पड़ रहा है। भारत और अन्य बड़े बाजारों में ऊंचे दाम आम खरीदारों को खरीदारी टालने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के दौरान मुनाफावसूली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। जब किसी एसेट की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं। इससे कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट आ सकती है।
सोने की कीमतों को किन वजहों से मिल सकता है सहारा?
भले ही वर्ल्ड बैंक ने आने वाले वर्षों में सोने की कीमतों में नरमी का अनुमान जताया है, लेकिन इसके कई ऐसे बुनियादी कारक हैं जो गोल्ड को मजबूती दे सकते हैं।
सबसे बड़ा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्ष और आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोने का रुख करते हैं। गोल्ड को लंबे समय से सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता रहा है।
इसके अलावा, दुनिया के केंद्रीय बैंक भी सोने की खरीदारी कर रहे हैं। केंद्रीय बैंकों के लिए गोल्ड विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और वैश्विक आर्थिक जोखिमों से बचाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भी केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और निवेश की मांग को सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण समर्थन बताया गया है।
अगर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी रहती है और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी मजबूत रहती है, तो सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है।
चांदी की औद्योगिक मांग पर भी टिकी रहेंगी निगाहें
चांदी सिर्फ निवेश और ज्वैलरी तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोबाइल, मेडिकल उपकरण और कई औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। यही वजह है कि चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग का भी बड़ा असर पड़ता है।
हाल के वर्षों में सोलर एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है। लेकिन अब सोलर पैनल निर्माता उत्पादन लागत कम करने के लिए चांदी की खपत घटाने और कुछ मामलों में कॉपर जैसे विकल्पों के इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं।
अगर यह बदलाव बड़े स्तर पर होता है, तो चांदी की औद्योगिक मांग पर दबाव पड़ सकता है। इससे आने वाले वर्षों में इसकी कीमतों की तेजी सीमित हो सकती है।
दूसरी तरफ, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में चांदी की उपयोगिता बनी हुई है। इन क्षेत्रों में उत्पादन और निवेश बढ़ने से चांदी की मांग को समर्थन मिल सकता है।
इसलिए चांदी के भविष्य का रुख इस बात पर भी निर्भर करेगा कि औद्योगिक मांग में कितनी तेजी आती है और सोलर सेक्टर में चांदी की जगह दूसरे मटेरियल कितनी तेजी से इस्तेमाल किए जाते हैं।
क्या सोने-चांदी में निवेश का मौका खत्म हो गया है?
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि 2026 में रिकॉर्ड तेजी के बाद सोने और चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खासकर चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा गिरावट का अनुमान लगाया गया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों धातुओं में निवेश का मौका पूरी तरह खत्म हो गया है। सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन मिल सकता है। वहीं, चांदी के लिए औद्योगिक मांग एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेगी।
निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल रिकॉर्ड तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। सोने और चांदी में निवेश करने से पहले अपने निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और पोर्टफोलियो में इनकी हिस्सेदारी पर ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर, वर्ल्ड बैंक का अनुमान बताता है कि सोने और चांदी की कहानी 2026 के बाद बदल सकती है। सोना जहां 2028 तक 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना रह सकता है, वहीं चांदी में 58 डॉलर प्रति औंस तक गिरावट का अनुमान है। ऐसे में आने वाले दो साल कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाले हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए भाव और वर्ल्ड बैंक के अनुमान बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं। इसे निवेश की सलाह न समझें। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
Source: World Bank की Commodity Markets Outlook रिपोर्ट और उपलब्ध बाजार आंकड़ों पर आधारित।


